वो लड़की हूँ

September 29, 2023 0

हाँ मैं एक लडक़ी हूँहाँ मैं वो ही लडक़ी हूँजो अपनी हो तोचार दीवारी में कैद रखतें हो।किसी ओर की हो तोचार दीवारी में भीनज़रे गड़ाए रखतें हों। हाँ मैं एक लडक़ी हूँहाँ मैं वो […]

An eternal Sacrificer Bhagat Singh

September 28, 2023 0

Raghavendra Kumar ‘Raghav’— Speaking the truth, courage immense, Fighting for justice, resilience. For two months, hunger and thirst withstood, Courage to give his life, grand, good. Apart from those who begged for rights, Isolated from […]

वन्दन का क्रन्दन!

September 26, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• वन्दन! विरूप सर्जन? तेरा बार-बार अभिनन्दन। वन्दन! काया-स्यन्दन१? तेरा बार-बार अभिनन्दन। वन्दन! नेत्रहीन-अंजन? तेरा बार-बार अभिनन्दन। वन्दन! उधार का मंजन? तेरा बार-बार अभिनन्दन। वन्दन! विद्रूप रंजन? तेरा बार-बार अभिनन्दन। वन्दन! […]

Rana Punja Bhil : The Hero of Haldighati

September 22, 2023 0

Raghavendra Kumar ‘Raghav’— Rana Punja Bhil, a name etched in the annals of history, was not just a warrior but a symbol of unwavering courage and determination. Hailing from the Bhil tribe of Mewar, he […]

खोटी नीयत

September 21, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• साहिब!देखते-ही-देखते,‘इण्डिया’ प्रौढ़ हो गया।उसकी जड़ें भी,कश्मीर से कन्याकुमारी तक फैल चुकी हैं;सागर की गहराई-सा गाम्भीर्य है;उसके तने,आकाश की ऊँचाई-से शिखरस्थ हैं।आस-पास का माहौल :–बिगड़ा-बिगड़ा,उद्दण्ड-उद्धत, जंगली-सा दिखता है।ज़ह्रीले साँप भी फन […]

शब्द बना लो तीर

September 20, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–जीवन जड़वत् दिख रहा, बहे नेत्रजल धीर।जोड़ो मन को क्रान्ति से, शब्द बना लो तीर।।दो–बलखाती इठला रही, सरिता संंचय नीर।आँगन बैठी धूप है, आकुल हुआ शरीर।।तीन–मृग-मरीचिका चाह है, मन-गति दिखता […]

अमूक कविता

September 15, 2023 0

कविता……कितने क्यों मौन होक्या आती नही अभिव्यक्ति ?या फिर जाती नहीअब भी अहम भक्ति ? छोड़ दो न छंदों अलंकारों कोकम से कम करो नआत्म अभिव्यक्ति।या फिर जाती नहींअब भी शकी अभिव्यक्ति ? हिंदू हिंदुस्तान […]

भारतीय नवजागरण के अग्रदूत थे, भारतेन्दु हरिश्चन्द– विभूति मिश्र

September 10, 2023 0

भारतेन्दु हरिश्चन्द की जन्मतिथि (९ सितम्बर) के अवसर पर ‘सर्जनपीठ’ का सारस्वत आयोजन ९ सितम्बर को भारतवासियों की नवोदित आकांक्षा और राष्ट्रीयता के प्रतीक ‘भारतेन्दु हरिश्चन्द की जन्मतिथि’ के अवसर पर ‘सर्जनपीठ’, प्रयागराज की ओर […]

बेचारा आवारा

September 8, 2023 0

थक कर बैठ गया हूँथोड़े विराम के लिएमगर सोच मत लेनाकि मैं जीवन से हार गया हूँ। बदलते रहते हैंजीवन के पड़ावमगर सोच मत लेनामैं दूसरों के सहारे हो गया हूँ। बदलते हुए जमाने के […]

रूप और कला का संघर्षण

September 5, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• रूप ने कला से कहा :–तेरा दृष्टि-अनुलेपन है अनुपम,तू रूप को सुरूप करती है।विरूप को कुरूप रचती हैतू सुरूप को विद्रूप बनाती है।तू रंग-रोगन करती हैऔर उकेरी गयी व्यथा-कथा को,एक […]

