● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
आज (२६ जुलाई) ही की तारीख़ मे भारत के रणबाँकुरों ने पाकिस्तानी फ़ौज को परास्त कर, करगिल मे राष्ट्रध्वजा लहराकर अपनी विजयगाथा का स्वर्णिम इतिहास रचा था। उधर करगिल-विजयश्री ने भारत के सेनानियों के गले मे विजयहार पहनाया इधर मेरी कृति ‘लाहौर से ‘करगिल’ तक’ (उपयुक्त नाम ‘करगिल’ ही है, ‘कारगिल’ नहीं।) जन-जन के लिए कण्ठहार बन चुकी थी।

देश की आन-बान-शान की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर (‘न्यौछावर’ अशुद्ध है।) करनेवाले अमर बलिदानियों को हमारा सारस्वत नमन।