रेडियो-जॉकी-उद्घोषक आदिक के लिए शुद्ध शब्दों की जानकारी अत्यावश्यक– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

‘रेडियो मिर्ची’ के इतिहास में पहली बार ‘शब्दों’ पर सारगर्भित विचार

◆ प्रस्तोता– राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव

“देश में जितने भी प्रचार और प्रसार-माध्यम हैं, वे समाज में सकारात्मक चेतना जाग्रत् करने के लिए उपयोगी और महत्त्वपूर्ण सिद्ध हुए हैं। यह अलग विषय है कि वे तन्त्र व्यावसायिक घरानों के चंगुल में फँसकर उनका संकेत-दास बन चुके हैं।”

ज्ञान से भरपूर यह विचार भाषाविज्ञानी, मीडियाध्ययन-विशेषज्ञ तथा समीक्षक आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने दीपपर्व पर देश के शीर्षस्थ निजी रेडियो-चैनल ‘रेडियो मिर्ची’ के कानपुर के नये कार्यालय- सभागार में आयोजित सारस्वत समारोह में मुख्य भूमिका-निर्वहण करते हुए व्यक्त किया था।

श्रव्य और दृश्य-माध्यम में मौखिक, लिखित तथा संकेत भाषाओं का कितना महत्त्व होता है, इस पर उन्होंने विस्तारपूर्वक बताते-समझाते हुए कई अशुद्ध शब्दों के कारण-सहित शुद्ध रूप बताये थे। उन्होंने जब ‘आरोपी’ और ‘आरोपित’, ‘गीत’ और ‘गाना’ शब्दों के प्रयोग को रेडियो और टी० ह्वी०-समाचारों और सम्बन्धित कार्यक्रमों के अन्तर्गत अशुद्ध शब्दप्रयोग बताये तब सभी आर० जे०, ‘स्क्रीप्ट राइटर आदिक चौंक गये थे। उन्होंने समझाने की शैली में कहा, “आप लोग कहते हैं– अब आपको एक ‘गाना’ सुनाते हैं’ तब वह आपका प्रयोग अशुद्ध हो जाता है, क्योंकि ‘गाना’ क्रिया-शब्द है, जबकि आपको संज्ञा-शब्द का व्यवहार करते हुए कहना होगा– ‘अब एक ‘गीत’ सुनाते हैं।’ उन्होंने बताया, ”जब कोई किसी पर आरोप मढ़ते हुए कहता है– इसने मेरे घर चोरी की है, तब जो आरोप मढ़ रहा होता है, वह ‘आरोपी’ कहलायेगा और जिस व्यक्ति पर आरोप मढ़ा जा रहा है, उसे ‘आरोपित’ कहा जायेगा। आप शुद्ध और उपयुक्त शब्दों का ही प्रयोग करें।” उन्होंने कहा, ‘मज़ा मिला’ शुद्ध है, न कि ‘मज़ा मिली’। उसी क्रम में उन्होंने ‘जन्मदिन-जन्मतिथि’, ‘रंग-विरंगा-रंग-बिरंगा’, ‘दही खट्टा-दही खट्टी’, ‘विज्ञानी-वैज्ञानिक’, ‘ग़ुस्सा आया-ग़ुस्सा आयी’, ‘मेरा क़लम-मेरी क़लम’, ‘मेरा तकिया-मेरी तकिया’, श्रृंगार-शृंगार, सन्यासी-संन्यासी व्यंजन और स्वर के शुद्ध उच्चारण का दीक्षण करते हुए, अन्य कई शब्दों की सार्थकता और निरर्थकता पर बहुविध प्रकाश डाला था, जिसे पूर्ण तन्मयता के साथ ‘रेडियो मिर्ची’-परिवार की समस्त सदस्य-सदस्याओं ने सुना था।
आरम्भ में, रेडियो मिर्ची-प्रमुख विक्रान्त के कुशल नेतृत्व में विधि-विधानपूर्वक दीप-प्रज्वलन किया गया था; ईश-स्तुति के साथ आरती-आयोजन किया गया था।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में रेडियोधर्मी सदस्य-सदस्याओं तथा अन्य जन की उपस्थिति थी, जिनमें रेडियो मिर्ची-प्रमुख विक्रान्त, आर० जे० चारु, आर० जे० मैण्डी, मयंक, कंजिका, कर्णिका, श्रेया, हर्षिता, आस्था आदिक सम्मिलित थीं।

इसी अवसर पर भारतीयता का पोषण करनेवाले सहभोज का आयोजन किया गया था, जो सह-अस्तित्व, सह और सम-अनुभूति की प्रतीति का संबोध करा रहा था। कुल मिलाकर, जीवन्तता से सम्पूर्ण आयोजन था।