लक्ष्य को प्राप्त करने मैं चली

September 4, 2023 0

लक्ष्य को प्राप्त करने मैं चली सूरज को पकड़ने चलीहर मुश्किलों को पार करके ,आज उन्मुक्त गगन में उड़ने मैं चली | सबकी मुझसे अनंत इच्छाएंँ हैं ,एकाग्र चित्त होकर ,सबके सपनों को साकार करने […]

अंतिम राह

September 3, 2023 0

जीवन की अंतिम राह मेंन कोई अपना चलेगा न पराया। जीवन की अंतिम राह मेंन सिद्धियां काम आएगी न ऋद्धियां। जीवन की अंतिम राह मेंन कोई तंत्र चलेगा न मंत्र फिरेगा। जीवन की अंतिम राह […]

लफ्ज़ खामोश हो गए

September 3, 2023 0

हाशिया बनाकर खुद खैर बनकर पूछनाखुश्क सा होकर खस्ता करनादेह स्वतंत्र सी लगेऔर मन को कहीं कफस ने जकड़ा।लफ्ज़ खामोश हो गएमानो गहरी निद्रा में सो गएगुमनाम सा कुछ हो रहा थाबवंडरों में अब खो […]

अथाह अनुभूति

September 2, 2023 0

हजारों तंत्र हो मुझ मेंहजारों मंत्र हो मुझ मेंमैं फिर भी लीन रहू तुझ में।न ज्ञान का अहंकार हो मुझ मेंन आज्ञान का भंडार हो मुझ मेंमैं फिर भी लीन रहू तुझ में।योग का भंडार […]

मैं अकेला हूंँ

September 2, 2023 0

दिल मानने को तैयार नहीं , मैं अकेला हूंँ |चलते चले जाना है , किसी का अब इंतजार नहीं ,दिल को समझाऊंँ कैसे ?दिल मानने को तैयार नहीं , मैं अकेला हूंँ | जीना तो […]

मनमयूर

August 25, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–ऐ मेरे गीत!तुझे जन्म तो दे देता हूँ;पर गा नहीं पाता।मेरा पौरुष,रोने के आवेदनपत्र पर–हस्ताक्षर नहीं करता। दो–कभी इधर देखूँ,कभी उधर।पसीने से हो जाता हूँ–तर-ब-तर। तीन–अनुभूति की गहराई मेडूब जाता […]

एक अभिव्यक्ति

August 25, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–कई अनकहे पल, फुसफुसाते हैं कानो मे;बिनब्याही बातों का, हिसाब हम नहीं करते।दो–तू उसे भूलने की बात, हर बार क्यों करता है;वह तो कभी याद आने की बात करता ही […]

वीतराग मन कह रहा, जीवन है निस्सार

August 25, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–गगरी अधजल दिख रही, छलक रहा है बोध।चिन्तन चला वितान ले, मानसपथ अवरोध।।दो–मरा-मरा ही तत्त्व है, तत्त्व राम से हीन।तत्त्वज्ञान राहित्य है, पापपंक मे लीन।।तीन–वीतराग मन कह रहा, जीवन है […]

सत्य समझ लो सार को, मिथ्या है संसार

August 23, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••एक–पाप पुण्य से कह रहा, मेरा देख प्रताप।लोक मुझे ही पालता, पर तू पाता ताप।।दो–जीवन-जंगल जल रहा, जलता नहीं प्रमाद।सत्य वचन है जान लो, यहाँ-वहाँ उन्माद।।तीन–एक घड़ी-आधी घड़ी, चिन्तन हो […]

युगबोध से शून्य है, मत कर तू! अभिमान

August 22, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय •••••••••••••••••••••••••••••••••••••••एक–मद मे अन्धा दिख रहा, बोली बोल कुबोल।काल विहँसता कह रहा, विष को मत तू घोल।।दो–युगबोध से शून्य है, मत कर तू! अभिमान।आयेगी कब गति-कुगति, नहीं किसी को भान।।तीन–दम्भ पालता […]

यह दीपक है, इसे जलाना चाहिए

August 22, 2023 0

देख बुराई अपने अंदरइसे मरना ही चाहिए,जीवन में फैला अंधेरामिटना ही चाहिए।यह दीपक है,इसे जलना ही चाहिए।लगी विचारों मे वर्षो की दीमकइसे हटना ही चाहिए,विरासत में पाया रूढ़िवादिता और अंधविश्वास।इसे जलना ही चाहिए।यह दीपक है,इसे […]

हिन्दी कविता : खुदगर्जी

August 18, 2023 0

गिर रही है नये जो आसमा से तड़पती बूंदेकभी तुम इनसेमज़ा लेते होतो कभी ये डूबकरतुम्हारे अस्तित्व का मज़ा लेती है। बह रही हैं न ये नदियाँकभी खुद बहती हैअपनी ही मस्ती मेंतो कभी तूफ़ान […]

मन का अन्धा सुन!

