एक अभिव्यक्ति
★आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय निरभ्र आकाश मेंमखमली वितान के नीचेगोटेदार चादर परविराजमान सितारेवसुन्धरा काश्रृंगार (शृंगार) कर रहे हैं।कुछ ऐसे अबूझ रास्ते हैं,जो पहाड़ों के दामन मेंवर्षों से सुस्ता रहे हैं।मीलों दूर विस्तृतरेत के सागर के […]