अब तक के सबसे घातक-भीषण आर्थिक संकट और सन्त्रास के दौर से गुज़रता देश

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय –

इस समय देश में शासन करनेवाले भले अपनी पीठ थपथपा लें फिर भी वर्तमान और भविष्य अतीव भयावह दिख रहा है। नोटबन्दी और जी०एस०टी० के दुष्प्रभाव का ही परिणाम है कि निजी क्षेत्र की कम्पनियाँ आयेदिन लाखों की छँटनी करती आ रही हैं; अब तक देश के सैकड़ों लघु और मध्यम उद्योग बन्द किये जा चुके हैं और उनमें काम करनेवाले भुखमरी की स्थिति से गुज़र रहे हैं। वे पारिवारिक जीविकोपार्जन-हेतु कोई भी काम करने के लिए बाध्य और विवश हैं। देश की लघु पत्र-पत्रिकाएँ दम तोड़ चुकी हैं और मध्यम और उच्चस्तरीय समाचारपत्रों के शासन-स्तर पर शोचनीय स्थिति बना दी गयी है। विज्ञापन बन्द कर दिये गये हैं। अख़बारी काग़ज़ और स्याही के दाम बहुत महँगे कर दिये गये हैं। उत्तरप्रदेश-शासन ने विज्ञापन-नीति के प्रति क्रूर आचरण का परिचय दिया है। समाचारपत्रों में कार्यरत कर्मचारियों (पत्रकारादिक) पर भी तलवार लटक रही है। इतना ही नहीं, ऐसी भी सम्भावना दिख रही है कि बड़े उद्योगपति भी अपने समाचारपत्रों का मुद्रण और प्रकाशन-कार्य समाप्त कर सकते हैं और स्थगित भी।

केन्द्र और उत्तरप्रदेश की सरकारों की परीक्षा और सेवानीति को यदि गम्भीरतापूर्वक समझा जाये तो यह तथ्य उभर कर आता है कि शासकीय सेवाओं के द्वार अब बन्द करके शासकीय विभागों के निजीकरण करने में सरकार विश्वास कर रही है। अब इसकी शुरुआत तेज़ी में हो चुकी है। ऐसा इसलिए कि देश में जिस तरह से सिद्धान्तहीन लोकविरुद्ध आर्थिक उपक्रम आरम्भ और लागू कर देश की जनता के कमर और कन्धे तोड़ने के काम शुरू कर दिये गये हैं, उससे दूरगामी परिणाम और प्रभाव के निष्कर्ष सामने आने शुरू हो गये हैं। इसी क्रम में अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में सरकारी सेवाओं में पेंशन को समाप्त करने का निर्णय अत्यन्त घातक सिद्ध हो रहा है। इससे आज हमारे करोड़ों वृद्ध और वयोवृद्ध लोग कारुणिक जीवन जीने के लिए बाध्य हो चुके हैं। आज अन्तरराष्ट्रीय बाज़ार में डॉलर की तुलना में रुपया पूरी तरह से ‘बौना’ सिद्ध हो चुका है। ऐसे में, देश में समानान्तर अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा और काला धन अट्टहास करेगा। इसकी भी शुरुआत हो चुकी है। सरकार पंचवर्षीय योजना बनाकर उसके निहितार्थ को भूल चुकी है, जो कि सम्पूर्ण देश के लिए विनाशक सिद्ध होगा

(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २९ अगस्त, २०१९ ईसवी)