जीवंत जीवन
बढ़ गए जीवन में तोउड़ते रहोगेजीवंत पक्षी की तरह।नहीं तो टूट करबिखर जाओगेकिसी शाख केमुरझाये पत्ते की तरह। जीवंत हो तोजीना पड़ेगासूर्य चांद की तरह।नहीं तो पड़े रहोगेश्मशान कीजली-बुझी हुईराख की तरह। जीवंत हो तोमहकते […]
बढ़ गए जीवन में तोउड़ते रहोगेजीवंत पक्षी की तरह।नहीं तो टूट करबिखर जाओगेकिसी शाख केमुरझाये पत्ते की तरह। जीवंत हो तोजीना पड़ेगासूर्य चांद की तरह।नहीं तो पड़े रहोगेश्मशान कीजली-बुझी हुईराख की तरह। जीवंत हो तोमहकते […]
एक दौर आएगा मेराएक शोर आएगा मेरा। समझते थे जो मुझेऔरों से भी कमजोरइतिहास-ऐ-पन्नों परअब नाम आएगा मेरा। एक वक्त थाकि लोग ना जानते थेना ही पहचानाते थेपर वक़्त के हर पनें परअब नाम आएगा […]
कहु सजनी , अब कहँ – कहँ खोजूँ,तन – मन को विश्राम ।जहँ – जहँ जाउं, तहाँ – तहँ भटकन,हारे को हरिनाम ।।राम, कहँ पावै मन विश्राम ।। भाषा मौन , मौन परिभाषा युक्त,हो चला […]
सुनो!दीपों का त्यौहार आ रहा हैकुछ रोशनीअपने अंदर भी कर लेना। सुना है !अंधकार बहुत हैतुम्हारे अंदर भीतभी दिखता नहीं तुम्हेंऔरों का व्यक्तित्व । मगर दिख जाता हैसत्य की रोशनी मेंऔरों को तुम्हारा अहम। क्या […]
Aditya Tripathi (Assistant Teacher, Hardoi) The young man named Peeyush stood in front of the crowd, his heart pounding in his chest. He had been practicing his speech for weeks, but now that the moment […]
Aditya Tripathi (Assistant Teacher, Basic Shiksha, Hardoi) In a time long forgotten, there existed a land where the seeds of righteousness were sown deep within the hearts of its people. Religion flourished, and its guiding […]
Aditya Tripathi (Asst. Teacher, Basic Education, Kothawan, Hardoi) Once upon a time, in a land brimming with dreams and aspirations, there dwelled a young man named Lakhan. His heart was ignited by a fierce ambition, […]
Aditya Tripathi (Govt. Teacher, Kothawan, Hardoi) Once upon a time, in a diverse land filled with people of different cultures and beliefs, there was a village nestled amidst rolling hills and lush green fields. The […]
Aditya Tripathi (Asst. Teacher, B.E.D., Hardoi) Once upon a time in a small village Balamau, there lived a young boy named Peeyush. He came from a humble background, but he had big dreams. Peeyush understood the […]
सड़क दुर्घटना से अगर है बचनातो हमेशा हेलमेट पहने रखना।लापरवाही से वाहन ना चलाएंअपना व परिवार का जीवन बचाएं।हेलमेट को लगाएंअपना जीवन बचाएं।सड़क सुरक्षा का ज्ञानमिलता है जीवन दान।मत करो वाहन चलाते हुए मस्तीजिंदगी नहीं […]
हम ढूढ़ते रह गएउनको हर निग़ाह में,पर वो तो खो ही गएओर किसी की बाहों में। हम ने तो हमेशा उनसेइक़रार ही किया थापर वो ही हर बारइन्कार ही करते रह गए। हमने तो खो […]
भोजपुरिया लिक्खाड़ लोगवा! एही क कहल जाला भोजपुरी ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ए चचिया! तोरा क उठि-बइठि आ सूति-जागि के उठक-बइठक करत परनाम करत बानी। आछा त, तू खाँड़ी-चूकी ना हउ, सोगहगवे बाड़ू। आपना […]
