शब्दशक्ति की विडम्बना
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••• मनुष्य ‘मनुष्यता’ की बात तो करता है; किन्तु अपने भीतर की शुष्क मानवीय संवेदना पर दृष्टिपात करने मे क्षम (‘सक्षम’ अशुद्ध है।) नहीँ रहता। यही कारण है कि उसके उपदेश […]