कहानी ढोंगी बाबा का पार्ट 4 : रूहानी फकीर बाबा
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रघुवीर ने काँपते हुए जमील की ओर देखा। “इसका मतलब?” जमील ने मजार की तरफ देखा। “मतलब यह कि शरीफ फकीर कभी था ही नहीं।” उसी समय गाँव के दूसरी तरफ […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रघुवीर ने काँपते हुए जमील की ओर देखा। “इसका मतलब?” जमील ने मजार की तरफ देखा। “मतलब यह कि शरीफ फकीर कभी था ही नहीं।” उसी समय गाँव के दूसरी तरफ […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शरीफ ने मजार के पीछे की टूटी-फूटी कोठरी को अपना ठिकाना बना लिया था। दिन में वह वहाँ कम ही रहता। शाम ढलते ही उसका असली समय शुरू होता। लोग आते। […]
● आयोजक– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मानवमात्र के प्रति अपना कर्त्तव्य-निर्वहण करना ही स्वतन्त्रता है डॉ० विवेकमणि त्रिपाठी(एसोशिएट प्रोफ़ेसर– हिन्दी, क्वान्ग्तोंग विदेशी भाषा विश्वविद्यालय, चीन) “स्वतन्त्रता मे व्यक्तित्व-विकास की अपार सम्भावनाएँ हैं”● डॉ० नीलम जैन(विज़िटिंग […]
Dr. Raghavendra Kumar Raghav– Grammar is the foundation of every language. It helps us speak correctly, write clearly, and express our thoughts with confidence. Yet many students find grammar difficult because they are asked to […]
Dr. Raghavendra Kumar Raghav Beyond the dawn of thought He stands, Beyond where time or silence lands; No birth proclaims, no end defines, The Source from which all being shines. His grace dissolves illusion’s veil, […]
Dr. Raghavendra Kumar Raghav– Many languages, many song,One country where all belong.Different cultures, different ways,Together we sparks India’s days.Respect and love make us strong,Helping every heart belong.Hand in hand we’ll always grow,Sharing kindness everywhere we […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– भारतीय दर्शन का मूल आधार यह है कि परम सत्य सीमित नहीं है। उसे न केवल किसी एक नाम, रूप, स्थान या उपासना-पद्धति में बाँधा जा सकता है और न ही […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– दण्डकारण्य में प्रवेश करते-करते अनेक सप्ताह बीत चुके थे। अब वन ने इन तीनों यात्रियों को स्वीकार कर लिया था। जहाँ पहले पक्षी उड़ जाते थे, अब वे समीप बैठ जाते। […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– चित्रकूट पीछे छूट चुका था। अब वन का स्वरूप बदल रहा था। यहाँ वृक्ष अधिक विशाल थे। उनकी जटाएँ मानो धरती को आलिंगन करती थीं। लताएँ शताब्दियों पुराने वृक्षों से इस […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– राहेइश्क़ मे पाने से ज़्यादा लोग खोते हैं।इस रिवाजेइश्क का मारा हुआ हूँ मै।राह-ए-इश्क़ चलकर ख़ुद को जला दिया।चौसर-ए-इश्क़ की बाजी हारा हुआ हूँ मै।इश्क़ के सितम की इन्तहा देखने निकला […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव— रात का तीसरा प्रहर था। चारों ओर गहरा सन्नाटा छाया हुआ था। हवेली के भीतर सब सो चुके थे, किन्तु सुधांशु की आँखों में नींद का नामोनिशान नहीं था। उसके भीतर […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– भोर का पहला प्रकाश अभी क्षितिज पर उभर ही रहा था। हल्की धुंध खेतों के ऊपर तैर रही थी और दूर कहीं बैलों की घंटियों की धीमी आवाज सुनाई दे रही […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रात का सन्नाटा गहरा था। आकाश में बादल छाये हुए थे और चन्द्रमा कभी-कभी उनके बीच से झाँक जाता था। सुधांशु के घर के आँगन में दीपक की लौ हल्की-हल्की काँप […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रात धीरे-धीरे गहरी हो चुकी थी। आकाश में चन्द्रमा बादलों के पीछे छिपता-उभरता जा रहा था। सुधांशु के घर के आँगन में एक दीपक जल रहा था जिसकी लौ हवा के […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव-– रात का अंतिम प्रहर था। आकाश में चन्द्रमा अपनी शीतलता बिखेर रहा था। आश्रम के पीछे बहने वाली छोटी-सी धारा से जल की मधुर ध्वनि सुनाई दे रही थी। वृक्षों के […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शीत ऋतु का प्रारम्भ था। प्रातःकाल की धूप अभी कोमल थी और हवा में हल्की ठंडक थी। निरंजन अपने घर के बाहर बैठा था। सामने आँगन में तुलसी के चौरे पर […]
Dr. Raghavendra Kumar Raghav– When the limits of my sorrow, Are finally crossed, I’ll find no strength to borrow, In silence, I’ll be lost. Like a stone, I will harden, While you try to appease, […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शरद पूर्णिमा की रात्रि थी। चन्द्रमा का प्रकाश आश्रम की शिला-दीवारों पर शान्त चाँदी-सा बिछा हुआ था। हवा में न शीत का तीखापन था, न वर्षा की नमी—केवल एक निर्मल संतुलन। […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वर्षा ऋतु का अन्तिम चरण था। आकाश स्वच्छ था, परन्तु वायु में अभी भी जल की शीतलता थी। आश्रम के उत्तर दिशा में एक प्राचीन कक्ष था, जिसे नाद-मण्डप कहा जाता […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– गिरना भी भाँति-भाँति का होता है।चलते-चलते गिर जानाकिसी से टकराकर गिर जाना।नैतिकता के आँचल से गिर जाना।और तो और अपनो की नजरों से गिर जाना।लेकिन सबसे निकृष्ट हैअपनी नजरों मे गिर […]
जो रहना चाहता है दूररहने दे।वो जो करना चाहता हैकरने दे।जो तेरा नहींतेरे पास क्या करेगा?उसे उसके हाल पररहने दे।जिन्दा रखतू अपनी खुद्दारी।जो हो रहा हैउसे होने दे।किरदारों का क्या बंदेआज कुछ और कुछ कल?हँसकर […]
राघवेन्द्र कुमार ‘राघव’– मेरी जिन्दगी की यारों शाम भी अब ढल गयी।क्या से क्या हो गया और किस्मत बदल गयी।स्वप्न मेरे उससे टूटे जो सुबह थी और शाम थी।हाय किस्मत देखिए मुझे गुनहगार बना दिया।मेरे […]
Motivator : Dr. Raghavendra Kumar Raghav– In the heart of the earth, cradled within nutrient-rich soil, a minuscule seed holds the promise of burgeoning into a majestic tree. Just as this seed requires optimal conditions […]
Dr. Raghavendra Kumar Tripathi Raghav– Time is great, so always wait.Fortune comes some time late.When darkness falls you alone,Loved ones leave you to atone.When your shadow left you.When your dears kicked you.Don’t feel bad think […]