‘डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला’ में अभारतीय (विदेशज) समध्वनिमूलक शब्द

यहाँ उन शब्दों के शुद्ध वर्तनी और शब्दार्थ दिये गये हैं, जिनका हमारा प्रबुद्ध-वर्ग अपने वाचन और लेखन में प्रयोग करता है। ऐसे शब्दों को हिन्दी ने आत्मसात कर लिया है।

आप उन शब्दों पर ग़ौर करें, जिनके लिखने-बोलने में आंशिक चूक हो जाने पर अर्थ का अनर्थ हो जाता है। यहाँ कुछ ‘समध्वनिमूलक’/’समश्रुत शब्द’/’सम आकर्णित शब्द’ और उनके अर्थ दिये गये हैं।

निम्नांकित अरबी-फ़ारसी के शब्दों में नुक़्त: लगाने और न लगाने से उनकी अर्थ और अवधारणा में कितना अधिक अन्तर आ जाता है, इसे देखें, समझें तथा अनुभव करें :———
शक— सन्देह ; शक़— फटना, विदीर्ण होना
ज़हर (शुद्ध ‘ज़ह्र) — विष ; जहर– ज़ोर की आवाज़
इल्ज़ाम– आरोप; इल्जाम—घोड़े के मुँह में लगाम कसना
हक़– अधिकार ; हक— खुरचना, छीलना
क़ानून– विधि ; कानून– भट्ठी, चूल्हा
ज़लील— अधम ; जलील– महान्
(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद; १३ अक्तूबर, २०१८ ईसवी)