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भारतीय महिलादल टी-२० शृंखला में बुरी तरह से पराजित

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

आज (२१ मार्च) अटलबिहारी वाजपेयी स्टेडियम, लखनऊ में खेले गये दूसरे टी-२० क्रिकेट मैच में दक्षिणअफ़्रीका-महिलादल ने भारतीय महिलादल को ६ विकेटों से पराजित किया है। इसके साथ ही उसने तीन मैचों की वर्तमान शृंखला २-० से जीत ली है। पहले मैच में दक्षिणअफ़्रीका-महिलादल ने भारतीय महिलादल को ८ विकेटों से पराजित किया था।

आज के मैच में हार के मुख्य कारण :–
★ भारत ने तीन आसान कैच छोड़े थे।
★ भारतीय क्षेत्ररक्षण निम्नस्तर की रही।
★ भारत की अधिकतर खिलाड़ी ‘मरियल’ दिख रही थीं।
★ राजेश्वरी गायकवाड़ और राधा यादव के अलावा सभी गेंदबाज़ निष्क्रिय दिखीं। तेज़ गेंदबाज़ों में न तो गेंद को तेज़ी के साथ उछालने, गुड लेंथ पर गेंद फेंकने, गेंद को यॉर्क कराने, इन-स्विंग-आऊट-स्विंग कराने की सामर्थ्य दिखी और न ही ऑफ कटर, लेग कटर करने, गुगली गेंद करने का कौशल दिखा।
★ मैच के अन्तिम ओवर में भारतीय गेंदबाज़-द्वारा ‘नो-बॉल’ करना, भारत की हार का कारण बना।
★ स्मृति मंधाना की कप्तानी ‘दो कौड़ी’ की रही। उन्हें अपनी गेंदबाज़ों और क्षेत्ररक्षकों के साथ यथावसर संवाद करते रहना चाहिए था, जो नहीं दिखा।
★ भारतीय क्षेत्ररक्षकों-द्वारा छोड़े गये तीन आसान कैच यदि ले लिये गये रहते तो भारत १६-१७वें ओवर में ही मैच जीत गया रहता। क्षेत्ररक्षकों में पूर्वानुमान कर गेंद को रोकने की कला और तकनीक का अभाव स्पष्टत: दिखा है, जो भविष्य में भारत के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।
★ स्फूर्तिविहीन क्षेत्ररक्षण का परिणाम था कि भारत १५ से २० रन रोक सकता था।
★ दक्षिणअफ़्रीका के बल्लेबाज़ एक ठोस रणनीति के अन्तर्गत बल्लेबाज़ी कर रहे थे।
★ दक्षिणअफ़्रीका की बल्लेबाज़ ली ने जो आधार दिया था, वह जीत के लिए एक ठोस शुरुआत थी। लौरा ने भी आकर्षक प्रदर्शन किया था।
★ दक्षिणअफ़्रीका की बल्लेबाज़ी ठोस दिखी थी।
विश्वकप-प्रतियोगिता की दृष्टि से भारतीय महिला खिलाड़ियों की तैयारी अभी ५℅ दिख रही है; नितान्त शैशवास्था में। उसके गेंदबाज़ी और क्षेत्रक्षण के प्रशिक्षकों की प्रशिक्षणशैली पर सीधे प्रश्नचिह्न खड़े हो जाते हैं।

● चित्रविवरण– दक्षिणअफ़्रीका के खिलाड़ी ‘विजयपर्व’ मनाते हुए।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २१ मार्च, २०२१ ईसवी)