August 16, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ऐ कलियुगी धृतराष्ट्र!तुमने अपनी प्रजा को छला;मात्र सत्तासुख की ख़ातिरतुमने लक्ष्मणरेखा पार की।तुझे अपनो से मोह ने,‘अपनो’ से दूर कर दिया।जिन पर तुझे गुमान है,वे भी एक-एक करचीलर लगी बण्डी […]

मत भूल!

August 16, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ऐ नादिरशाह!तेरी ताक़त तू नहीं।तेरे चारों ओर मँडरातेवे गिद्ध हैं,जो तुझे अपने पंखों की आड़ दे,तुझे दसों दिशाओं सेतुझ पर रक्षाकवच छाये हुए हैं,तभी तू सीना तानकर,अपने सिद्ध वाचाल होने […]

झूठ के पाँव

August 16, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय तुमने जो बीज बोया है,उसका पौध तो नहीं देख पायेगा;पर लोग उस फल को चखते हीधिक्कारेंगे तुझे।तुमने दिये क्या :―झूठ, अविश्वास, वैमनस्य?तुमने हमारे राष्ट्र को छला है;एक बार नहीं, सौ […]

मेरी माटी, मेरा देश

August 16, 2023 0

मेरी माटी, मेरा देश ।सारे जग से न्यारा देश ।सब देशों में, डंका बजता ।प्रजातन्त्र है, प्यारा देश ।। पर्वतराज हिमालय प्रहरी ।गंगा, यमुना, सरयू गहरी ।झेलम, कृष्णा अरु कावेरी ।अमृत जल से सींचे खेत […]

मातृभूमि ‘भारत महान’

August 14, 2023 0

आरती जायसवालकथाकार, समीक्षक मातृभूमि ‘भारत महान’सदैव हमको अभिमान रहे!वीरों की,देवों की धरती ,होंठों पे सदा गुणगान रहे!सर्वधर्म समभाव रहें,एक दूजे का सम्मान रहे!स्वतंत्रता पर गर्व करें,वीरों का अमर बलिदान रहे!हर घर में तिरंगा लहराएं,‘हर दिल […]

कविता: मोल

August 13, 2023 0

किस्मत का नाम देना क्या सही है?मर्जियां सब अपनीऔर नाम किस्मत कावक्त तो देखते ही नहींकि ज़माना कहां हैकिताबें वो लेख कुछ अधूरे से हैंजहां समानता की बात है।खुद के फैंसलेखुद के सवालखुद ही गवाहऔर […]

वह प्यार था हमारा, जो हमें छोड़ गया

August 12, 2023 0

वादे किए थे हजारों,एक पल में तोड़ गया।वह प्यार था हमाराजो हमें छोड़ गया।भूले नहीं जाते वह लम्हेजो उसके साथ बिताए थे।याद आती है उसकी वह बातें कसमें खाकर जो उसने मुझे कही थी।जिसने पसंद […]

आम सी लड़की

August 12, 2023 0

सुन कर मोहब्बत केअधूरे किस्से सहम जाती हैआम सी लड़की। अजनबी लोगों को देखघबराकर छुप जाती हैआम सी लड़की। माँ के आंचल को,पापा के कंदे कोअपनी ढाल समझती हैंआम सी लड़की। इश्क़ तो दूरउसके नाम […]

पेड़ लगाओ, पेड़ लगाओ

August 12, 2023 0

पेड़ लगाओ, पेड़ लगाओ।इस जीवन को,नष्ट होने से बचाओ ।पेड़़ है हमारीसांसो का उपहारइन्हें बचाना हैहमारा आधार ।पेड़़- पेड़ से बना,हैं जंगलइस जंगल में होता है,जानवरों में दंगल ।पेड़ लगाओ पेड़़ लगाओ।इस जीवन कोनष्ट होने […]

