वर्तमान सरकार का राष्ट्रघाती चेहरा!

‘मुक्त मीडिया’ का ‘आज’ का सम्पादकीय

पृथ्वीनाथ पाण्डेय-

वर्तमान सरकार पूरी तरह से ‘राष्ट्रविरोधी’ है; क्योंकि उसने यह अधिकार अपने हाथों में ले लिया है– हम तय करेंगे, कौन राष्ट्रभक्त है और कौन राष्ट्रद्रोही। यह भी सच है कि जो सरकार के मुँह-में-मुँह सटाकर बतिया रहा है, वह तथाकथित छद्म राष्ट्रवाद का पोषक बन जा रहा है और जो खुले मैदान में दहाड़ते हुए सरकार के बेईमान नज़रिया पर प्रहार कर रहा है, वह राष्ट्रघातक मान लिया जा रहा है।

धिक्कार है, देश की ऐसी सरकार को, जो सब कुछ अपने पक्ष में ही देखना चाहती है, जो कि उसका दिवा-स्वप्न है। देश की जनता की कमर तोड़ रही इस सरकार को अब यह अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए कि उसके सम्मोहन का प्रभाव अब छँटता जा रहा है; क्योंकि देश में जब ‘क्रान्ति’ की रणभेरी बजेगी तब वह जनघातक सरकार की कमर तोड़ कर रख देगी।

पिछले साढ़े पाँच वर्षों में हमारे देश की आर्थिक दशा और दिशा को इस सरकार ने इतना रुग्ण बनाकर रख दिया है कि जनता “त्राहि-त्राहि’ करने की स्थिति में है। इस सरकार की बेहद घटिया आर्थिक नीति ने देश की जनता के मनोबल को तोड़ कर रख दिया है। आज जिस तरह से देश की जनता के अरबों-खरबों रुपये बैंकों में जमा हैं, उन्हें सरकार की अन्ध बैंकिंग नीतियों के कारण वही जनता अपने रुपये निकालने में असमर्थ और असहाय दिख रही है और रेडियो पर ‘मन की बात’ करनेवाला सरकार का प्रमुख व्यक्ति मुँह चुराये-मुँह छुपाये सिकुड़ा हुआ है। ऐसे शोषकवृत्तिवाले लोग प्रथम दृष्ट्या ‘आर्थिक अपराधी’ हैं।

देश की संसद् में प्रमुख विपक्षी दल जब दिल्ली-दंगे में सैकड़ों हताहत लोग पर सदन में बहस कराने की माँग करता है तब उसके सात सदस्यों को वहाँ का पूर्वग्रहपूर्ण अध्यक्ष निलम्बित कर देता है। लोकसभा का वह अध्यक्ष क्यों नहीं कहता– दिल्ली-दंगे में मारे गये-घायल हुए तथा चल-अचल सम्पत्ति नष्ट किये गये विषयों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्षी दलों के सदस्यों को लेकर एक समिति गठित की जायेगी, जो प्रभावित क्षेत्रों में जाकर वस्तुस्थिति को समझेगी और सर्वसम्मति से एक ‘रिपोर्ट’ प्रस्तुत करेगी?

आज यह सरकार अपनी उस अतिवादिता का परिचय दे रही, जो आज़ाद भारत के इतिहास में किसी भी सरकार ने नहीं दिया था; क्योंकि यह सरकार देश को ‘हिन्दू बनाम मुसलमान’ की आग में धकेलती जा रही है, जहाँ ‘सर्वनाश का परिदृश्य’ उपस्थित हो रहा है। सरकार के सारे ठीकेदार अय्याशी करेंगे और अन्धभक्ति की शिकार बेचारी जनता कुत्ते की मौत मारी जायेगी।

अब भी समय है, देश की जनता विनाश से बचने के लिए अपनी बुद्धि का आश्रय ले, अन्यथा ‘अन्यथागामी’ पथ पर विनष्ट होने के लिए तैयार रहे। यह सरकार देश की जनता की ‘देह की विटामिन’ सोखकर निष्क्रिय करने की चाल चल रही है। जागो जनता! जागो।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ६ मार्च, २०२० ईसवी)