नूँह काण्ड की पारदर्शितापूर्ण जाँच करायी जाये

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

नूँह (हरियाणा) मे मणिपुर के बाद सर्वाधिक भयावह हिंसा और विध्वंसक-काण्ड किया गया था। सामूहिक हत्या, महिलाओं के साथ शारीरिक दुष्कर्म, अग्निकाण्ड, तोड़-फोड़, चोरी-डक़ैती आदिक किये जाने से पहले सबसे पहले उन दरिन्दे हिन्दुओं और मुसलमानो की दुर्गति करनी होगी, जिन्होंने उच्चतम न्यायालय के आदेश की अवमानना करते हुए, भड़काऊ वीडियो जारी किये थे। इस विषय मे सम्बन्धित पुलिस-विभाग को बिना किसी राजनैतिक दबाव के काम करने दिया जाये, तभी सच्चाई सामने आयेगी; क्योंकि अभी तक देखा गया है कि सत्ताधारी नेता ही ऐसे बीभत्स (‘वीभत्स’ अशुद्ध शब्द है) और घृणित कृत्य के लिए उत्तरदायी रहे हैं; क्योंकि देश की क़ीमत पर ऐसे लोग ‘सत्ता’ चाहते हैं। यदि उक्त प्रकरण वा यों कहें, ‘नरसंहार’ मे सत्ताधारी और प्रतिपक्षी दल का कोई नेता किसी भी रूप मे सम्मिलित रहा हो तो बिना किसी पक्षधरता के कठोरतम काररवाई की जानी चाहिए। इतना ही नहीं, उन गुप्तचर-एजेंसियों और सुरक्षातन्त्र के अधिकारियों को भी कठघरे मे लाना होगा, जो न तो पूर्व-सूचना दे रही हैं और न ही अपने सुरक्षाधर्म का निर्वहण (‘निर्वाहन’ और ‘निर्वहन’ अशुद्ध हैं।) कर पा रहे हैं।

हिन्दुओं और मुसलमानो के उन सभी संघटनो को प्रतिबन्धित करते हुए, उनके विरुद्ध कठोर काररवाई करनी होगी, जो अनावश्यक रूप से जनजीवन की गतिविधियों मे हस्तक्षेप करते आ रहे हैं। आश्चर्य है! राज्य-केन्द्र-सरकारें ज़बान पर ताला लटकाये हुए हैं।

(सर्वाधिकार सुरक्षित― आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ४ अगस्त, २०२३ ईसवी।)