मानवीय मूल्यों की तलाश

August 8, 2023 0

मानव व सभी जीवों के हित में सोचो !मानव सर्वोपरि है। नियमों का उल्लंघन करना,अपने नियम बनाकरदूसरों के ऊपर जबरदस्ती थोंपना,कहांँ का न्याय है ? ए ! चेतना ! की अदालत है ,न तो अंँधी […]

सत्ता की फ़सल

August 8, 2023 0

आरती जायसवाल (कथाकार, समीक्षक) सांप्रदायिकता की आग तेज हुईफिर लपटें उठीं,धू -धू कर जली मानवता,फिर हो गया सामान्य जन-जीवन अस्त -व्यस्त और त्रासदी पूर्णकुछ स्थानों परचीत्कार कर उठा ‘अधर्म’चिंघाड़ता हुआ लेने को ‘नरबलि’मृत देहों के […]

बीते हुए वक्त कभी लौट आना

August 5, 2023 0

बीते हुए वक्त कभी लौट आनामुझे फिर सेहंसना खिलखिलाना है। बीते हुए वक्त कभी लौट आनामुझे फिर सेमस्ती भरे लम्हों को जीना है। बीते हुए वक्त कभी लौट आनामुझे फिरथक हारकर मां की गोद में […]

दर्पण

August 3, 2023 0

मीलों दूर सफ़र करनाजहां खुद के अलावा कोई नहीं मिलनाराहों में कांटों की चुभन सेलोगों को हम भी कांटे नज़र आएंगेकभी पूछा चाह क्या है ?खुद का बोलदर्द को बे-दर्द बताएंगेछोड़ी कोई गली या किनाराजहां […]

रंगीनिए हयात की पहचान है कोठा

July 31, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय बज़्मे नशात१ की यह शान है कोठा,दौलत औ’ हुस्न का ईमान है कोठा।यों ही नहीं बनती रक़्क़ास२ जान लीजिए,लाचारी औ’ मज़्बूरी का नाम है कोठा।तवाइफ़ का जिस्म है रंगीनिये-शबाब,रंगीनिए हयात३ […]

मौसम ने प्रकृति पर प्यार बरसाया, सावन आया

July 29, 2023 0

है सावन आया, नई उमंगे लायाभूल कर सारे गिले सिकवेमौसम ने प्रकृति पर प्यार बरसाया हैमुरझा गए थे कभी चेहरेउलझ गए थे कभी वास्तेखिला कर चेहरे, सुलझा कर वास्तेसावन कुछ ऐसा झूम कर आया है,मौसम […]

ख़्वाहिश

July 29, 2023 0

मैं करूं ख़्वाहिश आज कीमिल जाए मुहब्बत ,मुझे आपकी। मैं करूं ख़्वाहिश आराम कीमिल जाए जिंदगी,मुझे किसी काम की। मैं करूं ख़्वाहिश राम कीमिल जाए मुहब्बत,मुझे राधे-श्याम की। मैं करूं ख़्वाहिश रात कीमिल जाए तन्हाई,मुझे […]

Kranti-Guru Chandrashekhar Azad

July 23, 2023 0

Raghavendra Kumar Tripathi ‘Raghav’– In the land of India, a soul did rise, A young rebel with fire in his eyes. Chandrashekhar Azad was his name, But ‘Azad’ his spirit, forever aflame. Against the British, […]

भाव अनाथ हुए, पीड़ा है असहाय

July 22, 2023 0

◆ आत्मानुरोध― इस सर्जन मे कहीं भी किसी प्रकार की अशुद्धि-अनुपयुक्ति लक्षित हो तो सकारण संशोधित करें। ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–डाली कहती डाल से, कस लो मुझको आज।पेड़ सिसकता सोचता, गिरे न उनपर […]

भीतर

July 21, 2023 0

मुझे कविता मेंनया दौर सीखना है।मुझे मोहब्बत मेंअभी ओर सीखना है।चिलमलाहट सी होती हैभीतर ही भीतरनए शब्दों को सीख करमुझे नए भावों का आयामअभी ओर सीखना है।दबी हुई बातें हैं कुछ भीतरजो दबा देती हैसदैव […]

इंसान और मोबाइल

July 21, 2023 0

आज ज़माना भी गज़ब ढा रहा हैमोबाइल तक ख़ुद को सीमित कर रहा हैघर में चार लोग, बैठे चार किनारेएक दूसरे को देखे भी ना..और चैट पर पूछ रहे इक दूजे का हाल,वक्त नहीं है […]

