भोजपुरी गीत : देखनी किसानवा के रोवत हो

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय-


 

खेतवा देखनी, खरिहनिया देखनी,
देखनी किसानवा के रोवत हो।
जाँघभर पनिया में धानवा के रोपत,
अपना भविसिया१ के बोवत हो।
घर-दुआरि भँसल, डेरा-डाँड़ बिलाइल,
रही गइल मददिया२ के जोहत हो।
कहाँ उधियइले परधान देसवा के ऊ?
काहें नइखन पपवा के धोवत हो।
दैब३ कइले खेतवन के बाँझ ए बिरनवा!
फसलियन में परानि४ नइखे होखत हो।
बाबा-बाबू के मुड़िया५ पकड़ि के ऊ बोले,
“काँहें एतना बेरिया ले सोवत हो।”
संग छोड़ले बाबा आ बाबू जी रुसले,
रहि गइल साँसवा के टोवत हो।


शब्दार्थ : १- भविष्य २- सहायता ३- विधाता ४- जीवन, प्राण ५- सिर
(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद; २४ मार्च, २०१५ ईसवी )