हम विदेशी विद्वज्जन की हिन्दी-सेवा के प्रति नमित हैं


★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

कल १० जनवरी की तिथि रहेगी और कल ही की तिथि मे वर्ष १९७५ मे ‘प्रथम विश्व हिन्दीभाषा सम्मेलन’ का आयोजन नागपुर (महाराष्ट्र) मे किया गया था। इसी उपलक्ष्य मे प्रतिवर्ष १० जनवरी को देश-देशान्तर मे ‘विश्व हिन्दीभाषा-दिवस’ का आयोजन किया जाता है।

अपनी हिन्दी-सेवा के लिए विश्रुत ‘दैनिक जागरण’, ‘नव दुनिया’ तथा ‘नई दुनिया’ समाचारपत्र-प्रतिष्ठान दशकों से हिन्दी-विकास करते आ रहे हैं। यही कारण है कि वे हिन्दी-विस्तार के लिए पहले से भी अधिक मति-गति-रति के साथ तत्पर हैं। वस्तुत: यही हिन्दी के प्रति अनुराग है। हम ऐसे समाचारपत्र-प्रतिष्ठान की दीर्घायु की कामना करते हुए, इस सामूहिक परिवार की सदाशयता के प्रति अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करते हैं।

कल १० जनवरी के अवसर पर उपर्युक्त तीनो समाचारपत्रों मे एक ऐसा विस्तृत और शोधात्मक लेख प्रकाशित होगा, जिसे पढ़-समझकर हमारा पाठकवर्ग यह अनुभव करने के लिए बाध्य हो जायेगा कि जिन दिनो भारत परतन्त्रता की अर्गला से जकड़ा हुआ था उन दिनो विदेशी विद्वज्जन ने हमारी हिन्दी को किस प्रकार और किस स्तर की ऊँचाई पर प्रतिष्ठापित कर, उसकी भालबिन्दी को कान्तिमान् किया था; तब हिन्दी को सीखने के लिए भारतीयों से कहीं अधिक वैदेशिक प्रबुद्धवर्ग कितना लालायित था; हिन्दी का सांगोपांग विस्तार किस दूरदर्शिता का द्योतक था आदिक।

हमारे भीतर यदि ‘भारतीयता’ है तो हमे अपनी मातृभाषा, राजभाषा तथा सम्पर्कभाषा ‘हिन्दी’ का शुचितापूर्ण संवर्द्धन करना होगा; क्योंकि हिन्दी हमारी धड़कन है।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ९ जनवरी, २०२२ ईसवी।)