जो रावण है मन के भीतर कैसे उसे जलाएँ? इस बहुरंगी दुनिया मे अपना किसे बताएँ? जो रावण है मन के भीतर कैसे उसे जलाएँ? सबके मन मे बसे राक्षस सत्य और शुचिता गायब है। […]
Blame game players, always pointing fingers, Never taking responsibility, their hearts like cringers. They divide families, spread discord and strife, Their toxic presence, a thorn in life. Beware these sleeve snakes, for they bite the […]
आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–कुछ कहने पे ज़बाँ, साथ देती ही नहीं,आँखें भी मुँह फेर लेती हैं, चुप रहने पे।दो–वे जब भी मिले, आँखें बदल-बदल कर,न कहीं इंकार मिला, न कहीं इक़्रार दिखा।तीन–उनके इस्रार का […]
राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’– इस भौतिक संसार में सब कुछ है बेकार। जिसने जगदम्बा को याद किया उसका बेड़ा पार। ये सारा ब्रह्माण्ड ही माँ दुर्गा का विस्तार। माँ को जिसका साथ मिला उसका हुआ […]
Aditya Tripathi (Assistant Teacher, PS, Pratappur, Kothawan) A long time ago in a peaceful village lived a devout sage named Jaidev Baba. He was known far and wide for his unwavering devotion to Lord Rama. […]
वादे किए थे हजारों ,एक पल में तोड़ गया।वह प्यार था हमाराजो हमें छोड़ गया।भूले नहीं जाते वह लम्हेजो उसके साथ बिताए थे ।याद आती है उसकी वह बातें कसमें खाकर जो उसने मुझे कही […]
रक्त रंजित यह धरा किसके कहे उसकी हुई? ख़ून की हर बूँद न इसकी हुई न उसकी हुई। मर गए जो, वो भी इंसान थे, मारने वाले जिन्हें ज़रा से, मुठ्टीभर शैतान थे। यह संघर्ष […]
Poem—. I sing the songs of pain I tune my instrument with sorrow’s rain. The pain inflicted by our own. I bring pain in songs, well known. I sing the songs of pain. Composed by– […]
In love’s embrace, we falter and sway, A puzzle of emotions, we struggle to convey. Love’s true essence, elusive and deep, A symphony of secrets, where our hearts keep. I cherish you more than words […]
Our parents, deities we cherish and adore, Their legacy unbroken, forevermore. With each passing day, our devotion grows deep, Their wisdom’s guidance, our hearts it keeps. Though humble their form, their vision so grand, They […]
हाँ मैं एक लडक़ी हूँहाँ मैं वो ही लडक़ी हूँजो अपनी हो तोचार दीवारी में कैद रखतें हो।किसी ओर की हो तोचार दीवारी में भीनज़रे गड़ाए रखतें हों। हाँ मैं एक लडक़ी हूँहाँ मैं वो […]
Raghavendra Kumar ‘Raghav’— Speaking the truth, courage immense, Fighting for justice, resilience. For two months, hunger and thirst withstood, Courage to give his life, grand, good. Apart from those who begged for rights, Isolated from […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• वन्दन! विरूप सर्जन? तेरा बार-बार अभिनन्दन। वन्दन! काया-स्यन्दन१? तेरा बार-बार अभिनन्दन। वन्दन! नेत्रहीन-अंजन? तेरा बार-बार अभिनन्दन। वन्दन! उधार का मंजन? तेरा बार-बार अभिनन्दन। वन्दन! विद्रूप रंजन? तेरा बार-बार अभिनन्दन। वन्दन! […]