टूटी हूँ मगर बिखरी नहीं

July 18, 2023 0

कहते हैं जोतुम न कर पाओगेवही तो अबकरने की ठानी है।गिरी हूंमगर हारी नहीं,टूटी हूंमगर बिखरी नहीं,थकी हूंमगर हिम्मत हारी नहीं,राह में मुश्किलेंहजारों हैंमगर जो कि नहींथकी हूंमगर जीवन से हारी नहीं। तृषा चौधरीकांगड़ा, हिमाचल […]

टूट रहे तटबन्ध हैं, जल का हाहाकार!

July 18, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–टूट रहे तटबन्ध हैं, जल का हाहाकार।प्रलय आँख मे नाचता, लिये मृत्यु आकार।।दो–चाहत पूरी कर रहा, ले निर्मम-सा रूप।जनता मरती देश मे, कितना निर्मम भूप।।तीन–हा धिक्-हा धिक्! कर रहा, क्रन्दन […]

मर्म बिलखता है यहाँ, तन सहलाये घाव

July 16, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–लाश तैरती हर तरफ़, शोक कर रहा ‘शोक’।जीवन बहता जा रहा, कोई रोक-न-टोक।।दो–परे शोक-संवेदना, मृत्यु करे आखेट।शासन निर्दय दिख रहा, आते लोग चपेट।।तीन–नेता कैसे देश मे, करते केवल भोग।मतलब केवल […]

आतिश

July 15, 2023 0

जरूरी था रास्ते बदलनामगर चाहता कौन थागुजारिश थी समय कीजो कहीं लूट गईबार हृदय पर करख्वाब को कांच का बना करचकनाचूर कर गई।लाचार सा मानो वक्त हो गयामुंह को सिले कहीं सो गयादर्द था नदिया […]

गुनाह

July 15, 2023 0

कभी हमने भीमोहब्बत का गुनाह किया था।तुमसे मिलकर हमनेखुद को खुद सेजुदा किया था।हर पल देखते थे तुमकोसोचते थे तुमकोइश्क में तुम्हारे हमनेअपने मस्तिष्क को भीफ़िदा किया था।कभी हमें भीकिसी की दिलकशअदाओं ने घायल किया […]

गोरक्षक भूमिगत हुए, संकट मे गोवंश!

July 15, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–जीवन जलमय हो रहा, शासन है बेहोश।गरदन दाबे मौत है, जन-जन मे है रोष।।दो–सेना पथ पर दिख रही, नेता सब हैं मौन।फफक रहे हैं लोग सब, आँसू पोंछे कौन?तीन–गोरक्षक भूमिगत […]

शुष्क पड़ी संवेदना, बेहया है सरकार!

July 14, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–त्राहि-त्राहि जन कर रहे, मुखिया उड़ा विदेश।संकट मे जन-धन यहाँ, मुखिया बदला वेश।।दो–जल बढ़ता हर पल यहाँ, कोई नहीं हवाल।आशा पल-पल पल रही, कोई नहीं वबाल१।।तीन–इंच-इंच पानी बढ़े, आँखभरा है […]

बचपन-आँसू सूखते, बिलख रहा है छोह!

July 14, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–हर-हर, हर-हर हो रहा, ठहर गया है देश।जलधारा उछाल लिये, प्रश्न कर रही पेश।।दो–ताला जड़ा ज़बान पे, निर्दयता हर ओर।जनता करती त्राहि है, भय का ओर न छोर।।तीन–क्रन्दन-सिसकी हर तरफ़़, […]

सत्य की ताकत

July 13, 2023 0

हृदय को देती शक्ति, भक्ति और विश्वास,मन को देती स्थिरता, निडरता और उल्लास,भटकन दूर करे दिल की, दिलाए असीम का एहसास।देह को बनाए चुस्त, दुरुस्त और तंदुरुस्त,मन को बनाए शांत, सौम्य और संयमी,चलना जिस पर […]

मेरे मां-बाप

July 12, 2023 0

मैंने हार मान ली, पर मेरे मां-बाप ने नहीं मानी लोग जो मर्जी कहें पर, मेरे मां-बाप मेरी हर मुश्किल में साथ हैं। पापा ने चलना सिखाया, मां ने हंसना सिखाया, मेरे मां-बाप ने मुझे […]

