कहते हैं जो
तुम न कर पाओगे
वही तो अब
करने की ठानी है।
गिरी हूं
मगर हारी नहीं,
टूटी हूं
मगर बिखरी नहीं,
थकी हूं
मगर हिम्मत हारी नहीं,
राह में मुश्किलें
हजारों हैं
मगर जो कि नहीं
थकी हूं
मगर जीवन से हारी नहीं।
तृषा चौधरी
कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश
कहते हैं जो
तुम न कर पाओगे
वही तो अब
करने की ठानी है।
गिरी हूं
मगर हारी नहीं,
टूटी हूं
मगर बिखरी नहीं,
थकी हूं
मगर हिम्मत हारी नहीं,
राह में मुश्किलें
हजारों हैं
मगर जो कि नहीं
थकी हूं
मगर जीवन से हारी नहीं।
तृषा चौधरी
कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश