रामायण : सीता-हरण के पश्चात की कहानी
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वह वन निःशब्द था। पत्तों पर गिरती धूप तक जैसे ठिठक गई हो।धरती पर पड़ा वह वृद्ध गिद्ध—जटायु—अब उड़ नहीं सकता था, पर उसकी आँखों में अब भी आकाश शेष था। […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वह वन निःशब्द था। पत्तों पर गिरती धूप तक जैसे ठिठक गई हो।धरती पर पड़ा वह वृद्ध गिद्ध—जटायु—अब उड़ नहीं सकता था, पर उसकी आँखों में अब भी आकाश शेष था। […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– गिरना भी भाँति-भाँति का होता है।चलते-चलते गिर जानाकिसी से टकराकर गिर जाना।नैतिकता के आँचल से गिर जाना।और तो और अपनो की नजरों से गिर जाना।लेकिन सबसे निकृष्ट हैअपनी नजरों मे गिर […]
न्यूयॉर्क। भारत ने मध्य-पूर्व के अस्थिर देशों में संघर्ष समाप्त करके शांति स्थापित करने की वकालत की है। भारत ने कहा है कि लगातार बातचीत और डिप्लोमेसी से ऐसे टिकाऊ हल निकलेंगे, जिनका लोगों की […]
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि वर्तमान में वैश्विक अस्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था के संकट में होने के बावजूद भारत अपनी संतुलित विदेश नीति और दूरगामी सोच के बलबूते तेजी से विकास […]
Dr. Raghavendra Kumar Raghav– In India, the moment the subject of equality arises, public debate often slips from reason into emotion, and then into outright accusations. This is especially evident whenever equality-based provisions introduced by […]
‘गणतन्त्र-दिवस’ के अवसर पर विशेष प्रस्तुति प्रयागराज। ‘सर्जनपीठ’, प्रयागराज की ओर से भारतीय गणतन्त्र-दिवस की पूर्व-संध्या मे एक राष्ट्रीय बौद्धिक परिसंवाद का आयोजन किया गया, जिसमे देश के प्रतिष्ठित न्यायाधीश, अधिवक्ता एवं अन्य प्रबुद्धजन की […]
एस०बी० सेंगर– हरदोई। जिले की विधानसभा बालामऊ में भाजपा के कछौना मंडल के एक बूथ अध्यक्ष ने एक व्यक्ति पर गोली मारने की धमकी सहित कई गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित ने हरदोई के प्रभारी […]
प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मौनी अमावस्या स्नान के दिन की घटनाओं को लेकर मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– नीतिवान मनुष्यों की चाहे कोई बुराई करे या उसकी प्रशंसा करे, वह निर्धन हो जाए या वह धनवान हो, उसका स्वभाव सदैव नम्र होता है। वह अपने सिद्धांतों पर अडिग रहता […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– सबसे पहले ब्राह्मण को पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता है। यह कथन किसी वर्गविशेष के अपमान या सामाजिक विद्वेष से प्रेरित नहीं, अपितु धर्म-संरक्षण और सामाजिक सुचिता की गम्भीर चेतावनी है। जिस प्रकार […]
ब्रिस्बेन। ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन में प्रथम ‘प्रशांत क्षेत्रीय हिंदी सम्मेलन’ का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ न्यूजीलैंड, फिजी एवं प्रशांत द्वीप राष्ट्रों से हिंदी के विद्वानों, शिक्षाविदों और साहित्य […]
Dr. Raghavendra Kumar Raghav— The human body is composed of the five great elements—earth, water, air, fire, and ether. In the Indian philosophical tradition, these five are not merely components of the body; they are […]
