—- आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
एक तो वैसे ही देश का विपक्षी दल हमारी आवाज़ उठाने का साहस नहीं कर पा रहा है। देश में जब से न्यू इण्डिया की मोदी-सरकार का गठन हुआ है तब से सम्पूर्ण देश में अराजकता दिख रही है।
अभी पिछले दिनों जिस तरह से हाथरस में असहाय गुड़िया के साथ निर्मम कृत्य किया गया था और उसकी कष्टकारक मृत्यु के बाद उसके परिवारवालों की भावना के साथ बलात्कार किया गया था, उसमें गिरिफ़्तार दरिन्दों-सहित हाथरस के पुलिस और ज़िला-प्रशासन तथा उत्तरप्रदेश-शासन की भी घिनौनी भूमिका दिख रही है।
आज उत्तरप्रदेश में पूरी तरह से ‘अपराधीराज’ है। जो जिसे जैसा चाह रहा है, वैसा कर दे रहा है और योगी आदित्यनाथ की सरकार नपुंसक बनी हुई है। उक्त मृतका के परिवारवालों का दु:खड़ा सुनने और आश्वासन देने के लिए यमुना एक्सप्रेस-वे ग्रेटर नोएडा के पास राहुल गांधी का आन्दोलित काफ़िला पहुँचा था तब जब पुलिसपक्ष ने धारा १४४ के उल्लंघन की बात कही तब राहुल गांधी ने कहा, “मैं अकेले हाथरस जाना चाहता हूँ। जो मेरे साथ हैं, वे चले जायेंगे।” इस पर एक पुलिस-अधिकारी ने राहुल गांधी को दो बार धक्के दिये थे, जिसके कारण वे ज़मीन पर गिर गये।
अब प्रश्न है, सत्तापक्ष की घिनौनी राजनीति का विरोध करने के लिए यदि कोई विपक्षी दल प्रभावक ढंग से शान्तिपूर्ण आन्दोलन करता है तो उसे क्यों रोका जाता है? इतना ही नहीं, एक राष्ट्रीय नेता का कॉलर पकड़ कर जिस पुलिस-अधिकारी ने धक्के दिये थे, उसने अक्षम्य कृत्य किया है। उत्तरप्रदेश की महिला-पुरुष पुलिस ने काँग्रेस की एक राष्ट्रीय प्रवक्त्री सुले के साथ जिस तरह से गाली-गलौच किये हैं, वह बेहद घटिया रहा। राहुल को उत्तरप्रदेश के गुण्डे पुलिसकर्मियों ने दो बार धक्के दिये और उन्हें गिरा दिया गया, फिर जब राहुल ने कहा– मैं अकेले ही जाना चाहता हूँ तब धारा १४४ के स्थान पर धारा १८८ के अन्तर्गत राहुल और प्रियंका-सहित कई नेताओं को गिरिफ़्तार कर लिया गया है।
दलित की बेटी के साथ बलात्कार का नाम लेकर ‘दलित-झण्डा’ बरदारी करनेवाली ‘बहन कुमारी मायावती’ अब मौन क्यों हैं? अब उनका दलित-प्रेम कहाँ है? यादव भाई अखिलेश यादव कहाँ हैं? ये सभी मोदी की तरह से ‘ट्वीट’ कर बड़ी-बड़ी बातें करना जानते हैं; परन्तु सड़क पर निकल कर विरोध करना नहीं।
जिसे एक सम्प्रदाय-विशेष के कुछ लोग ‘पप्पू’ कहते आ रहे हैं, उसकी ‘परिपक्वता’ अब पुष्ट हो चुकी है। सरकार की चीन-भारत-विवाद रहा हो; महँगाई रही हो; भ्रष्टाचार रहा हो तथा कोई भी जनविरोधी विषय रहा हो, अब तक एक ही व्यक्ति मुखर रहा है, और वह है, ‘राहुल गांधी’।
भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता जिस तरह से अब इस विषय पर स्पष्टीकरण करने के स्थान पर विषय को दूसरी ओर मोड़ दे रहे हैं और घटना को अपने पक्ष में लाकर प्रस्तुत कर रहे हैं, उनसे सुस्पष्ट हो जाता है कि प्रवक्ता कितने निर्लज्ज हैं। वैसे घटना के एक-एक पल का चलचित्रांकन हो चुका है और सच से मुख नहीं मोड़ा जा सकता।
यह भी आसार दिखने लगा है– बकरे की माँ कब तक ख़ैर मनायेगी।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १ अक्तूबर, २०२० ईसवी।)