राहुल मिश्र बघौली–
बघौली (हरदोई) थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्रामसभा करीमनगर सैदापुर के मजरा मसीत में गाटा संख्या 537 एवं 538 चरागाह एवं ग्राम समाज की भूमि पर लगभग चालीस लोगों ने काफी समय से प्रधान की शह पर अवैध कब्जा जमा रखा है । सरकार द्वारा गठित की गई एंटी भू माफिया टीम यहां सरकारी जमीनों से अवैध कब्जा हटवाने में नाकाम साबित हो रही है ।

प्राप्त जानकारी के अनुसार मसीत गांव निवासी करनवीर सिंह पुत्र आर एन सिंह ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, राजस्व विभाग आदि को दिए लिखित शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि यहां के मौजूदा ग्राम प्रधान व लेखपाल की मिलीभगत से उनके करीबियों ने सरकारी जमीनों पर काफी समय से अवैध कब्जा जमा रखा है । इस मामले की जांच के लिए बघौली थाना प्रभारी ने एक सिपाही को मौके पर भेजकर मौके की जांच भी करवाई । जिसमें विपक्षियों द्वारा अवैध कब्जे का मामला सही पाया गया लेकिन फिर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई । प्रार्थी ने जनसुनवाई पोर्टल पर भी कई बार शिकायत दर्ज कराई लेकिन इसके बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई । इससे यह साबित होता है कि सरकार की कोशिशों के बावजूद अधिकारी और कर्मचारी सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं ।
मुख्यमंत्री द्वारा चलाया गया एंटी भू माफिया अभियान इनके सामने असफल साबित हुआ लगता है । वहीं संबंधित लेखपाल अजय कुमार ने बताया कि उनके कार्यकाल के पहले ग्राम समाज की भूमि पर (जहां पर इस समय आबादी है) कुछ लोगों द्वारा कब्जा कर लिया गया था । लगभग 10 माह पूर्व कुछ लोगों के द्वारा अवैध कब्जा किया जा रहा था जिसकी सूचना मिलने पर मुख्यमंत्री एंटी भू माफिया अभियान के तहत फदाली पुत्र शिवराम कश्यप, सरोज पुत्र शिवराम कश्यप, सर्वेश आदि इन लोगों पर 115 सी के तहत कार्रवाई की गई थी । मौके पर कम्पोस्ट खाद यानि गोबर व कूड़े के ढेर, गोबर के उपलों यानि कण्डों के ढेर एवं दो-तीन लोगों के मकान की बुनियाद को गिरा कर कब्जा मुक्त कराया गया था । वहीं दूसरी तरफ प्रार्थी करनवीर सिंह ने लेखपाल पर आरोप लगाया है कि वर्तमान लेखपाल अजय कुमार से शिकायत करने पर उसने धमकी देकर कहा कि जो हम चाहेंगे वही होगा तुम शिकायत कहीं भी करो आएगी तो हमारे ही पास ही ।
ऐसे शब्दों से लगता है कि प्रार्थी का मनोबल कमजोर करके उसे डराने का प्रयास किया जा रहा है और उपरोक्त कर्मचारियों की संलिप्तता साफ नजर आ रही है । प्रार्थी द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र से चिढ़े लेखपाल और प्रधान ने पीड़ित पर ही अवैध कब्जा करने का आरोप लगा दिया । अब सवाल यह है कि प्रदेश सरकार की सख्ती के बावजूद भी जिला प्रशासन क्यों खामोश बैठा है ? आखिर आरोपियों पर क्यों कार्रवाई नहीं हो रही है ? जिला प्रशासन की आरोपियों पर इतनी मेहरबानी क्यों है ?