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‘अवसरवादिता’ का सजीव उदाहरण प्रस्तुत करते लोग

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

सचमुच, वे लोग अतिशय कृतघ्न हैं, जो ‘रोमन कैलेण्डर’ के तिथि, दिन तथा वर्ष के अनुसार ही ‘जीवन’ और ‘मरण’ के सभी कृत्य निष्पादित-सम्पादित करते-कराते हैं और जैसे ही ‘अवसर’ पाते हैं, उनका ‘हिन्दू-संस्कृति’ का संकीर्ण आधार बनाकर, ‘आश्चर्यजनक’ ढंग से खण्डन-मण्डन करने लगते हैं। ऐसे लोग समाज के लिए अत्यधिक घातक सिद्ध होते हैं। ‘कुत्सित’ अवसरवादिता आचरण की सभ्यता को कलंकित करती है। अत: ऐसे लोग से अनुरोध है, ‘मनुष्यता’ को उतार न फेंकें।

ऐसे लोग में साहस हो तो उत्तर दें :–
१- अपना और अपनी सन्तति की जन्मतिथि ‘रोमन कैलेण्डर’ के अनुसार क्यों आयोजित करते हैं?
२- अपनी अवस्था उक्त कैलेण्डर के आधार पर क्यों बताते हैं?
३- अमांगलिक-मांगलिक कर्म करने की तिथि उक्त कैलेण्डर के आधार पर निर्धारित क्यों करते हैं?
४- उक्त कैलेण्डर के आधार पर अपनी सन्तति का प्रवेश शिक्षण-संस्थानों में क्यों कराते हैं?
५- उक्त कैलेण्डर के आधार पर नियुक्ति और सेवानिवृत्तिपत्र क्यों ग्रहण करते हैं?
६- मरणकाल में शोकपत्र में उक्त कैलेण्डर का आश्रय क्यों लेते हैं?

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १ जनवरी, २०२१ ईसवी।)