मुंगेर की ज़िलाधिकारी को ‘अनुसंधान’ का अर्थ मालूम है?

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

मुंगेर (बिहार) में दुर्गाभक्तों को वहाँ के पुलिसकर्मियों ने बुरी तरह से मारा है; उन पर गोलियाँ चलायी हैं और आरोप यह भी है कि लगभग ६० लोग को कारागार में डालकर यातनाएँ दी जा रही हैं। इस विषय पर मुंगेर की ज़िलाधिकारी से प्रश्न किया गया तब वह लगातार बोलती रही– यह ‘अनुसंधान’ का विषय है, जबकि उसे कहना चाहिए था– यह ‘जाँच’/ ‘जाँच-पड़ताल’ का विषय है।

अब प्रश्न है– एक आइ० ए० एस०-अधिकारी को जब यही नहीं मालूम कि ‘अनुसंधान’ (Research) का प्रयोग कहाँ किया जाता है और ‘जाँच’ (Inquiry) का कहाँ तो वह आपराधिक कृत्यों की जाँच कराने के स्थान पर ‘अनुसन्धान’ कराने लगेगी तो अर्थ का ‘अनर्थ’ तो होगा ही।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ३० अक्तूबर, २०२० ईसवी।)