क्रान्ति को जन्म दे, ऐसी ‘जननी’ हमें चाहिए


डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय


सुगबुगाहट हो तो, अब आग उठनी चाहिए,
हो कहीं भी आग तो, आग लगनी चाहिए।
बहुत सोये हो तुम! अब जग जाने को सोचो,
उठाओ अब मशाल, लपट उठनी चाहिए।
बूढ़ा भारत समझ वह, ‘न्यू इण्डिया’ बना रहा,
मत भूलो देश ख़तरे में, एकता रहनी चाहिए।
ग़द्दार हम पर हैं, देखो! कैसा शासन कर रहे,
क्रान्ति को जन्म दे, ऐसी ‘जननी’ हमें चाहिए।
आज़ाद ख़ून को कब तक, पानी बनाओगे,
ग़ुलामी दूर झटक, अब क्रान्ति होनी चाहिए।
(सर्वाधिक सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद; १५ अगस्त, २०१८ ईसवी)