कविता : राखी का अटूट रिश्ता

शालू मिश्रा, नोहर (हनुमानगढ़ ) राजस्थान


भाई और बहन हो जाओ तैयार,
लो आ गया राखी का त्योहार ।
ठंडी बारिश की बूँदे,
सावन की सौंधी महक।
भाई के आने की उम्मीद बहना को लगी है कसक।
राखी और मिठाई से सजा होगा पूजन थाल,
अक्षत रोली सोहेगा प्यारे भाई के भाल ।
अटूट रेशमी धागे से कलाई पे चमक आ जाएगी,
भाई को कभी न भूलने का वचन  अमर कर जाएगी।
छोटे भाई से स्नेह बङे से मिलती है दुआ।
सारे जग मे सबसे सच्चा रिश्ता है यही हुआ।
मुसीबत आने पर भाई का साथ निभाना,
बहन की खातिर हर पल कुर्बान कर जाना।
वादा  मुझसे कर लो भैया अबकी बार जब आओगे,
साथ मे प्यारी भाभी को घर लाओगे।
राखी  की इस लाज को उम्र भर निभाना तुम,
दुनियादारी के चक्कर मे मुझे न भुलाना तुम।
मन मे सपना सजाती रहूँगी
हर साल यूँही राखी बाँधती रहूंगी ।
रब ने ऐसा अटूट बंधन बनाया है, तभी जग में ये त्योहार  रक्षाबंधन कहलाता है।
रिश्ता बना रहे सदियों तक,
मिले भाई को  खुशियाँ अपार।
मिश्री के मीठे रस सा, झलकता  रहे भाई बहन का अनोखा प्यार।