सामुदायिक शौचालय का निर्माण हुआ लेकिन कैसा? जानने के लिए पढें…

सामुदायिक शौचालय में पीला ईंटा का उपयोग, मसाले (निर्माण सामग्री) की गुणवत्ता, मानकविहीन निर्माण

कछौना, हरदोई – स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्रामसभा को खुले में शौचमुक्त करने के लिए घर में शौचालय बनाए जाने का अभियान चलाया गया था; जिसमें काफी परिवार शौचालय सुविधा से वंचित रह गए। पूरी ग्रामसभा को खुले में शौचमुक्त करने के लिए प्रत्येक ग्रामसभा में सामुदायिक शौचालय का निर्माण कार्य कराया गया था, परंतु विभागीय अधिकारियों की खाऊ-कमाऊ नीति के चलते इन सामुदायिक शौचालयों का निर्माण ठेके पर मानकों को ताक पर रखकर किया/कराया गया। पीला ईंटा का उपयोग, मसाला (निर्माण सामग्री) की गुणवत्ता, मानकविहीन निर्माण के जरिये खानापूर्ति कर कर्तव्य की इतिश्री कर ली। जिसके कारण कुछ ही दिनों में खराब हो जाएंगे तथा उपयोग में नहीं लाए जा सकेंगे। जिससे लोगों को योजना का सही लाभ नहीं मिल पाएगा। अधिकारियों द्वारा गलत रिपोर्टिंग कर फीलगुड करा दिया जाता है।

जमीनी हकीकत में सामुदायिक शौचालय में विद्युत व्यवस्था की कमी, समरसेबल, हैंडपंप भी नहीं लगा है। दिव्यांग लोग के लिए समुचित व्यवस्था का अभाव, स्नानागार, हैंडवाश सुविधा, शौचालय के गड्ढे व चेंबर अपूर्ण है। जल निकासी हेतु सोख्ता गड्ढा नहीं बने हैं। रखरखाव हेतु स्वयं सहायता समूह/ केयरटेकर की चयन प्रक्रिया भी अधर में लटकी है। जिसके कारण लाखों रुपए की कीमत से बने सामुदायिक शौचालय उद्देश्यविहीन हैं।

कछौना की 41 ग्रामसभाओं में अभी तक 3 ग्रामसभाएँ बरौली, सुन्नी, त्योरी मतुआ में अपूर्ण पड़े हैं। इन सामुदायिक शौचालयों के निर्माण व उपयोग की जमीनी हकीकत के जानने के लिए भारत सरकार द्वारा नामित टीम द्वारा गांव-गांव जाकर निरीक्षण किया जा रहा है। पूरे मामले की रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। योजनाओं का सही ढंग से क्रियान्वयन ना होने के कारण लोग के जीवन में बदलाव नहीं आता है।