दिल्ली विधानसभा से लाभ के पद के मामले में आम आदमी पार्टी के बीस विधायकों की सदस्यता खत्म कर दी गई है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस बारे में निर्वाचन आयोग की सिफारिश को मंजूरी दे दी है। संसदीय सचिव के पद पर रहने के बावजूद उसके विधायकों ने किसी तरह का कोई वेतन या भत्ता नहीं लिया था ऐसा आम आदमी पार्टी का कहना है ।
निर्वाचन आयोग का कहना है कि वेतन भत्ते नहीं लेने के बावजूद इन विधायकों ने सरकार में कार्यपालिका के कामकाज में हिस्सा लिया जो कि सांसद जया बच्चन के मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले के अनुरूप लाभ के पद पर काम करने जैसा है। आयोग ने यह भी कहा कि विधायकों की सदस्यता रद्द करने की उसकी सिफारिश राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली अधिनियम और संविधान के अनुरूप है। आम आदमी पार्टी ने निर्वाचन आयोग की सिफारिशों के खिलाफ रोक के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील की है। इस मामले पर सुनवाई सोमवार को होगी। बीस विधायकों की सदस्यता खत्म होने के बावजूद अरविंद केजरीवाल सरकार को कोई खतरा नहीं है। वह छियालीस विधायकों के साथ अभी भी बहुमत में हैं।
इस मसले की शुरूआत 13 मार्च 2015 को उस समय हुई जब अरविन्द केजरीवाल सरकार ने 21 विधायकों को संसदीय सचिव नियुक्त करने का आदेश पारित किया। राज्य सरकार के इस आदेश को चुनौती देते हुए एडवोकेट प्रशांत पटेल ने 19 जून 2015 को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को एक याचिका भेजी। जिसमें मांग की गई थी कि लाभ का पद धारण करने के कारण इन विधायकों को अयोग्य घोषित किया जाये। दिल्ली सरकार ने मामले की गंभीरता को समझते हुए विधायकों के बचाव में दिल्ली विधानसभा में एक विधेयक पारित किया था जिसे राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिल पायी। अयोग्य घोषित किए गए विधायकों में कैलाश गहलौत भी शामिल हैं जो दिल्ली सरकार में मंत्री हैं। अगर उन्हें अयोग्यता के कारण इस्तीफा देना पड़ा तो वे अरविन्द केजरीवाल केबिनेट के ऐसे चौथे मंत्री होंगें जिन्हें किसी न किसी मामले में लिप्त होने के कारण पद छोड़ना पड़ेगा।
इस बीच, आम आदमी पार्टी नेता और दिल्ली के मंत्री गोपाल राय ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो उच्चतम न्यायाल में भी अपील की जाएगी। भारतीय जनता पार्टी की नेता मीनाक्षी लेखी ने कहा है कि आम आदमी पार्टी के बीस विधायकों को निर्वाचन आयोग द्वारा अयोग्य ठहराए जाने के मामले से उनकी पार्टी का कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने इस बारे में आम आदमी पार्टी के इस आरोप को निराधार बताया कि निर्वाचन आयोग भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है। श्रीमती लेखी ने कहा कि आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और जो लोग लोकतंत्र और संविधान में विश्वास नहीं रखते वही इस तरह के आरोप लगाते हैं। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का इस्तीफा मांगा है। कांग्रेस की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष अजय माकन ने कहा है कि श्री केजरीवाल पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार खो चुके हैं। उन्होंने आप विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने में हुई देरी पर चिंता व्यक्त की और कहा कि यह भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी की मिलीभगत है।