भारतीय शासन और मीडिया की गलबँहिया

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

चुनाव-परिणाम आ चुके हैं। अब ‘आफ़ताब और श्रद्धाकाण्ड’ का प्रचार-प्रसार समाप्त। क्रीतदास मीडियाकर्मी किसी और ‘मुसलमान-हिन्दू की राजनीति’ करने और उसके ज़ह्र (‘ज़हर’ अशुद्ध है।) की सुई को भारतीय समाज की नसों मे चुभोने के लिए एक और अवसर की तलाश मे घात लगाये दिखेंगे। ऐसे नितान्त, निकृष्ट-निर्लज्ज मीडियाकर्मियों का चरित्र बिका हुआ है; सड़कों पर पसरा हुआ है।

हमारे देश के गर्हित राजनेता भारतीय समाज के मन-मस्तिष्क मे ‘मनभेद’ का विष-बीजवपन करते आ रहे हैं; क्योंकि उन्हें ‘जनकल्याण’ के साथ कोई प्रयोजन (सरोकार) नहीं।

देश के सभी समाचार-चैनलों के दल्लाल मीडियाकर्मी कितने बकचोन्हर, बुरबक तथा बेहया हैं, सभी जान चुके हैं।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १२ दिसम्बर, २०२२ ईसवी।)