Raghavendra Kumar ‘Raghav’— Rana Punja Bhil, a name etched in the annals of history, was not just a warrior but a symbol of unwavering courage and determination. Hailing from the Bhil tribe of Mewar, he […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• साहिब!देखते-ही-देखते,‘इण्डिया’ प्रौढ़ हो गया।उसकी जड़ें भी,कश्मीर से कन्याकुमारी तक फैल चुकी हैं;सागर की गहराई-सा गाम्भीर्य है;उसके तने,आकाश की ऊँचाई-से शिखरस्थ हैं।आस-पास का माहौल :–बिगड़ा-बिगड़ा,उद्दण्ड-उद्धत, जंगली-सा दिखता है।ज़ह्रीले साँप भी फन […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–जीवन जड़वत् दिख रहा, बहे नेत्रजल धीर।जोड़ो मन को क्रान्ति से, शब्द बना लो तीर।।दो–बलखाती इठला रही, सरिता संंचय नीर।आँगन बैठी धूप है, आकुल हुआ शरीर।।तीन–मृग-मरीचिका चाह है, मन-गति दिखता […]
कविता……कितने क्यों मौन होक्या आती नही अभिव्यक्ति ?या फिर जाती नहीअब भी अहम भक्ति ? छोड़ दो न छंदों अलंकारों कोकम से कम करो नआत्म अभिव्यक्ति।या फिर जाती नहींअब भी शकी अभिव्यक्ति ? हिंदू हिंदुस्तान […]
भारतेन्दु हरिश्चन्द की जन्मतिथि (९ सितम्बर) के अवसर पर ‘सर्जनपीठ’ का सारस्वत आयोजन ९ सितम्बर को भारतवासियों की नवोदित आकांक्षा और राष्ट्रीयता के प्रतीक ‘भारतेन्दु हरिश्चन्द की जन्मतिथि’ के अवसर पर ‘सर्जनपीठ’, प्रयागराज की ओर […]
थक कर बैठ गया हूँथोड़े विराम के लिएमगर सोच मत लेनाकि मैं जीवन से हार गया हूँ। बदलते रहते हैंजीवन के पड़ावमगर सोच मत लेनामैं दूसरों के सहारे हो गया हूँ। बदलते हुए जमाने के […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• रूप ने कला से कहा :–तेरा दृष्टि-अनुलेपन है अनुपम,तू रूप को सुरूप करती है।विरूप को कुरूप रचती हैतू सुरूप को विद्रूप बनाती है।तू रंग-रोगन करती हैऔर उकेरी गयी व्यथा-कथा को,एक […]
लक्ष्य को प्राप्त करने मैं चली सूरज को पकड़ने चलीहर मुश्किलों को पार करके ,आज उन्मुक्त गगन में उड़ने मैं चली | सबकी मुझसे अनंत इच्छाएंँ हैं ,एकाग्र चित्त होकर ,सबके सपनों को साकार करने […]
हाशिया बनाकर खुद खैर बनकर पूछनाखुश्क सा होकर खस्ता करनादेह स्वतंत्र सी लगेऔर मन को कहीं कफस ने जकड़ा।लफ्ज़ खामोश हो गएमानो गहरी निद्रा में सो गएगुमनाम सा कुछ हो रहा थाबवंडरों में अब खो […]
हजारों तंत्र हो मुझ मेंहजारों मंत्र हो मुझ मेंमैं फिर भी लीन रहू तुझ में।न ज्ञान का अहंकार हो मुझ मेंन आज्ञान का भंडार हो मुझ मेंमैं फिर भी लीन रहू तुझ में।योग का भंडार […]
