एक अभिव्यक्ति

February 8, 2021 0

★आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय निरभ्र आकाश मेंमखमली वितान के नीचेगोटेदार चादर परविराजमान सितारेवसुन्धरा काश्रृंगार (शृंगार) कर रहे हैं।कुछ ऐसे अबूझ रास्ते हैं,जो पहाड़ों के दामन मेंवर्षों से सुस्ता रहे हैं।मीलों दूर विस्तृतरेत के सागर के […]

बुझी जलायी है तो यों ही नहीं

December 13, 2020 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय लेखनी उठायी है तो यों ही नहीं,आस जगायी है तो यों ही नहीं।दुश्मनी हद से गुज़र जाने दो अब,दोस्ती निभायी है तो यों ही नहीं।राज़फाश करना ज़रूरी है अब,चादर उठायी […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की विचारजीविता और हृदयजीविता

July 13, 2020 0

अभिव्यक्ति-शंख ————————- मेरे बाहुपाश के शब्दकोश सेस्नेह-सदाशयता-शालीनताअन्तर्हित हो चुकी हैं।मेरे पदचाप को सुनोऔर पग-रज को देखो–कोलाहल से परेआर्त स्वर का अनुभव करो–रक्त-रंजित मेरी आकांक्षा सेसाक्षात् करो।वर्जना की श्रृंखला+ में आबद्धमेरा अभिलाष,मेरी उत्कण्ठाआतुर हैं; उद्यत हैं; […]

नदी अब बहुत गुमान में है

August 9, 2019 0

शिवांकित तिवारी “शिवा”, युवा कवि एवं लेखक– नदी अब बहुत  गुमान में है, क्योकि वो आजकल उफ़ान में है । ग़रीब तो आज भी फुटपाथ पर सोते है, अमीरजादे तो अंदर अपने  मकान में है । ज़मीं से तो उनका रिश्ता […]

पुरोहित की दो कविताएं

June 14, 2019 0

समर्पण की भावना जगाती दोस्ती रिश्तों में सबसे अच्छा रिश्ता है दोस्ती। सुख दुख में सबसे पहले काम आती दोस्ती।। कृष्ण सुदामा सी दोस्ती आज भी मिल जाएगी। त्याग समर्पण की भावना जगाती है दोस्ती।। […]

व्यक्त-अव्यक्त

March 2, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक : जीव-जगत् है पाप में, स्वार्थ यत्र-तत्र-सर्वत्र। धरणीधर नेपथ्य में, कान्ता कन्त कलत्र।। दो : निशि-दिवा-सी घूम रही, घर-घर विपदा आज। सम्मान निरापद कहाँ, पूर्ण न होता काज।। तीन : कंकणी […]