वरिष्ठ नागरिक भाषाविद् और समीक्षक डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने प्रयागराज नगर की प्रथम नागरिक कहलानेवाली महापौर अभिलाषा नन्दी के कार्य करने और जन-समस्या सुनने के तौर-तरीक़े पर आपत्ति जतायी है। डॉ० पाण्डेय ने बताया कि आज (२१ अगस्त) को जब वे अपनी एक समस्या लेकर नगर निगम-स्थित अभिलाषा नन्दी के कार्यालय पहुँचे थे तब अभिलाषा नन्दी के कक्ष में ठहाके गूँज रहे थे; कई पार्षद कारण-अकारण बैठे हुए थे। चाय-बिस्किट के दौर चल रहे थे और चाय की चुस्कियों के बीच महापौर अभिलाषा जनसमस्याएँ सुन रही थीं। डॉ० पाण्डेय ने बताया कि जब वे महापौर के कक्ष में घुसे तब कहीं भी बैठने की व्यवस्था नहीं थी और अभिलाषा नन्दी जन-समस्या को महत्त्व न देकर, वहाँ सजी हुई महफ़िल को महत्त्व दे रही थीं। जब एक सामान्य नागरिक की हैसियत से डॉ० पाण्डेय ने अपनी उचित समस्या महापौर के समक्ष रखी तब वे नियम-क़ानून की बातें बताने लगीं, जबकि वे भूल चुकी थीं कि जनसमस्या सुनने के लिए एक उचित वातावरण बनाया जाता है और अनुशासन भी। ठहाके और चाय-पान के वातावरण में समस्या लेकर आये हुए नागरिकों के साथ न्याय नहीं हो पाता, फिर समस्या सुनने के समय वहाँ पार्षदों को बैठाये रखने का औचित्य क्या था?
डॉ० पाण्डेय के अनुसार, उन्हें उस वातावरण को देखकर घुटन महसूस होता रहा और वे चले आये। इस विषय को लेकर डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने सम्बद्ध प्रशासन से माँग की है कि जनसमस्याओं के सुनने के लिए एक ऐसे सभागार की व्यवस्था करायी जाये, जहाँ अपनी-अपनी समस्या लेकर आये हुए नागरिकों के सम्मानपूर्वक बैठने की व्यवस्था हो और जनसमस्याएँ सुनते समय कोई भी पार्षद अथवा नगर निगम का कोई भी कर्मचारी-अधिकारी अनावश्यक रूप से न बैठे और एक प्रामाणिक रजिस्टर की व्यवस्था हो, जिसमें महापौर ने प्रतिदिन कितनी समस्याओं पर विचार किये हैं और उनका निराकरण किये हैं, इनका सुस्पष्ट उल्लेख रहे तथा उस रजिस्टर पर समस्या लेकर आये हुए नागरिकों के हस्ताक्षर भी हों।