प्रभात सिंह (मान्यता प्राप्त पत्रकार)-
रज्जन, शफीक, मुजीब, हिना नाम से क्या होता है ?….कार्टून नेटवर्क, प्ले स्कूल, तमीज, एटिकेट्स, इंग्लिश विंग्लिश से दूर गाँव में स्किल्स देखने की किसे फुरसत है। कुछ नन्हे बच्चे घर से चूल्हा फूंकने वाली फुँकनी लेकर बाहर के कच्चे चबूतरे पर पानी की बोरिंग करने लगते हैं। पानी के सहारे मिटटी को नम करना, उसमें धीरे लोहे के पाइप को घुमा घुमा के दाब के साथ मिट्टी में भेदते चले जाना। तीन बच्चों में बेहतरीन सामंजस्य, और तकनीक के बेहतर प्रयोग दंग कर देती है। बच्चों से पूछा गया कि कितने फिट की बोरिंग कर रहे हो.. एक बच्चा बेहद संजीदगी से कहता है.. डेढ़ सौ फिट पर…कुछ और पूछने पर पता चला उनमें से किसी बच्चे के पिता प्लम्बिंग का काम नहीं करते थे। चुनाव का दौर है, चुनावी वादों में रोजगार देनें का दम्भ और स्किल्स इंडिया का सपना दिखाना रैलियों में खूब उछाले जा रहे हैं। पर स्किल्स देखने परखने कौन जायेगा गाँव गाँव ?