प्रभात सिंह (वरिष्ठ पत्रकार)-
किसी भी व्यापारिक प्रतिष्ठान, औद्योगिक इकाई या फिर कोई संगठन जो भी परिवार के संयुक्त उद्यम से बनाया गया हो, परिवार के टूटने के बाद संयुक्त उद्यम पर असर पड़ना लाज़मी है। जो जितना बड़ा परिवार, जितना बड़ा व्यवसाय उसमें उतनी गहरी टूटन। वो टूटन परिवार के प्रपोर्शन में छोटी बड़ी दिखती है। एक दौर था जब छोटी मोटी व्यावसायिक फर्में एंड संस, एंड ब्रदर्स तथा दो नामों के साथ फलती फूलती थी। जब वह टूटती हैं तब सब कुछ दो हिस्सों में हूबहू जुड़वाँ सी दिखती हैं बस बीच में दीवाल खड़ी हो जाती है। परिवार के टूटने का एक क्रम है। वह क्रम सुगबुगाहट,आशंकाओं से शुरू होता है फिर बाद में हिस्सेदारी में ज्यादा से हांसिल करके नए स्थापन की परिकल्पना की शक्ल ले लेता है।
समाजवादी पार्टी ख़ालिस परिवार की उपज थी। और वह परिवार की शक्ल में कुछ महीने पूर्व तक फलते फूलने रहने की बे असर कोशिश में थी। आज के दौर में यदि बटवारा ही टूटन के बाद के मवाद को इस स्थिति में लाने से बचाने का सबसे अहम् और सरल तरीका है। यह जिम्मेदारी भी है और समय की मांग भी। किसी मिठाई की तरह किसी बड़े ज्वेलर की प्रतिष्ठान की तरह यह पारिवारिक पार्टी भी दो या उससे अधिक नामों में विभाजित हो जायेगी। फिर बाद में लखनऊ के मशहूर “जैन क्लीनिक” की तर्ज पर इस परिवार के टुकड़े समय गिनाएंगे, असली और नकली होने का स्वांग रचेंगे, उत्तराधिकारी के हक़ का दावा करेंगे। यह सब कुछ आम है। केवल और केवल एक मात्र चिंता का विषय है कि इस परिवार में उत्तर प्रदेश की जनता को पार्टी बनाया गया। यह टूटन आज की नहीं होगी। इसकी जड़ें गहरी होंगी। जिसको अपने निजी फायदे के चलते इस परिवार के एक एक सदस्य ने राज्य के 20 करोड़ लोगों को छला है। यह इस परिवार की कुत्सित कूटनीति का हिस्सा है। किसी बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठान के टूटने के बाद होने वाले संभावित नुक्सान से बचाये रखने के लिए उसके कर्मचारियों उसके स्टेक होल्डर्स के लिए इस देश में क़ानून हैं। कंपनी बंद हो जाए,उसके पुर्जे पुर्जे बेच के उनके शेयर होल्डर्स कर्मचारियों के हितों की रक्षा की जाती है। लेकिन ऐसे राजनितिक परिवार के टूटने से प्रदेश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था के टूटने की क्रिया बिल्कुल भी छम्य नहीं है। जनता को चाहिए अब परिवार से उभरे और किसी नाटक के हाइ वोल्टेज ड्रामा से खुद को बचाये। यह ड्रामा हमें आकर्षित करता है लेकिन ऐसा कुछ हमारी जड़ों को खोखला कर दे। उससे बचने की जरुरत है।