दिल मानने को तैयार नहीं , मैं अकेला हूंँ |चलते चले जाना है , किसी का अब इंतजार नहीं ,दिल को समझाऊंँ कैसे ?दिल मानने को तैयार नहीं , मैं अकेला हूंँ | जीना तो […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–कई अनकहे पल, फुसफुसाते हैं कानो मे;बिनब्याही बातों का, हिसाब हम नहीं करते।दो–तू उसे भूलने की बात, हर बार क्यों करता है;वह तो कभी याद आने की बात करता ही […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–गगरी अधजल दिख रही, छलक रहा है बोध।चिन्तन चला वितान ले, मानसपथ अवरोध।।दो–मरा-मरा ही तत्त्व है, तत्त्व राम से हीन।तत्त्वज्ञान राहित्य है, पापपंक मे लीन।।तीन–वीतराग मन कह रहा, जीवन है […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••एक–पाप पुण्य से कह रहा, मेरा देख प्रताप।लोक मुझे ही पालता, पर तू पाता ताप।।दो–जीवन-जंगल जल रहा, जलता नहीं प्रमाद।सत्य वचन है जान लो, यहाँ-वहाँ उन्माद।।तीन–एक घड़ी-आधी घड़ी, चिन्तन हो […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय •••••••••••••••••••••••••••••••••••••••एक–मद मे अन्धा दिख रहा, बोली बोल कुबोल।काल विहँसता कह रहा, विष को मत तू घोल।।दो–युगबोध से शून्य है, मत कर तू! अभिमान।आयेगी कब गति-कुगति, नहीं किसी को भान।।तीन–दम्भ पालता […]
देख बुराई अपने अंदरइसे मरना ही चाहिए,जीवन में फैला अंधेरामिटना ही चाहिए।यह दीपक है,इसे जलना ही चाहिए।लगी विचारों मे वर्षो की दीमकइसे हटना ही चाहिए,विरासत में पाया रूढ़िवादिता और अंधविश्वास।इसे जलना ही चाहिए।यह दीपक है,इसे […]
गिर रही है नये जो आसमा से तड़पती बूंदेकभी तुम इनसेमज़ा लेते होतो कभी ये डूबकरतुम्हारे अस्तित्व का मज़ा लेती है। बह रही हैं न ये नदियाँकभी खुद बहती हैअपनी ही मस्ती मेंतो कभी तूफ़ान […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ऐ कलियुगी धृतराष्ट्र!तुमने अपनी प्रजा को छला;मात्र सत्तासुख की ख़ातिरतुमने लक्ष्मणरेखा पार की।तुझे अपनो से मोह ने,‘अपनो’ से दूर कर दिया।जिन पर तुझे गुमान है,वे भी एक-एक करचीलर लगी बण्डी […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय तुमने जो बीज बोया है,उसका पौध तो नहीं देख पायेगा;पर लोग उस फल को चखते हीधिक्कारेंगे तुझे।तुमने दिये क्या :―झूठ, अविश्वास, वैमनस्य?तुमने हमारे राष्ट्र को छला है;एक बार नहीं, सौ […]
मेरी माटी, मेरा देश ।सारे जग से न्यारा देश ।सब देशों में, डंका बजता ।प्रजातन्त्र है, प्यारा देश ।। पर्वतराज हिमालय प्रहरी ।गंगा, यमुना, सरयू गहरी ।झेलम, कृष्णा अरु कावेरी ।अमृत जल से सींचे खेत […]
आरती जायसवालकथाकार, समीक्षक मातृभूमि ‘भारत महान’सदैव हमको अभिमान रहे!वीरों की,देवों की धरती ,होंठों पे सदा गुणगान रहे!सर्वधर्म समभाव रहें,एक दूजे का सम्मान रहे!स्वतंत्रता पर गर्व करें,वीरों का अमर बलिदान रहे!हर घर में तिरंगा लहराएं,‘हर दिल […]
किस्मत का नाम देना क्या सही है?मर्जियां सब अपनीऔर नाम किस्मत कावक्त तो देखते ही नहींकि ज़माना कहां हैकिताबें वो लेख कुछ अधूरे से हैंजहां समानता की बात है।खुद के फैंसलेखुद के सवालखुद ही गवाहऔर […]
वादे किए थे हजारों,एक पल में तोड़ गया।वह प्यार था हमाराजो हमें छोड़ गया।भूले नहीं जाते वह लम्हेजो उसके साथ बिताए थे।याद आती है उसकी वह बातें कसमें खाकर जो उसने मुझे कही थी।जिसने पसंद […]
सुन कर मोहब्बत केअधूरे किस्से सहम जाती हैआम सी लड़की। अजनबी लोगों को देखघबराकर छुप जाती हैआम सी लड़की। माँ के आंचल को,पापा के कंदे कोअपनी ढाल समझती हैंआम सी लड़की। इश्क़ तो दूरउसके नाम […]
