सिद्धान्त सिंह –
बैंकों की अखिल भारतीय हड़ताल के दूसरे दिन भी यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के झण्डे तले बैकों के सैकड़ों की तादात में अधिकारियों एवं कमर्चारियों ने इण्डियन बैंक (पूर्व इलाहाबाद बैंक) की हज़रतगंज शाखा के सामने प्रातः 11.30 बजे एकत्र हो कर जोरदार प्रदर्शन एवं सभा की। “खून भी देंगे जान भी देंगे निजीकरण न होने देंगे” जैसे गगन भेदी नारो के साथ सभा प्रारम्भ की गयी।
फोरम के संयोजक अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि माननीया वित्तमंत्री निर्मल सीता रमण द्वारा गत फरवरी 2021 में भी बजट सत्र के दौरान घोषणा की थी कि आर्थिक संसाधनों को जुटाने के उद्देश्य से भारत सरकार शीघ्र ही आई डी बी आई एवं सार्वजनिक क्षेत्र के दो अन्य बैंकों को निजी क्षेत्र में बेंच देगी। परन्तु बैंकों की यूनियनों के द्वारा घोर विरोध प्रदर्शनों के साथ बैंक कर्मी अग्रसर हो कर गत 15 एवं 16 मार्च 2021 को दो दिवसीय हड़ताल पर चले गए थे। जिसकी वजह से बाध्य होकर सरकार ने उस समय बिल को प्रस्तुत नही किया। किन्तु आज पुनः संसद के वर्तमान सत्र में बैंकिंग संशोधन विधेयक के नाम पर बैंकों को पुनः निजिकरण करने की बात कर रही है।
सभा की अध्यक्षता कर रहे साथी वाई के अरोड़ा ने भी बताया कि जनता के धन को चंद पूजीपतियों के हाथों में बिकने नही दिया जायेगा और धन की रक्षा की जायेगी। एन सी बी ई के प्रान्तीय महामंत्री साथी अखिलेश मोहन ने बताया कि भारत सरकार पिछले काफी समय से बैकों को पूंजीपतियों को बेचना चाहती है। अब वह पुनः देश की अर्थव्यवस्था को गति देने के नाम पर अपने कुत्सित प्रयासों को जारी रखे हुए है जिसे सफल नहीं होने दिया जायेगा।
ए आई बी ओ सी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कॉमरेड पवन कुमार ने बताया कि बैंकों के निजीकरण से जनमानस को कोई लाभ होने वाला नही है बल्कि आम जनता निजीकारण के पष्चात वर्तमान में मिल रही सुविधाओं से भी वंचित हो कर त्राहि-त्राहि करने पर मजबूर हो जायेगी।
इसके अतिरिक्त अन्य नेतागण भी उपस्थित थे जिनमें मुख्य रूप से साथी शकील अहमद, दीप कुमार बाजपेई, आर एन शुक्ला, सन्दीप सिंह, ललित श्रीवास्तव, एस के अग्रवाल, एस के संगथानी, राकेश पाण्डे, कमल कुमार, एस के भाटिया, डी पी वर्मा के साथ-साथ अनेक युवा कर्मियों ने भी अपने-अपने विचार रखें।
अंत में निर्णय लिया गया कि यदि सरकार नही मानती है तो यूनियनों को भी अपनी रणनीति में भी बदलाव लाना होगा।