डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
भारतीय जनता पार्टी के प्रयास से कई क्षेत्रीय दलों को मिलाकर एक गठबन्धन दल का अस्तित्व उभरा था, जिसे ‘एन० डी० ए०’ (नेशनल डीमाक्रटिक एलायंस’) ‘रा० ज० द०’ (राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबन्धन) का नाम दिया गया था। आरम्भ में सब-कुछ सन्तुलित ढंग से चलता रहा, परन्तु जैसे-जैसे उस घटक दल के प्रमुख दल भारतीय जनता पार्टी को अप्रत्याशित विजय मिलती गयी, वैसे-वैसे उसकी विस्तारवादी नीति प्रबलतर दिखने लगी। एक समय ऐसा आ गया कि वह दल सम्पूर्ण भारत में एकच्छत्र साम्राज्य स्थापित करने की अहम्मन्यता से जुड़ गया, परिणामत: वह लोकतन्त्र की मर्यादा के विपरीत, ‘विपक्ष-मुक्त भारत’ का दिवा स्वप्न देखने लगा। इसके पीछे अतिरिक्त महत्त्वाकांक्षी नरेन्द्र मोदी की राजनीतिक मनोवृत्ति काम कर रही है। ‘नरेन्द्र मोदी ऐण्ड कम्पनी’ को लगने लगा कि उसके लिए अब उसके साथ जुड़े क्षेत्रीय दलों का अब कोई महत्त्व नहीं है तब अपने दलों की उपेक्षा करनी शुरू कर दी। पहले शिवसेना और अब तेलुगूदेशम् तथा अन्य दल भा०ज०पा० के विरोध में सामने आने लगे हैं। प्रतिक्रियास्वरूप शिवसेना वर्षों से भारतीय जनता पार्टी पर गठबन्धन-धर्म की अवहेलना का आरोप लगाती आ रही है; वहीं अब तेलुगूदेशम् के नेता चन्द्रबाबू नायडू, जो अपना विरोध प्रकारान्तर से करते आ रहे थे, अब प्रत्यक्ष रूप में मुखर हो चुके हैं। कुछ ही दिनों पूर्व उन्होंने अपने दो मन्त्रियों को केन्द्र से त्यागपत्र दिलवाये थे और आज (१६ मार्च, २०१८ ई०) तेलुगूदेशम् ने गठबन्धन दल से स्वयं को अलग कर लिया है। इस तरह से राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबन्धन अब बिखराव की स्थिति में आ चुका है, जो आगामी चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। ऐसी भी सम्भावना दिख रही है कि आगामी चुनावों के लिए विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के समानान्तर जिस रूप में ‘महागठबन्धन’ की तैयारी के सन्दर्भ में विचार कर रहा है, उसमें भारतीय जनता पार्टी की “एकोहम् द्वितीयो नास्ति”‘ की नीति के विरुद्ध उससे असन्तुष्ट और विद्रोही दल उसके ताबूत में आख़िरी कील ठोंकने का काम कर सकते हैं।
यदि नरेन्द्र मोदी की अतिवादिता इसी तरह बनी रही तो उनका साया भी उनका साथ छोड़ सकता है, इससे भी इंकार नहीं किया जा सकता।
(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद; १६ मार्च, २०१८ ई०)
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