शीश काटने वाले काली मां के भक्त के इलाज को अस्पताल में नही मिला सर्जन, बाहरी लोगों ने लगाए टांके

                जिला अस्पताल में इलाज के लिए यदि जा रहें हैं तो जांच पड़ताल कर इलाज कराएं क्योंकि यहां चिकित्सक नही बल्कि अप्रशिक्षित बाहरी लोग इलाज करते हैं। ऐसा आज से नही वर्षों से चल रहा है। मामला साधारण हो या गंभीर पर इंजेक्शन से लेकर टांके लगाने तक का कार्य यहां स्वास्थ्यकर्मी नही करते बल्कि अप्रशिक्षित लोग करते हैं।
              आज की इस तस्वीर से हर कोई वाकिफ होगा। महोलिया शिवपार स्थित काली मंदिर में अपना शीश चढ़ाने वाले भक्त को जब इलाज के लिए जिलाअस्पताल लाया गया तो चिकित्सक ने नही बल्कि इन्ही बाहरी लोगों ने उपचार शुरू कर दिया। वैसे तो इस गंभीर मामले में तत्काल सर्जन को बुलाना चाहिए था, पर कितना भी सीरियस मरीज क्यों न हो इमरजेंसी में सर्जन कभी नही आते। ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या वाकई स्वास्थ्य महकमा मरीजों के प्रति गंभीर है। यदि हाँ तो फिर सर्जन के बजाय अप्रशिक्षित लोगों से टांके क्यों लगवाए गए। बहरहाल जो भी हो  मरीजों की जान से यहां जिस तरहं खिलवाड़ किया जाता है वह जानने के लिए ये तस्वीर काफी है। अक्सर यहां इन अप्रशिक्षित लोगों के इलाज से मरीजों की जान पर आ जाती है, पर विभागीय जिम्मेदार जानबूझकर अंजान बने रहते हैं।