पेड़ लगाओ, पेड़ लगाओ।इस जीवन को,नष्ट होने से बचाओ ।पेड़़ है हमारीसांसो का उपहारइन्हें बचाना हैहमारा आधार ।पेड़़- पेड़ से बना,हैं जंगलइस जंगल में होता है,जानवरों में दंगल ।पेड़ लगाओ पेड़़ लगाओ।इस जीवन कोनष्ट होने […]
मानव व सभी जीवों के हित में सोचो !मानव सर्वोपरि है। नियमों का उल्लंघन करना,अपने नियम बनाकरदूसरों के ऊपर जबरदस्ती थोंपना,कहांँ का न्याय है ? ए ! चेतना ! की अदालत है ,न तो अंँधी […]
आरती जायसवाल (कथाकार, समीक्षक) सांप्रदायिकता की आग तेज हुईफिर लपटें उठीं,धू -धू कर जली मानवता,फिर हो गया सामान्य जन-जीवन अस्त -व्यस्त और त्रासदी पूर्णकुछ स्थानों परचीत्कार कर उठा ‘अधर्म’चिंघाड़ता हुआ लेने को ‘नरबलि’मृत देहों के […]
बीते हुए वक्त कभी लौट आनामुझे फिर सेहंसना खिलखिलाना है। बीते हुए वक्त कभी लौट आनामुझे फिर सेमस्ती भरे लम्हों को जीना है। बीते हुए वक्त कभी लौट आनामुझे फिरथक हारकर मां की गोद में […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय बज़्मे नशात१ की यह शान है कोठा,दौलत औ’ हुस्न का ईमान है कोठा।यों ही नहीं बनती रक़्क़ास२ जान लीजिए,लाचारी औ’ मज़्बूरी का नाम है कोठा।तवाइफ़ का जिस्म है रंगीनिये-शबाब,रंगीनिए हयात३ […]
है सावन आया, नई उमंगे लायाभूल कर सारे गिले सिकवेमौसम ने प्रकृति पर प्यार बरसाया हैमुरझा गए थे कभी चेहरेउलझ गए थे कभी वास्तेखिला कर चेहरे, सुलझा कर वास्तेसावन कुछ ऐसा झूम कर आया है,मौसम […]
Raghavendra Kumar Tripathi ‘Raghav’– In the land of India, a soul did rise, A young rebel with fire in his eyes. Chandrashekhar Azad was his name, But ‘Azad’ his spirit, forever aflame. Against the British, […]
◆ आत्मानुरोध― इस सर्जन मे कहीं भी किसी प्रकार की अशुद्धि-अनुपयुक्ति लक्षित हो तो सकारण संशोधित करें। ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–डाली कहती डाल से, कस लो मुझको आज।पेड़ सिसकता सोचता, गिरे न उनपर […]
आज ज़माना भी गज़ब ढा रहा हैमोबाइल तक ख़ुद को सीमित कर रहा हैघर में चार लोग, बैठे चार किनारेएक दूसरे को देखे भी ना..और चैट पर पूछ रहे इक दूजे का हाल,वक्त नहीं है […]
My special Poem— The Practicality of Knowledge, Devotion and Action in Hinduism Poem by Raghavendra Kumar Raghav —-Raghavendra Kumar In the realm of Hindu thought, behold,Three pillars stand, their wisdom untold.Knowledge, devotion, and action’s might,Guiding […]
कहते हैं जोतुम न कर पाओगेवही तो अबकरने की ठानी है।गिरी हूंमगर हारी नहीं,टूटी हूंमगर बिखरी नहीं,थकी हूंमगर हिम्मत हारी नहीं,राह में मुश्किलेंहजारों हैंमगर जो कि नहींथकी हूंमगर जीवन से हारी नहीं। तृषा चौधरीकांगड़ा, हिमाचल […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–टूट रहे तटबन्ध हैं, जल का हाहाकार।प्रलय आँख मे नाचता, लिये मृत्यु आकार।।दो–चाहत पूरी कर रहा, ले निर्मम-सा रूप।जनता मरती देश मे, कितना निर्मम भूप।।