जिंदगी

July 12, 2023 0

जिंदगी में भरोसा करना हैतो अपने पर करनान कि अपनो पर।दुनिया है ये मतलब कीन की अपनेपन की।जो करते है अपनेपन का दावावो ही करते है दिखावा।इसलिए जिंदगी मेंभरोसा करना है तोअपने पर न की […]

रंग दिखाती है कुर्सी

July 8, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मस्त तराने गा-गा झूमे, कहनी कहती कुर्सी है, नाच-नचाती दुनिया को है, धुन मे रहती कुर्सी है। भाव उसका हरदम ऊपर, क्रय-विक्रय का खेल यहाँ, जेब दिखा हो जिसका भारी, […]

कविता– क्या ?

July 7, 2023 0

पूरे है वो लोग क्या ?जो अधूरी सी बातें करते हैंसमझदार है वो लोग क्या ?जो समझदार होने केबावजूद भी नासमझी सी करते हैं।शिक्षित है वो लोग क्या?जो अशिक्षितओं की तरहव्यवहार करते हैं।कामयाब है वो […]

सरकारी चरणामृत चाटता बुद्धिजीवी!

July 3, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय बेशक,तुम्हारे चिन्तन चुराये हुए हैं।तुम्हारे विचार दिल्ली के आज़ाद मार्केट सेकिलो के भाव लाये हुए कपड़ों-जैसे हैं।किसी कोठे के किराये की कोख से जन्मेवा फिर परखनली में उपजे,तुम्हारे वे शब्द […]

जन्म-जयन्ती व्यर्थ है, उत्सव भी निस्सार

July 1, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–जीवन-मरण समान है, दोनो की गति एक।क्षमता जितनी हो सके, कर्म करो सब नेक।।दो–जन्म लिये किस-हेतु हो, ध्येय नहीं है भान?जीवन अति अनमोल है, करना इसका मान।।तीन–आह-जुड़ी संवेदना, कातर दृष्टि-प्रधान।जन्म-मृत्यु […]

पिया-गाँव से प्रकृति चली

June 30, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–मेघदूत की नायिका, चितवन चारों ओर।उमड़-घुमड़ संदेश कह, गरज पड़े घनघोर।।दो–करवट बादल ले रहे, बिजली तड़के घोर।कनखी बरखा मारती, वन-वन नाचे मोर।।तीन–दादुर तत्पर मे दिखें, अवसर करते बात।ताल-तलैया जब भरें, […]

शाबाशी बनाम विश्वासघात!

June 29, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कल मुझसे,मेरी पीठ मिली थी।खोयी-खोयी-सी;रोयी-रोयी-सी;बेचैन निगाहों से,सन्नाटे को बुनती हुई।पूछना धर्म था; पूछ ही डाला :–कहो! कैसी हो?उसका दृष्टि-अनुलेपनमेरे वुजूद को घायल करता रहा।वह ताड़ती रह गयी,मेरे दु:ख-सुख की प्रतीति […]

भ्रष्टतन्त्र का मूक गवाह

June 21, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••• मै भारत का लोकतन्त्र हूँ,जिह्वा बनकर रह गया हूँ।मुझे,उबड़-खाबड़, बदबूदार दाँतों नेअपने पहरे मे बैठा रखा है।बायें सरकता हूँ तो संकट;दायें मचलता हूँ तो ख़तरा;ऊपर लपकता हूँ तो आफ़त;नीचे लर्ज़ता […]

चुप! उन्हें सोने दो

June 18, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय अब मरघट से धुँआ नहीं निकलताचिट्-चिट् कर चिनगारी फेंकती आवाज़अब बेज़बाँ हो चुकी है।धरती अपने सीने मेराज़ दफ़्न करते-करते अशक्त हो चली है।उसे मालूम है,निस्सहाय हताहतों की संख्या।अपने और नितान्त […]

पिता भगवान होता है

June 18, 2023 0

नहीं ये जानता कोई  कैसा भगवान होता है? मगर सच है यही तो बस पिता भगवान होता है।  हाल बेहाल होता है बेटे की ढाल होता है। औलाद के खातिर पिता पूरा संसार होता है। […]

