प्रियंका वाड्रा ने मृतकों के स्वजन से मिलकर कौन-सा अपराध किया है?

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय-

भाषाविद्-समीक्षक डॉ. पृथ्वीनाथ पाण्डेय

प्रियंका वाड्रा यदि सोनभद्र में मारे गये लोग के स्वजन से मिलने गयी हैं तो कैसा राजनीतिक पहाड़ टूट पड़ा है? योगी और नवनिर्वाचित अध्यक्ष स्वतन्त्र देव सिंह को मिरची क्यों लग रही है?

मत भूलो, विपक्ष का कोई भी नेता लोकतन्त्र का प्रतिनिधित्व कर रहा होता है, इसलिए उसे पूरा अधिकार है कि वह सरकार की सड़ी-गली नीतियों के विरुद्ध आवाज़ उठाये; क्योंकि सत्तापक्ष अपनी असफलताओं पर सफलताओं का जीर्ण-शीर्ण पर्द: लगाकर सत्य को ढकने का असफल प्रयास करता है। हमारी वास्तविक आवाज़ तो विपक्ष ही उठाता है। प्रियंका की तरह शेष राजनीतिक दलों के विपक्षी नेताओं को भी शोक में व्याकुल लोग के पास जाकर सही अर्थों में उनका दर्द बाँटना होगा और उन्हें उनका अधिकार दिलाने के लिए यथाशक्य प्रयास भी करना होगा।

प्रियंका तो एक महिला होकर वहाँ गयी है; उनसे मिलने के लिए कुछ मृतकों के स्वजन आये थे ; परन्तु अन्य स्वजन को प्रियंका से मिलने नहीं दिया गया, क्यों? क्या वहाँ साम्प्रदायिक दंगा हो जाता? भारतीय जनता पार्टी के ‘वोट बैंक’ में सेंध लग जाती? यदि नहीं तो वैसी रोक शासन-प्रशासन की गर्हित मंशा की पटकथा लिख रही है।

(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २० जुलाई, २०१९ ईसवी)