अमित दीक्षित के त्याग की होती रही चर्चा

हरदोई- भाजपा के लिए अपनी शिक्षक की नौकरी को त्यागने वाले अमित दीक्षित शीत गृह के प्रति बेहद संवेदनशील दिखे । उन्होंने जब सरकारी अध्यापक की नौकरी से त्यागपत्र दिया था तब उनका उनके शुभचिंतकों और परिवार वालों ने विरोध भी किया था। इस सब के बावजूद धुन के पक्के अमित दीक्षित ने भाजपा की मजबूती के लिए संगठन से लेकर सड़क तक अपनी अहम भूमिका निभाई।

श्री दीक्षित की त्याग और तपस्या को देखते हुए पार्टी के प्रदेश संगठन ने उन्हें शीत गृह के अध्यक्ष पद पर बिठाया था। आज जब इतिहास में पहली बार शीत गृह की वार्षिक सामान्य निकाय की बैठक हुई तो सहकारिता से जुड़े लोगों की आँखें फटी की फटी रह गई। वहीं पार्टी संगठन के लोग बेहद खुश नजर आए । उनका कहना था कि उन्होंने अपने जिस कार्यकर्ता को शीत गृह का दायित्व सौंपा है वह उसे ऊंचाइयों तक जरूर ले जाएगा।

सहकारिता क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि इस तरह की भव्य बैठक में उन्होंने पहले कभी भी हिस्सा नहीं लिया। फिलहाल श्री दीक्षित की त्याग और तपस्या के चर्चे आज बैठक के बाद सहकारिता से जुड़े लोगों और भाजपा के कार्यकर्ताओं में होते रहे श्री दीक्षित ने शिक्षक की नौकरी छोड़ कर जब अपने भविष्य को दांव पर लगाया था। तब उन्हें केवल एक ही जुनून सवार था कि वह पार्टी के लिए कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार हैं। फिलहाल आज की बैठक के बाद सहकारिता से जुड़े लोग यह कहते हुए देखे गए कि अब शीत गृह के दिन बहुरने वाले हैं वाले हैं।