दीवाली जगमग हुई, दीये-झालर संग

दीवाली जगमग हुई, दीये-झालर संग।
दिलवालों के माल पर, दिलवाले सबरंग ।।

कच्चे,पक्के घर सभी, सजे-धजे बहु-भेष ।
उत्साही गलियाँ हुई, मचा-कोलाहल देख ।।

दूकानें शोभामती, चमक-दमक पर ध्यान ।
वित्तमती हर नायिका, चटक-मटक का मान ।।

खील खिलौनों से हुए, रसगुल्ले नाराज ।
सभी बरफियाँ खुश हुईं, जमता देख समाज ।।

मौन इमरती हँस पड़ी, देख जलेबी प्यार ।
बहन, आज मत रोकियो, बाहर बिछड़े यार ।।

बिकते देख कुबेर संग,लक्ष्मी और गणेश ।
गोबर के भगवान भी, पुजते अपने देश ।।

दगे पटाखे, मिरचियाँ,चर्खी, बान, अनार ।
अगले दिन कुछ ढूंढता, मूरख बारम्बार ।।

नारी ह्रदय विशालता, प्रकटे ‘भइया-दूज’ ।
राजा भइया ‘वीर’ बन, करें कामना पूज ।।

त्योहारों का देश है, अपना भारत वर्ष ।
क्या गरीब, क्या धनी हो, सबको होता हर्ष ।।

अपनी प्यारी सँस्कृति, लोकरीति व्यवहार ।
मिलजुल मनते हैं यहाँ, सभी तीज त्योहार ।।

            अवधेश कुमार शुक्ला
            मूरख ह्रदय
         यम द्वितीया ( भइया दूज )
         दीपोत्सव, कार्तिक कृष्ण,
            चित्रगुप्त जयन्ती
                26/11/2021