प्रयागराज। ‘हिन्दी-संसार’ की ओर से २१ जून को आयोजित हिन्दी-अध्यापन-परीक्षा के लिए एक उपयोगी कर्मशाला का आयोजन किया गया, जिसमे प्रयागराज और बाहर के विषय-विशेषज्ञोँ ने विद्यार्थियोँ का सम्यक् मार्गदर्शन किया। विद्यार्थियोँ को साहित्य की दोनो विधाओँ :– पद्य और गद्य से सम्बन्धित परीक्षोपयोगी प्रश्न किये गये थे।
उल्लेखनीय है कि व्याकरणवेत्ता एवं भाषाविज्ञानी आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की अध्यक्षता मे आयोजित मौखिक परीक्षा की पंचदिवसीय कर्मशाला मे साहित्य-मर्मज्ञ प्रो० मुश्ताक अली ने संत-काव्य, सूफी काव्य, राम-कृष्णकाव्य से सम्बन्धित कई प्रश्न किये थे और विद्यार्थियोँ की कठिनाई को समझते हुए, उनके समुचित उत्तर भी दिये थे। उन्होँने काव्य-गुणावगुण को अच्छी तरह से समझाया।
आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने भाषाविज्ञान के परीक्षोपयोगी पक्षोँ पर प्रकाश डालते हुए, व्याकरण और भाषाविज्ञान मे सोदाहरण अन्तर सुस्पष्ट करते हुए विद्यार्थियोँ का मार्गदर्शन किया। उन्होँने संधि, समास, वर्तनी, वाक्य, श्रुति समभिन्नार्थक शब्दोँ को समझाया। संस्कृत-साहित्य के अन्तर्गत विद्यार्थियोँ को अनुवाद-कर्म किया था। उन्होँने भाषा-विभाषा, बोली, उपभाषा, काव्यांग (रस, छन्द, अलंकार) आदिक को समझाया।
साहित्य-मर्मज्ञ प्रो० बलराज पाण्डेय ने कविता को समझाया। साहित्य-मर्मज्ञा प्रो० शशिकला त्रिपाठी ने प्रगतिवाद पर प्रश्न किये थे। अशोक स्वामी ने संयोजन किया था।