आजादी के सत्तर साल बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित व विकास को तरसता विकासखण्ड कछौना का गाँव

कछौना(हरदोई): आजादी के बाद से बिजली, सड़क, पानी की समस्याएं आज भी बनी हुई हैं। ऐसा ही कुछ हाल है विकासखण्ड कछौना की ग्राम पंचायत गाजू के गाँव गोठवा का जो अपने विकास के लिए मुद्दतों से इंतजार कर रहा है। गांव में आज तक जनप्रतिनिधियों की नजर नहीं पड़ी है। कोई अधिकारी भी इस गांव की तरफ ध्यान नहीं दे रहा है। जिससे इस गाँव की समस्या आजादी के बाद आज भी जस की तस बनी हुई है।

सरकार भले ही गाँव-गाँव में सड़क, पानी व बिजली उपलब्ध करवाने का दावा कर रही है लेकिन वास्तविक स्थिति कुछ और ही है ।

सड़क, बिजली, और पानी ये आमजनमानस की मूलभूत सुविधाओं में शुमार हैं, पर विकासखण्ड कछौना की ग्राम पंचायत का गाँव गोठवा जिसकी आबादी लगभग 2000 है, जहाँ के ग्रामीणों को आज भी इन मूलभूत सुविधाओं की दरकार है। गाँव में बिजली नहीं है जिसके कारण ग्रामीण लोग शाम होते ही रोशनी के लिए तेल और ढिबरी का इंतजाम करने लगते हैं। ग्रामीणों की मानें तो इस गाँव के रहने वाले लोगों की कई पीढ़ी ढिबरी की रौशनी में ही बीत गई है। कई वर्षों से ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के लिए विद्युत विभाग से गुहार लगा रहे हैं किंतु अभी तक गाँव में बिजली नहीं पहुंच सकी है, जिससे यहां के लोगों को कई तरह की दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।

गाँव में अधिकांश गरीब जरूरत मन्द वृद्धजन, विधवा व दिव्यांग-जन पेंशन योजना से वंचित हैं, कई बार आवेदन के बावजूद पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है ।

गाँव के ही दिव्यांग परमेश्वर ने बताया कि वह व उनके दो पुत्र दिव्यांग हैं, उनकी पत्नी गोबर के कंडे बनाकर उन्हीं से घर की जीविका चलाती है, सरकार से उन्हें किसी प्रकार की कोई सहायता पेंशन आदि नहीं मिल रही हैं ।

गाँव में गरीबी का आलम तो यहां तक है कि अधिकतर आबादी छप्पर व तिरपाल के नीचे जीवन-यापन कर रही है । इस गाँव में अभी तक प्रधानमंत्री आवास योजना के  अंतर्गत लाभार्थियों की सूची भी नहीं बनाई गई है।

गाँव में साफ सफाई व शुद्ध पेयजल के प्रति जिम्मेदार गंभीर नहीं हैं। समूचा गांव जहां गंदगी से कराह रहा है, वहीं मरम्मत के अभाव में सरकारी नल बदहाल हैं व नालियाँ टूटी हुई हैं । गाँव में वर्षों से नालियों की सफाई नहीं हुई है, कौन सफाई कर्मी तैनात किसी को मालूम नहीं है। ऐसे में गाँव की स्थिति कैसी होगी, इसका अंदाजा सहजता से लगाया जा सकता है। ग्रामीण नौशाद का कहना है कि नालियों की सफाई न होने से पूरा गांव गंदगी से कराह रहा है।

मो. नफीस का कहना है कि गांव में साफ सफाई के लिए कोई ध्यान देने वाला नहीं हैं। नालियां गंदगी से पट चुकी है। इसका पानी सड़क पर आने से लोगों को उसी में चलने की मजबूरी है।

ग्रामीण सुरेश शर्मा ने बताया कि गाँव को जाने वाला मुख्य मार्ग गड्ढायुक्त है जिस पर आये दिन कोई न कोई ग्रामीण व राहगीर चोटिल होता रहता है ।

ग्रामीण दीपू ने बताया कि गाँव के जल निकास का मुख्य स्त्रोत गाँव का तालाब था जो अब पूरी तरह समतल हो चुका है, जिसके कारण सड़क पर जलभराव हो जाता है ।

ग्रामीणों ने बताया कि तालाब को खुदवाने के लिए वे ग्राम पंचायत के प्रधान को कई बार बता चुके हैं पर प्रधान इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है ।

ग्रामीण अनुज अस्थाना ने बताया कि क्षेत्र के सांसद और विधायक भाजपा के हैं। राज्य और केंद्र में भाजपा की सरकार है, उसके बावजूद गाँव की स्थिति बहुत ही दयनीय है ।

ग्रामीणों के अनुसार मूलभूत सुविधाओं से वंचित इस गाँव में व्याप्त पेयजल, सड़क और बिजली की समस्या से ग्रामीणों को निजात दिलाने न तो प्रशासनिक अधिकारियों और न ही जनप्रतिनिधियों ने सुध ली, जिससे गांव का विकास ठहरा हुआ है और मूलभूत संसाधनों के अभावों के बीच जीवन गुजारने को इस गाँव के निवासी मजबूर हैं।


जनप्रतिनिधि की उदासीनता


ग्रामीणों के अनुसार ग्राम प्रधान गाँव के विकास को लेकर उदासीन है । ग्रामीणों का कहना है कि निवर्तमान प्रधान संजय ने चुनाव पूर्व यहाँ के ग्रामीणों से विकास के कई वादे किए थे  किन्तु निर्वाचित होने के बाद वह अपने सभी वादों को भूलकर  दोबारा गांव में कदम रखना भी जरुरी नहीं समझ रहे हैं।

इसके साथ ह़ी विधायक के प्रत्याशी भी चुनाव से पूर्व यहां के ग्रामीणों को लुभावने सपने दिखाकर वोट मागते हैं किंतु चुनाव जीतने के बाद उनके द्वारा कोई खोज खबर नहीं ली जाती है। इस तरह की वादा खिलाफी से ग्रामीणों में जनप्रतिनिधियों व सरकार के प्रति काफी आक्रोश है जो कभी भी भयानक रूप ले सकता है ।

ग्राम वासियों ने गाँव की इस दयनीय स्थिति व विकास कार्य हेतु जिलाधिकारी व उपजिलाधिकारी को पत्र द्वारा अवगत कराया है।


आजादी के सात दशक बीत जाने के बावजूद आज भी सड़क, बिजली, पानी की समस्याएं मुंह चिढ़ा रही हैं


वह देश जिसकी 70% आबादी गाँवों में बसती है उस देश की नींव आज भी कितनी कमजोर है उसका अंदाजा इस गाँव गोठवा की वर्तमान स्थिति से लगाया जा सकता है।


रिपोर्ट- पी०डी०गुप्ता