तीन–हा धिक्-हा धिक्! कर रहा, क्रन्दन […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–लाश तैरती हर तरफ़, शोक कर रहा ‘शोक’।जीवन बहता जा रहा, कोई रोक-न-टोक।।दो–परे शोक-संवेदना, मृत्यु करे आखेट।शासन निर्दय दिख रहा, आते लोग चपेट।।तीन–नेता कैसे देश मे, करते केवल भोग।मतलब केवल […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–जीवन जलमय हो रहा, शासन है बेहोश।गरदन दाबे मौत है, जन-जन मे है रोष।।दो–सेना पथ पर दिख रही, नेता सब हैं मौन।फफक रहे हैं लोग सब, आँसू पोंछे कौन?तीन–गोरक्षक भूमिगत […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–त्राहि-त्राहि जन कर रहे, मुखिया उड़ा विदेश।संकट मे जन-धन यहाँ, मुखिया बदला वेश।।दो–जल बढ़ता हर पल यहाँ, कोई नहीं हवाल।आशा पल-पल पल रही, कोई नहीं वबाल१।।तीन–इंच-इंच पानी बढ़े, आँखभरा है […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–हर-हर, हर-हर हो रहा, ठहर गया है देश।जलधारा उछाल लिये, प्रश्न कर रही पेश।।दो–ताला जड़ा ज़बान पे, निर्दयता हर ओर।जनता करती त्राहि है, भय का ओर न छोर।।तीन–क्रन्दन-सिसकी हर तरफ़़, […]
हृदय को देती शक्ति, भक्ति और विश्वास,मन को देती स्थिरता, निडरता और उल्लास,भटकन दूर करे दिल की, दिलाए असीम का एहसास।देह को बनाए चुस्त, दुरुस्त और तंदुरुस्त,मन को बनाए शांत, सौम्य और संयमी,चलना जिस पर […]
मैंने हार मान ली, पर मेरे मां-बाप ने नहीं मानी लोग जो मर्जी कहें पर, मेरे मां-बाप मेरी हर मुश्किल में साथ हैं। पापा ने चलना सिखाया, मां ने हंसना सिखाया, मेरे मां-बाप ने मुझे […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मस्त तराने गा-गा झूमे, कहनी कहती कुर्सी है, नाच-नचाती दुनिया को है, धुन मे रहती कुर्सी है। भाव उसका हरदम ऊपर, क्रय-विक्रय का खेल यहाँ, जेब दिखा हो जिसका भारी, […]
पूरे है वो लोग क्या ?जो अधूरी सी बातें करते हैंसमझदार है वो लोग क्या ?जो समझदार होने केबावजूद भी नासमझी सी करते हैं।शिक्षित है वो लोग क्या?जो अशिक्षितओं की तरहव्यवहार करते हैं।कामयाब है वो […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय बेशक,तुम्हारे चिन्तन चुराये हुए हैं।तुम्हारे विचार दिल्ली के आज़ाद मार्केट सेकिलो के भाव लाये हुए कपड़ों-जैसे हैं।किसी कोठे के किराये की कोख से जन्मेवा फिर परखनली में उपजे,तुम्हारे वे शब्द […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–जीवन-मरण समान है, दोनो की गति एक।क्षमता जितनी हो सके, कर्म करो सब नेक।।दो–जन्म लिये किस-हेतु हो, ध्येय नहीं है भान?जीवन अति अनमोल है, करना इसका मान।।तीन–आह-जुड़ी संवेदना, कातर दृष्टि-प्रधान।जन्म-मृत्यु […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–मेघदूत की नायिका, चितवन चारों ओर।उमड़-घुमड़ संदेश कह, गरज पड़े घनघोर।।दो–करवट बादल ले रहे, बिजली तड़के घोर।कनखी बरखा मारती, वन-वन नाचे मोर।।तीन–दादुर तत्पर मे दिखें, अवसर करते बात।ताल-तलैया जब भरें, […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कल मुझसे,मेरी पीठ मिली थी।खोयी-खोयी-सी;रोयी-रोयी-सी;बेचैन निगाहों से,सन्नाटे को बुनती हुई।