कछौना (हरदोई) – एससी-एसटी बिल के विरोध में देशव्यापी बंद के दौरान नगर कछौना में सवर्ण और पिछड़ा वर्ग सहित कई सामाजिक संगठनों के लोगों ने रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया l प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने अपना सिर मुंडवाकर विरोध जताया l इसके अलावा नगर के सवर्ण तथा पिछड़ा वर्ग दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठान को बंद करके सरकार के फैसले का विरोध किया l
देश की शीर्ष अदालत के फैसले के विपरीत जाकर केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा एससी-एसटी एक्ट में संशोधन कर उसे मूल स्वरूप में बहाल करने संबंधी विधेयक पारित करने के बाद पूरे देश के सवर्ण समुदाय और संगठनों के लोग इसका विरोध करते हुए सड़कों पर निकल पड़े हैं l केंद्र सरकार द्वारा पारित एससी-एसटी विधेयक को लेकर केंद्र सरकार चारों ओर घिरती नजर आ रही है l बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार के इस फैसले के विरोध में देशव्यापी बंद के दौरान नगर कछौना में रेलवेगंज से स्टेशन रोड होते हुए नगर के मुख्य चौराहे तक सरकार विरोधी नारों के साथ सामान्य पिछड़ा वर्ग समाज के लोगों ने पैदल मार्च निकाला l जिसमें बड़ी संख्या में सवर्ण समाज, पिछड़ा वर्ग, करणी सेना सहित कई सामाजिक संगठनों के लोगों ने भाग लेकर एससी-एसटी बिल व आरक्षण नीति पर विरोध दर्ज कराया l प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने नगर के मुख्य चौराहे पर सिर मुंडवाकर सरकार के फैसले पर विरोध जताया l नगर के सवर्ण और पिछड़ा वर्ग के दुकानदारों ने एससी-एसटी बिल में संशोधन के फैसले पर विरोध करते हुए प्रदर्शन के दौरान अपने-अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिये l प्रदर्शन के दौरान उपद्रव की आशंका के चलते उप निरीक्षक संतोष श्रीवास्तव के नेतृत्व में भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा l
प्रदर्शनकारी विनय शुक्ला ने बताया कि देश में एससी-एसटी एक्ट के हो रहे दुरुपयोग के चलते देश की शीर्ष अदालत ने बिल में अहम बदलाव करते हुए सही फैसला दिया था l जिसमे संशोधन कर मूल स्वरूप में लाने का सरकार का निर्णय सरासर गलत है जिसका खामियाजा भाजपा सरकार को आगामी चुनाव में उठाना पड़ेगा l
सूरज पांडे ने बताया कि इसमें कोई दोराय नहीं कि एससी-एसटी ऐक्ट कानून से वंचित व शोषित समाज को सम्मान के साथ जीने में बहुत बड़ा सहारा मिला है और उत्पीड़न की घटनाओं पर विराम लगाने में काफी मदद भी मिली है l परंतु वर्तमान परिदृश्य में यह देखने को मिल रहा है कि यह कानून सामान्य वर्ग के लोगों के उत्पीड़न और ब्लैकमेलिंग का हथियार बन गया है l जिस तरफ एक सकारात्मक कदम देश के सर्वोच्च न्यायालय ने उठाया और इस एक्ट के दुरुपयोग को रोकने के लिए सामयिक सुधार करते हुए निर्णय सुनाया l
एससी-एसटी बिल के विरोध में प्रदर्शन कर रहे अजय शुक्ला ने बताया कि हर कानून में समय-समय पर तत्कालिक जरूरतों के अनुसार बदलाव व सुधार होते आए हैं l केंद्र सरकार को न्यायालय के निर्णय की विपरीत जाने से पहले यह सोचना था, न्यायालय के इस निर्णय से एससी एसटी एक्ट को लेकर सवर्ण और पिछड़ा वर्ग समाज में व्याप्त भय का वातावरण समाप्त हो जायेगा और यह कानून मजबूत व प्रभावी रूप से सामने आएगा l वंचितों व शोषितों की उन असल व वाजिब शिकायतों का निवारण होगा जो आज फर्जी केसों के बीच दही कराह रही हैं l परंतु सरकार ने विधेयक को पूर्व स्वरुप में पुनः पारित कर सवर्ण व पिछड़ों को एससी एसटी एक्ट के भय के साए में जीने को मजबूर कर दिया है जो सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद स्वयं को इस भय के साए से बाहर निकला मान रहे थे l