
(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
‘आरक्षण’ के नाम पर जिस प्रकार से ‘भारतीय जनता पार्टी’ शासित राज्यों में मनबढ़ होकर मुख्य मन्त्री और केन्द्र-शासन में प्रधान मन्त्री अपनी निरंकुशता का परिचय दे रहे हैं, वे देश के स्वास्थ्य के लिए अति घातक है।
शिक्षित-सुशिक्षित युवावर्ग यदि एक स्वर में अपना सक्रिय विरोध-प्रदर्शन करने में असफल रहा तो वर्ष २०१९ में पुन: सत्तासीन होने का स्वप्न देखनेवाले तथाकथित चेहरे यदि पुन: सत्ता में आ गये तो निश्चित समझिए, देश के होनहारों के हाथों में ‘कटोरा’ थमाने से भी नहीं चूकेंगे; क्योंकि वर्तमान में, जो सत्ता की राजनीति कर रहे हैं, वे देशवासियों को आरक्षण के नाम पर अलग-थलग करने की रणनीति बना रहे हैं।
भारतीय समाज को बाँटनेवाली सत्तापक्ष की इस आरक्षण की राजनीति के समक्ष देश के सभी राजनीतिक दलों के नेता घुटने टेके हुए हैं। अत: अब सभी राजनीतिक दलों को ठेंगे पर रखते हुए, युवावर्ग को ‘आरक्षण हटाओ-योग्यता बचाओ’ के आधार पर अपना नेतृत्व विकसित करना होगा, ताकि संसद्-भवन में आरक्षण के विरोध में निरन्तर उद्घोष निनादित हो सके और असमानता के आधार पर देश-संचालन करनेवाले राजनेताओं की ‘समाज तोड़ो-सत्ता जोड़ो’ की गर्हित राजनीति को ध्वस्त किया जा सके।
(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद; २६ अप्रैल, २०१८ ई०)