चन्द अश्आर

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

एक–
कहूँ वा न कहूँ, फिर चुप भी रहा नहीं जाता,
तदबीर!१ तू ही बता इस चुप्पी का राज़ क्या है?
दो–
सूरत बेमानी है, तस्वीर बनाये नहीं बनती,
सीरत२ अनजानी है, तासीर३ जो नहीं तनती।
तीन–
एहसासात के दाइरे में, हम-तुम साथ रहा करें,
कमोबेश जीते रहें, ख़ुद में रह नयी बात कहें।
चार–
बेशक, तेरी पाक़ीज़गी४ छू के मुझे लौटी है,
मेरी बेईमान नज़रें गुंजाइश छोड़ने को तैयार नहीं।
पाँच–
तू लाजवाब है और बेनज़ीर५ भी,
फ़क़त तबस्सुम६ की ज़रूरत तेरे होठों पे।

शब्दार्थ : १- उपाय २- स्वभाव ३- प्रभाव ४- पवित्रता ५- अनुपम, बेमिस्ल (बेमिसाल अशुद्ध है।) ६- स्मित, मृदुहास (मुसकान)।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ९ अगस्त, २०२० ईसवी)