शिवत्व की यात्रा : प्रेम की अग्निपरीक्षा
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– संध्या का समय था। आकाश में सूर्य धीरे-धीरे अस्त हो रहा था, और उसकी किरणें आकाश को लालिमा से भर रही थीं—मानो प्रकृति स्वयं किसी गहन भाव से रंग गई हो। […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– संध्या का समय था। आकाश में सूर्य धीरे-धीरे अस्त हो रहा था, और उसकी किरणें आकाश को लालिमा से भर रही थीं—मानो प्रकृति स्वयं किसी गहन भाव से रंग गई हो। […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रात गहरी हो चुकी थी। हवेली के चारों ओर फैली शांति में केवल कभी-कभी पत्तों की सरसराहट सुनाई देती थी। दूर खेतों में जलती हुई मशालों की लौ हवा के साथ […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– जमींदार के कक्ष में कुछ क्षण के लिए ऐसा मौन छा गया मानो समय स्वयं रुक गया हो। सुधांशु के शब्द हवा में स्थिर हो गए थे— “यदि आवश्यक हुआ तो […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– भोर का पहला प्रकाश अभी क्षितिज पर उभर ही रहा था। हल्की धुंध खेतों के ऊपर तैर रही थी और दूर कहीं बैलों की घंटियों की धीमी आवाज सुनाई दे रही […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रात का सन्नाटा गहरा था। आकाश में बादल छाये हुए थे और चन्द्रमा कभी-कभी उनके बीच से झाँक जाता था। सुधांशु के घर के आँगन में दीपक की लौ हल्की-हल्की काँप […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रात धीरे-धीरे गहरी हो चुकी थी। आकाश में चन्द्रमा बादलों के पीछे छिपता-उभरता जा रहा था। सुधांशु के घर के आँगन में एक दीपक जल रहा था जिसकी लौ हवा के […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव-– रात का अंतिम प्रहर था। आकाश में चन्द्रमा अपनी शीतलता बिखेर रहा था। आश्रम के पीछे बहने वाली छोटी-सी धारा से जल की मधुर ध्वनि सुनाई दे रही थी। वृक्षों के […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वसंत का प्रारम्भ हो चुका था। आम के वृक्षों पर कोमल बौर आ गया था और हवा में एक मदमस्त सुगन्ध फैलने लगी थी। जीवन में जैसे एक हल्का-सा उल्लास लौट […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शूद्र गँवार ढोल पशु नारीये ताड़न की अधिकारी है।जाति-पाँति से हीन रहीयुग-युग से वह बेचारी है।बुद्धिमान होकर भी नारीजाहिल समझी जाती है।गैरों का पाप लिए सिर परवह दर-दर ठोकर खाती है।जीवन […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शीत ऋतु का प्रारम्भ था। प्रातःकाल की धूप अभी कोमल थी और हवा में हल्की ठंडक थी। निरंजन अपने घर के बाहर बैठा था। सामने आँगन में तुलसी के चौरे पर […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वर्षा का समय समाप्त हो चुका था। आकाश स्वच्छ था और हवा में हल्की शीतलता घुलने लगी थी। संध्या का समय था। निरंजन घर के आँगन में बैठा था। सामने तुलसी […]
Dr. Raghavendra Kumar Raghav– When the limits of my sorrow, Are finally crossed, I’ll find no strength to borrow, In silence, I’ll be lost. Like a stone, I will harden, While you try to appease, […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शरद की एक गहरी रात्रि थी। आकाश में बादल छाए हुए थे और हवा में एक विचित्र नमी थी। घर के बाहर पीपल के पत्तों की हल्की सरसराहट सुनाई दे रही […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– गिरना भी भाँति-भाँति का होता है।चलते-चलते गिर जानाकिसी से टकराकर गिर जाना।नैतिकता के आँचल से गिर जाना।और तो और अपनो की नजरों से गिर जाना।लेकिन सबसे निकृष्ट हैअपनी नजरों मे गिर […]
जो रहना चाहता है दूररहने दे।वो जो करना चाहता हैकरने दे।जो तेरा नहींतेरे पास क्या करेगा?उसे उसके हाल पररहने दे।जिन्दा रखतू अपनी खुद्दारी।जो हो रहा हैउसे होने दे।किरदारों का क्या बंदेआज कुछ और कुछ कल?हँसकर […]
Dr. Raghavendra Kumar Raghav– Let them praise, or let them blame,The virtuous soul remains the same.Whether poor or crowned with gold,His heart is humble, kind and bold. Once he chooses a righteous way,No fear can […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’— कभी मत सोचनाकिसी लड़के या आदमी कोचाहा है।हमेशा याद रखनाये अपना दूसरा जिस्मपाया है।जो होना था हुआ जाने दोनये दिनो की आहट को सुनोऔर उन्हें आने दो।प्यार हो या दोस्तीजब […]
Dr. Raghavendra Kumar Tripathi Raghav– Time is great, so always wait.Fortune comes some time late.When darkness falls you alone,Loved ones leave you to atone.When your shadow left you.When your dears kicked you.Don’t feel bad think […]