- गोस्वामी तुलसीदास-जन्मतिथि-समारोह सम्पन्न ।
“गोस्वामी तुलसीदास ने मध्ययुगीन भारत की सम्पूर्ण चेतना को काव्यमय वाणी दी है। तुलसी से पूर्ववर्ती दार्शनिक विचारधाराओं और सम्प्रदायों के परस्पर विरोध का कारण मात्र सैद्धान्तिक नहीं था, अपितु वास्तविकता की परस्पर विरोधी परिस्थितियाँ थीं। तुलसीदास ने इन दोनों का मूल निदान ढूँढ़ा था। यही कारण है कि तुलसीदास एक महान् जीवनद्रष्टा और स्रष्टा थे।”
उपर्युक्त विचार भाषाविद्-समीक्षक डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने बी०एन०पी० पब्लिक स्कूल, बाई के बाग़, प्रयागराज के सभागार में ७ अगस्त, २०१९ ई० को आयोजित ‘लोकनायक तुलसीदास की लोकमंगलकारी दृष्टि और सृष्टि’ विषयक परिसंवाद-कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किये थे।
विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ० सरोज विश्वकर्मा ने कहा,”तुलसीदास की उद्भावनाएँ मौलिक होते हुए भी लोकहृदय को इसलिए स्पर्श करती हैं कि उनकी अवतारणा कवि के विशाल मानसपटल पर होती है। हर पाठक को उनमें अपने ही भावों और विचारों का प्रतिबिम्ब दिखायी देता है।” यशपाल ठाकुर ने बताया,”तुलसी की भक्ति दास्य-भाव की है, जिसमें इष्टदेव की अनन्यता और भक्ति के आत्मार्पण की चरम अभिव्यक्ति होती है।”
डॉ० रामकृष्ण गौतम का मत था, “तुलसीदास काव्यकला के मर्मज्ञ थे। उन्हें भाषा, भाव, रस, अलंकार, छन्द– काव्य के सभी अंगों की गहरी परख थी।” डॉ० स्तुति यादव ने कहा,”तुलसीदास की रचना में उनके हृदय से निकले हुए सीधे भाव हैं; कृत्रिमता उन्हें छू भी नहीं पायी है।”
डॉ० अभिलाष मीणा का कहना था,”तुलसीदास के मन पर स्त्री-उपदेश का तत्क्षण प्रभाव पड़ा था। उनके भौतिक प्रेम की अजस्र धारा पारलौकिक प्रेम की धारा में परिणत हो गयी। स्त्री के उपदेश ने उनके ज्ञाननेत्र खोल दिये।” इस अवसर पर अजस्रा, विनायक कुमार, डॉ० रजनी जायसवाल, पूर्णिमा प्रभाकर, अंजना भारती, श्रुति चावला, रमेश परिहार, उमेश मालवीय आदिक बड़ी संख्या में अध्यापकगण उपस्थित थे।
समारोह के आरम्भ में मुख्य अतिथि डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने दीप-प्रज्वलन कर समारोह का उद्घाटन किया था। प्रधानाचार्य डॉ० सुषमा सिंह ने मुख्य अतिथि का सम्मान किया। समारोह का संयोजन कमलेन्दु सिनहा ने किया था और संचालन इन्दुमती वर्मा ने। विद्यालय के प्रबन्धक रजनीश गोयल ने अभ्यागतगण के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की थी।