कछौना में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में अव्यवस्थाओं का अंबार है। मामला संज्ञान में आने के बाद एसडीएम ने नाराजगी जताई है।यहां तैनात हिंदी का अध्यापक समीक्षा व प्रतीक्षा न लिख सका न संधि विच्छेद कर सका जिस पर एसडीएम ने नाराजगी जताई और अधिकारियों को रिपोर्ट करने की बात कही।वही प्रांगड़ में बने प्राथमिक स्कूल में एक शिक्षिका दो साल से अनुपस्थिति पाई गई जिस पर एसडीएम ने कार्यवाही के लिए लिखा पढ़ी करने की बात कही है।
जिले के 19 ब्लाकों में कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय संचालित है। इन विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए आने वाली सुविधाओं को जहां शिक्षा विभाग के अधिकारी हजम कर रहे हैं। वहीं विद्यालय में रहने वाली छात्राओं को गुणवत्ता पूर्ण भोजन के साथ ही पुस्तकों का अभाव, रहने के लिए घटिया व्यवस्था के साथ ही अन्य कई समस्याओं से प्रतिदिन दो-चार होना पड़ता है। विद्यालयों में अव्यवस्था का आलम है।जिले में संचालित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में छात्राओं को मानक के अनुरूप सुविधा नहीं मिल रही है।कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में पढ़ने वाली छात्राओं को वह सुविधा नहीं मिल पा रही, जो मानक हैं।
शनिवार को एसडीएम सण्डीला आसीष सिंह ने कछौना के स्कूल का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि विद्यालय में छात्राओं के पास चद्दर व गद्दे नहीं है।कम शिक्षक होने के कारण उनको हर विषय की पढ़ाई सही से नहीं कराई जा रही है। इस संबंध में छात्राओं ने उनसे शिकायत की है।उन्होंने भोजन की गुणवत्ता व परिसर की सफाई को लेकर भी अधिकारियों को नियमित जांच व गुणवत्ता बनाए रखने का निर्देश दिया।यहां हिंदी का अध्यापक ही एसडीएम की परीक्षा में फेल हो गया जिसके बाद एसडीएम खुद शिक्षक बने और अध्यापक समेत छात्राओं को लिखकर बताया।
एसडीएम ने प्राथमिक विद्यालय का निरीक्षण किया जहां एक अध्यापिका शिखा श्रीवास्तव करीब दो साल से स्कूल से नदारद है।जानकारी पर एसडीएम ने मामले को डीएम के संज्ञान में देने के साथ कार्यवाही के लिए भी पत्राचार करने को कहा।एसडीएम ने वार्डन कृति द्विवेदी को शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के निर्देश भी दिए।एसडीएम के निरीक्षण में स्कूल बीमार मिला जिससे यह बात तो जाहिर है कि अगर ऐसे पढ़ेगा तो कैसे बढ़ेगा इंडिया।