अवधेश कुमार शुक्ला (प्र.अ. जू.हा. कामीपुर , हरदोई) –
आज जब प्राइवेट स्कूलों के बच्चे पढ़ने जा रहे थे तब मुझे अपने विद्यालय के बच्चों को ‘आज छुट्टी है’ कह कर वापस करना पड़ा । ‘अनमने भाव’ से बच्चों ने कहा कि “कल ही बता देते…….मुझे कहना पड़ा कि मुझे भी कोई जानकारी नहीं थी । बच्चों ने कहा- सर हम लोग आ गये हैं, छुट्टी न करें । हम लोग बिना M.D.M. के ही पढ़ लेंगे । मुझे दुःखी मन से कहना पड़ा- यदि मैं विद्यालय खोलूँ तो पत्रकार लोग बवाल करेंगे, और हमें अधिकारियों का दंश….। महाअफसोस सरकारी शिक्षक-नेतागण ‘शिक्षा उन्नयन’ की बैठकें आयोजित कर खूब प्रचारित करवाते हैं । ‘सरकारी विद्यालयों में छुट्टी करवा कर’ छुटभैये नेताओं से जय-जय कार लूटते हैं । समझ में नही आता है कि मृत हो चुके राजनेताओं के नाम पर विद्यालयों में छुट्टी करवा कर समाज और देश का किस प्रकार से हित है ? इस जनवरी महीने में मुश्किल से 10 शैक्षिक दिवस हो पायेंगे । बिना शिक्षण कार्य के ‘शिक्षक डायरी’ का पेट भरकर गुणवत्ता बढ़ जायेगी क्या ? स्वयंभू शिक्षक नेता विद्यालयों में छुट्टियाँ कम से कम करने का भी तो प्रयास कर सकते हैं ।…