भारत ने यूएन को चेताया- पाकिस्तान चला रहा ‘बांटने वाला एजेंडा’ न्यूयॉर्क। भारत ने पाकिस्तान पर संयुक्त राष्ट्र के मंच का गलत इस्तेमाल करके अपना ‘बांटने वाला एजेंडा’ चलाने का आरोप लगाया है। पाकिस्तानी राजनयिक […]
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. जे. पी. पांडेय के नेतृत्व में विश्वविद्यालय के कलाम इनक्यूबेशन सेंटर, ए.के.टी.यू. लखनऊ में राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस–2026 के अवसर पर स्टार्टअप कैपेसिटी डेवलपमेंट कार्यक्रम “मार्केट […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रकृति हँसे सबसे कहे, छठा तत्त्व पहचान।नाम प्रेम है उसका, जो दे सबको प्राण॥ठोस तरल ये कुछ नहीं, न दृष्टि न स्पर्श।फिर भी सबमें व्याप्त है, बन जीवन का हर्ष॥प्रेम बिना […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– मानव शरीर पंचतत्त्व से निर्मित है। ये पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश के रूप मे जाने जाते हैं। भारतीय दार्शनिक परम्परा में ये पाँचों तत्त्व केवल शरीर के घटक नहीं […]
विज्ञान भारती, एन.सी.ई.आर.टी.व एन.सी.एस.एम.के तत्त्वावधान में विद्यार्थी विज्ञान मंथन के राज्य स्तरीय शिविर का आयोजन आज जी0डी0 गोयनका पब्लिक स्कूल लखनऊ में राज्य समन्वयक प्रदीप नारायण मिश्र के समन्वयन में किया गया। इस परीक्षा में […]
जो रहना चाहता है दूररहने दे।वो जो करना चाहता हैकरने दे।जो तेरा नहींतेरे पास क्या करेगा?उसे उसके हाल पररहने दे।जिन्दा रखतू अपनी खुद्दारी।जो हो रहा हैउसे होने दे।किरदारों का क्या बंदेआज कुछ और कुछ कल?हँसकर […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••एक–ठिठुरन ठिठकी ठण्ढ मे, टूट देह की जोड़।माघ-पूस की शीत मे, धरती पड़े न गोड़१।।दो–हवा हवाई हाल है, ख़तरे मे मुसकान।जीव-जगत् जड़ जोड़ता, जाड़े से हलकान।।तीन–जड़-चेतन हैँ काँपते, माँग रहे हैँ […]
हम मलिन यों कर चुके हैं संस्कारों को तुम्हारे ;औ’ धरे ही रह गये हैं शिष्टता के सूत्र सारे। हो निरापद घूमते हम कृत्रिम यह ब्रह्माण्ड साराऔर बताते हैं स्वयं को भाग्य का मारा अभागा।क्लिष्ट […]
डॉ० कल्पना वर्मा
भारतेन्दु के साहित्य मे समयसत्य चिन्तन मुखरित होता है••••••••••••••••••••••••••••••••••• प्रयागराज। ‘सर्जनपीठ’, प्रयागराज के तत्त्वावधान मे आधुनिक हिन्दी-साहित्य के पितामह भारतेन्दु हरिश्चन्द की पुण्यतिथि की पूर्व-संध्या मे ‘भारतेन्दु हरिश्चन्द के साहित्य मे सामाजिक व्यवस्था के अत्याचार […]
नेपीडॉ। म्यांमार की राजधानी नेपीडॉ की येजिन टाउनशिप में भारत द्वारा समर्थित कृषि क्षेत्र से जुड़े दो क्विक इम्पैक्ट प्रोजेक्ट्स (क्यूआईपी) का उद्घाटन किया गया। भारत की वित्तीय सहायता से पूर्ण इन परियोजनाओं से स्थानीय […]
शाश्वत तिवारी– देश के भीतर हो रही शिक्षा, प्रतिष्ठा और आतंक की खतरनाक जुगलबंदी पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह द्वारा ‘वाइट-कॉलर आतंकवाद’ को लेकर व्यक्त की गई चिंता केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि भारत की […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– जैव जगत्, प्राणी समूह एवं सकल दृश्य अदृश्य सत्ता के रूप में वह सर्वोच्च सत्ता ही सर्वत्र अभिव्यक्त है। ईश सृजित इस सृष्टि में प्रत्येक प्राणी आदरणीय है और पारिस्थितिक तंत्र […]
Dr. Raghavendra Kumar Raghav The Bhagavad Gita’s sacred song,Invites us to a devotion strong.In this world of boundaries, wide and deep,Bhakti’s power, our souls it seeks to sweep. Vedanta’s wisdom, ancient and grand,Transcends the limits […]