पूछना धर्म था; पूछ ही डाला :–कहो! कैसी हो?उसका दृष्टि-अनुलेपनमेरे वुजूद को घायल करता रहा।वह ताड़ती रह गयी,मेरे दु:ख-सुख की प्रतीति […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••• मै भारत का लोकतन्त्र हूँ,जिह्वा बनकर रह गया हूँ।मुझे,उबड़-खाबड़, बदबूदार दाँतों नेअपने पहरे मे बैठा रखा है।बायें सरकता हूँ तो संकट;दायें मचलता हूँ तो ख़तरा;ऊपर लपकता हूँ तो आफ़त;नीचे लर्ज़ता […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय अब मरघट से धुँआ नहीं निकलताचिट्-चिट् कर चिनगारी फेंकती आवाज़अब बेज़बाँ हो चुकी है।धरती अपने सीने मेराज़ दफ़्न करते-करते अशक्त हो चली है।उसे मालूम है,निस्सहाय हताहतों की संख्या।अपने और नितान्त […]
नहीं ये जानता कोई कैसा भगवान होता है? मगर सच है यही तो बस पिता भगवान होता है। हाल बेहाल होता है बेटे की ढाल होता है। औलाद के खातिर पिता पूरा संसार होता है। […]
तुम चेहरे कीमुस्कुराहट पर मत जाओबहुत गम होते हैंसीने में दफन।तुम झूठीवफाओं में मत आओबहुत ख़्वाब होते हैंआधे अधूरे से।तुम इन सिमटी हुईनिगाहों पर मत जाओबहुत कुछ बिखरा हुआ होता हैछुपी हुई निगाहें में।तुम टूटे […]
संँभाल लो ! घर संँवार लो !घर है तुम्हारा | बड़े नाजुक होते हैं दिल के रिश्ते,तुम इन्हें निभा लो!धीरे – धीरे बंद मुट्ठी में रेत की तरह फिसल जाएगा,मन में प्रायश्चित के सिवा कुछ […]
In the news kingdom, where stories unfold.There is always truth buried and untold.A demanding work that means no rest.A relentless journey and a tireless quest. From dawn till dusk, it stretches wide.Like others nine-to-five it […]
फ़िल्म “द केरला स्टोरी” का मोरल मैसेज युवा होते बच्चों के लिए बहुत मायने रखता है। सच कहूं तो इस फ़िल्म को स्कूल कॉलेज के लिए स्पेशल दिखाए जाने की ज़रूरत है। साथ ही सकारात्मक […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–यहाँ दिख रहे साधु-सा, वहाँ दिखें शैतान।देखो! नज़र बदल रहे, रह-रहकर हैवान।।दो–सब अपने को ही मिले, अजब-ग़ज़ब यह चाह।देखो! लोग बिलख रहे, अन्धी दिखती राह।।तीन–विष बोते हैं देश मे, बोल […]
चुनावी राग-रंग― एक शातिर देखो हर जगह, रहे लगाते दावँ ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–सारे बिल हैं खुल गये, उछल-कूद है रोज़।ज़ोर मारते हर जगह, घर-घर करते खोज।।दो―कल तक अता-पता नहीं, अब हैं चारों […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–कैसे तुम श्री राम हो, उन्मादी के संग!..?भक्ति-भाव से दूर सब, गिरगिट-सा है रंग?दो–राम रमापति भूलकर, रक्त से रँगते भव।उन्मादी ललकारते, बने लावारिश शव।।तीन–मन्दिर-मस्जिद कुछ नहीं, साथ रहेगा कर्म।भले रगड़ […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय बूढ़ी जड़―जोड़ती आ रही है,एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को।यत्न करो,तुम्हारी जड़ का क्रमग्रन्थिल न हो।अनुभव का विस्तारमात्र प्रसार न बना रहे।उसका गाम्भीर्य ओढ़ो;परन्तु मन-भाव मेसंकुचन की पैठ न रहे।ढूँढ़ने […]