ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या जीवो ब्रह्मैव नापरः

July 6, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– सूर्य की प्रथम किरण हिमालय की पर्वत-श्रृंखलाओं को स्वर्णिम आभा से आलोकित कर रही थी। पहाड़ों के बीच स्थित एक छोटा-सा गाँव शिवपुर अपनी सहज सरलता और प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए […]

सीता : ऋषियों के मध्य धर्म की अधिष्ठात्री

July 3, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– चित्रकूट में समय धीरे-धीरे बीत रहा था। अब वन के ऋषियों ने यह अनुभव करना प्रारम्भ कर दिया था कि श्रीराम के साथ केवल एक राजकुमार और एक राजकुलवधू नहीं आई […]

धर्म की रक्षा के लिए दण्ड भी आवश्यक : सीता

July 2, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वन का विस्तार जितना सुंदर था, उतना ही भयावह भी। एक दिन प्रातःकाल सीता आश्रम से कुछ दूर वनौषधियाँ एकत्र करने निकलीं। उनके साथ कुछ ऋषि-पत्नियाँ भी थीं। मार्ग में उन्हें […]

और मेरा सत्य राम हैं

June 21, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– सुमन्त्र मौन थे। वन की निस्तब्धता और भी गहन होती जा रही थी। वृक्षों की छाया मानो स्वयं इस संवाद को सुनने के लिए ठहर गई थी। मंद पवन बह रही […]

सीता और सुमन्त्र संवाद

June 11, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वन की ओर जाने वाले उस मार्ग पर सूर्य अस्ताचल की ओर झुक रहा था। रथ के पहियों से उठती धूल मानो अयोध्या की स्मृतियों को अपने साथ लिए चली जा […]

प्रेम मे अधिकार नहीँ तो वियोग मे कष्ट क्योँ

June 10, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रात्रि उतर आई थी। आकाश में असंख्य तारिकाएँ जगमगा रही थीं। मंदाकिनी का जल अब चाँदी-सा चमक रहा था। दूर कहीं किसी पक्षी की करुण पुकार सुनाई दी और फिर समूचा […]

धर्म, सत्य और तर्क की महागाथा

June 9, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– अयोध्या नगरी उत्सवों से सजी रहती थी। महाराज दशरथ के राज्य में प्रजा सुखी थी। चारों राजकुमार राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न राज्य का प्राण थे। उनमें भी श्रीराम सबसे प्रिय […]

God’s descent and the restoration of virtue

May 16, 2026 0

Dr. Raghavendra Kumar Raghav– In a time long forgotten, there existed a land where the seeds of righteousness were sown deep within the hearts of its people. Religion flourished and its guiding principles of compassion, […]

शिवत्व की यात्रा : न मे मृत्युशंका न मे जातिभेदः

April 22, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– आश्रम में संध्या उतर चुकी थी। वटवृक्ष के नीचे बैठे सुधांशु की आँखें बंद थीं। आचार्य के शब्द उसके भीतर मर्मस्थान को वेध रहे थे। वास्तव मे ये विचार अब परिपक्व […]

प्रेरक कहानियाँ : शिवत्व की यात्रा मे पढ़ें मानसिक शत्रुओं का विरेचन और शान्ति की अनुभूति

April 4, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– संध्या का समय था। सूर्य धीरे-धीरे पश्चिम के क्षितिज में विलीन हो रहा था और आकाश में हल्की सुनहरी आभा फैल रही थी। हवेली के प्रांगण में एक विचित्र शान्ति थी, […]

शिवत्व की यात्रा : रहस्यमयी संन्यासी और पहली कसौटी

March 30, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रात का सन्नाटा गहरा था। आकाश में बादल छाये हुए थे और चन्द्रमा कभी-कभी उनके बीच से झाँक जाता था। सुधांशु के घर के आँगन में दीपक की लौ हल्की-हल्की काँप […]

शिवत्व की यात्रा : परीक्षा का आरम्भ

March 26, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– भोर का समय था। पूर्व दिशा में सूर्य की हल्की आभा प्रकट होने लगी थी। आश्रम के चारों ओर फैली निस्तब्धता धीरे-धीरे पक्षियों के कलरव से टूट रही थी। वृक्षों की […]

शिवत्व की यात्रा : रहस्य का पुनः उदय और गुरु की दृष्टि

March 22, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वसंत का प्रारम्भ हो चुका था। आम के वृक्षों पर कोमल बौर आ गया था और हवा में एक मदमस्त सुगन्ध फैलने लगी थी। जीवन में जैसे एक हल्का-सा उल्लास लौट […]

शिवत्व की यात्रा : सम्बन्धों की कसौटी मे धर्म की पहली परीक्षा

March 20, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शीत ऋतु का प्रारम्भ था। प्रातःकाल की धूप अभी कोमल थी और हवा में हल्की ठंडक थी। निरंजन अपने घर के बाहर बैठा था। सामने आँगन में तुलसी के चौरे पर […]

शिवत्व की यात्रा : साधना की गुप्त परम्परा

March 16, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– उस रहस्यमयी अतिथि के जाने के बाद कई दिनों तक निरंजन के भीतर एक अजीब जिज्ञासा बनी रही। वह व्यक्ति कौन था? उसका उद्देश्य क्या था? और उसे कैसे पता था […]

शिवत्व की यात्रा : साधना का दर्पण

March 14, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शरद की एक गहरी रात्रि थी। आकाश में बादल छाए हुए थे और हवा में एक विचित्र नमी थी। घर के बाहर पीपल के पत्तों की हल्की सरसराहट सुनाई दे रही […]

शिवत्व की यात्रा : गृहस्थाश्रम का यज्ञ

March 10, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव— समय धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था। निरंजन का जीवन अब आश्रम की एकांत साधना से निकलकर गृहस्थ जीवन की जटिलताओं में प्रवाहित हो चुका था। उसका घर छोटा था, जीवन साधारण […]

शिवत्व की यात्रा का दार्शनिक स्वरूप : समाधि से समाज तक

March 4, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रभात का समय था। आश्रम में सामान्य दिनचर्या प्रारम्भ हो चुकी थी—गौशाला में सेवा, रसोई में धूप की सुगन्ध, प्रार्थना का मधुर गान। परन्तु निरंजन के भीतर कुछ असामान्य था। समाधि […]

शिवत्व की यात्रा : समाधि की देहरी

March 3, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शरद की स्वच्छ रात्रि थी। आकाश निर्मल, तारकाओं से भरा हुआ, मानो अनन्त का प्रत्यक्ष साक्षात्कार हो रहा हो। आश्रम के उत्तर दिशा में स्थित उस प्राचीन पीपल वृक्ष के नीचे […]

शिवत्व की यात्रा मे मर्यादा, प्रेम और त्याग का अग्निसंस्कार

February 26, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– आश्रम में उस दिन एक गंभीरता थी। प्रभात की वायु में भी जैसे कोई गूढ़ संकेत था। निरंजन शिवालय के सामने बैठा था, पर आज उसका ध्यान स्थिर नहीं था। उसके […]

शिवत्व की यात्रा का एक और चरण : आसक्ति से मुक्ति

February 23, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रभात का समय था। आश्रम के पीछे बहने वाली छोटी नदी के तट पर निरंजन अकेला बैठा था। जल का प्रवाह शांत था, परन्तु उसके भीतर निरन्तर गति थी। वह उसी […]