सीता का धर्म, प्रकृतिज्ञान, लोककल्याण और नारीशक्ति

July 13, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– दण्डकारण्य में प्रवेश करते-करते अनेक सप्ताह बीत चुके थे। अब वन ने इन तीनों यात्रियों को स्वीकार कर लिया था। जहाँ पहले पक्षी उड़ जाते थे, अब वे समीप बैठ जाते। […]

अनसूया और सीता : धर्म की अधिष्ठात्री का ज्ञानाभिषेक

July 10, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– चित्रकूट की वंदनीय भूमि से आगे बढ़ते हुए जब श्रीराम, लक्ष्मण और सीता महर्षि अत्रि के आश्रम पहुँचे, तब संध्या अपने सुनहरे चरण धीरे-धीरे वनभूमि पर रख रही थी। पश्चिम दिशा […]

सीता : ऋषियों के मध्य धर्म की अधिष्ठात्री

July 3, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– चित्रकूट में समय धीरे-धीरे बीत रहा था। अब वन के ऋषियों ने यह अनुभव करना प्रारम्भ कर दिया था कि श्रीराम के साथ केवल एक राजकुमार और एक राजकुलवधू नहीं आई […]

अयोध्या की पुत्रवधू “धर्म की जननी”

June 29, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव-– संध्या उतर रही थी। सूर्य धीरे-धीरे पश्चिम के पर्वतों के पीछे विलीन हो रहा था। आकाश में लालिमा थी, पर वह लालिमा भी जैसे विरह का रंग धारण कर चुकी थी। […]

सुमन्त्र को हुआ भूमिजा का बोध

June 26, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– सुमन्त्र मौन थे। उनके हाथों में रथ की लगाम थी, पर मन की लगाम छूट चुकी थी। उनके सामने बैठी जनकनन्दिनी अब केवल महारानी नहीं रह गई थीं। ऐसा प्रतीत होता […]

और मेरा सत्य राम हैं

June 21, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– सुमन्त्र मौन थे। वन की निस्तब्धता और भी गहन होती जा रही थी। वृक्षों की छाया मानो स्वयं इस संवाद को सुनने के लिए ठहर गई थी। मंद पवन बह रही […]

रामायण : स्थान सुख नहीं देता अपितु साथ सुख देता है

June 15, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– आर्य सुमन्त्र मौन थे। उनके पास शब्द थे, पर वे शब्द जैसे अपने अर्थ खो चुके थे। वे सीता के मुखमण्डल को देख रहे थे—वह मुख, जो राजमहलों की सुख-संपन्नता में […]

धर्म, सत्य और तर्क की महागाथा

June 9, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– अयोध्या नगरी उत्सवों से सजी रहती थी। महाराज दशरथ के राज्य में प्रजा सुखी थी। चारों राजकुमार राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न राज्य का प्राण थे। उनमें भी श्रीराम सबसे प्रिय […]

मेघनाद वध : रावण की निश्चित हार का प्रमाण

February 7, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– लंका अब केवल नगर नहीं थी—वह एक भय-शाला बन चुकी थी। रावण ने सभा में कहा—“अब मेरा पुत्र जाएगा।” इंद्रजीत। जिसने कभी पराजय नहीं देखी थी।जिसके अस्त्र देवताओं को भी चकित […]

सेतुसमुद्रम : धर्म पहले संवाद करता है और युद्ध बाद में

February 5, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– समुद्र सामने था—अथाह, गंभीर और चुनौतीपूर्ण। यह वही समुद्र थाजो रावण के अहंकार की सीमा बन चुका था। वानर सेना ठिठकी नहीं,पर प्रश्न था—“कैसे?” राम मौन थे। विभीषण ने सागर से […]

रामायण : रावण-निर्मित भय का उन्मूलन

February 1, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रावण को किसी ने देखा नहीं था—फिर भी सबने उसे देखा हुआ मान लिया था। किष्किंधा से दक्षिण की ओर बढ़ते वानर-दल के पाँव दृढ़ थे,पर मन अनिश्चित। वन बदलते जा […]

रामायण : सीता-हरण के पश्चात की कहानी

January 31, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वह वन निःशब्द था। पत्तों पर गिरती धूप तक जैसे ठिठक गई हो।धरती पर पड़ा वह वृद्ध गिद्ध—जटायु—अब उड़ नहीं सकता था, पर उसकी आँखों में अब भी आकाश शेष था। […]

सीता राम चरित अति पावन

June 19, 2023 0

उस समय हमारे पूरे मोहल्ले में एक ही टेलीविजन हुआ करता था– ब्लैक एंड ह्वॉइट, लकड़ी का शटर वाला । तब चैनल के नाम पर टीवी पर सिर्फ दूरदर्शन आता था। रामानंदकृत रामचरितमानस का प्रसारण […]

रामानंद सागर-कृत धारावाहिक “रामायण” कई अर्थो मे कालजयी है

October 5, 2022 0

अपने कालखंड में महर्षि वाल्मीकि ने “रामायण” और गोस्वामी तुलसीदास ने “रामचरितमानस” से जिस प्रकार जनमानस को शिक्षित और जाग्रत किया था, रामानंद सागर ने भी अपने धारावाहिक ‘रामायण” के माध्यम से हमारी पीढ़ी के […]

सीमित संसाधनो मे रामानंद जी ऐसा क्या जादू कर गए जो पुनः कोई दोहरा नहीं पाया

October 4, 2022 0

श्रद्धेय रामानंद सागर कृत रामायण को असाधारण लोकप्रियता देखकर यह सोचता हूँ कि आखिर उनकी रामायण में ऐसा क्या है जो लोग को बरबस ही अपनी ओर खींच लेता है? 80 के दशक के उत्तरार्ध […]

हिन्ददेश परिवार की मध्यप्रदेश इकाई द्वारा रामायण पर आधारित कार्यक्रम का 5 मई को होगा श्रीगणेश

May 2, 2022 0

तिनसुकिया:- हिन्ददेश परिवार की मध्यप्रदेश इकाई द्वारा आयोजित रामायण पर विशेष कार्यक्रम के आयोजन का श्री गणेश 5 मई 2022 से किया जाएगा। कार्यक्रम के बारे में हिन्ददेश परिवार की संस्थापिका व अंतराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. […]