अंजाम मोहब्बत का

जो रहना चाहता है दूर
रहने दे।
वो जो करना चाहता है
करने दे।
जो तेरा नहीं
तेरे पास क्या करेगा?
उसे उसके हाल पर
रहने दे।
जिन्दा रख
तू अपनी खुद्दारी।
जो हो रहा है
उसे होने दे।
किरदारों का क्या बंदे
आज कुछ और कुछ कल?
हँसकर जी ले जिन्दगी साथी!
ये पल न मिलेंगे कल।
हाँ ये अलग बात है
प्रेम-गली मेरे लिए नयी है।
गुजरने दो चंद लम्हे और
मन मे रुचि जगने लगी है।
अब चढ़ने लगा है रंग
मोहब्बत का मुझ पर।
दीदार-ए-सनम के बाद
तेरी सूरत मे नजर अटकी है।
अब मुझे तंग कर रहा है
अहसास मोहब्बत का।
कहीं जान न ये ले-ले
ये सफर मोहब्बत का।
आग़ाज़ ही अब मेरा
अंजाम बन गया है।
यूँ ही नहीं नाम बदनाम हुआ
इस बेपरवाह मोहब्बत का?
मुझे तंग कर रहा है
अहसास मोहब्बत का।
कहीं जान न ले-ले
ये सफर मोहब्बत का।
इश्क़-ए-दरिया मे
राघव की कश्ती है।
अब जान गया हूँ मै।
अंजाम मोहब्बत का।