सवेरा

June 9, 2023 0

हुआ सवेरा एक हैमिटा अंधेरा अनेक है,जीवन की लालिमा छाईबुराई की कालिमा भगाई,नन्हें मुन्ने फूलों नेसुबह ही रौनक लगाई,पंछियों के चहचहाहट नेहर बुरी नजर भगाई,नील गगन में उड़तीरंग बिरंगी चिड़ियों नेसबके चेहरे परसुबह ही मुस्कुराहट […]

कविता– अतिरिक्त

June 2, 2023 0

तुम चेहरे कीमुस्कुराहट पर मत जाओबहुत गम होते हैंसीने में दफन।तुम झूठीवफाओं में मत आओबहुत ख़्वाब होते हैंआधे अधूरे से।तुम इन सिमटी हुईनिगाहों पर मत जाओबहुत कुछ बिखरा हुआ होता हैछुपी हुई निगाहें में।तुम टूटे […]

घर है तुम्हारा

May 30, 2023 0

संँभाल लो ! घर संँवार लो !घर है तुम्हारा | बड़े नाजुक होते हैं दिल के रिश्ते,तुम इन्हें निभा लो!धीरे – धीरे बंद मुट्ठी में रेत की तरह फिसल जाएगा,मन में प्रायश्चित के सिवा कुछ […]

Poem: Journalism and challenges

May 30, 2023 0

In the news kingdom, where stories unfold.There is always truth buried and untold.A demanding work that means no rest.A relentless journey and a tireless quest. From dawn till dusk, it stretches wide.Like others nine-to-five it […]

माँ काली

May 27, 2023 0

कभी हंसा देती हैकभी रुला देती हैमाँ है मेरी कालीजो खुद से हीमोहब्बत करवा देती है। कभी जीवन जीना सिखा देती हैकभी मेरे गुनाहों को दफना देती हैमाँ है मेरी कालीजो काबिल-ऐ-तारीफशख्स मुझे बना देती […]

अमराई

May 22, 2023 0

चलो रे! ले चल भाई,मास जेठ की तपिश झुलसाई,बागों में ले चल चारपाई,बैठ गीत गुनगाई, बहे न पुरवाई,ललचे जिया मोरा देख अमराई,चलो री चल सखी, चलो रे माई। आज गुल्ली-डंडा खेल खूब होई रे, सिलो-पाती […]

फ़िल्म “द केरला स्टोरी” का मोरल मैसेज युवा होते बच्चों के लिए बहुत मायने रखता है

May 15, 2023 0

फ़िल्म “द केरला स्टोरी” का मोरल मैसेज युवा होते बच्चों के लिए बहुत मायने रखता है। सच कहूं तो इस फ़िल्म को स्कूल कॉलेज के लिए स्पेशल दिखाए जाने की ज़रूरत है। साथ ही सकारात्मक […]

विष बोते हैं देश मे, बोल घृणा के बोल

May 11, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–यहाँ दिख रहे साधु-सा, वहाँ दिखें शैतान।देखो! नज़र बदल रहे, रह-रहकर हैवान।।दो–सब अपने को ही मिले, अजब-ग़ज़ब यह चाह।देखो! लोग बिलख रहे, अन्धी दिखती राह।।तीन–विष बोते हैं देश मे, बोल […]

जीवंत पथ

May 5, 2023 0

आते रहेंगेजाते रहेंगेजीवन का गीतगाते रहेंगे।जीतेंगे कभीहारेंगे कभीमगर जीवन के पथपर चलते रहेंगे।आशा भी आएगीनिराशा भी आएगीमगर जीवन के पथपर जीवंत रहेंगे।अच्छे भी मिलेगेबुरे भी मिलेगेमगर फिर भी सबका सहयोगकरते-करते चलेंगे। राजीव डोगरा (भाषा अध्यापक)राजकीय […]

चुनावी राग-रंग

May 4, 2023 0

चुनावी राग-रंग― एक शातिर देखो हर जगह, रहे लगाते दावँ ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–सारे बिल हैं खुल गये, उछल-कूद है रोज़।ज़ोर मारते हर जगह, घर-घर करते खोज।।दो―कल तक अता-पता नहीं, अब हैं चारों […]

राजनीति है ताइफ़:, कमर हिलाते लोग

April 21, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–कैसे तुम श्री राम हो, उन्मादी के संग!..?भक्ति-भाव से दूर सब, गिरगिट-सा है रंग?दो–राम रमापति भूलकर, रक्त से रँगते भव।उन्मादी ललकारते, बने लावारिश शव।।तीन–मन्दिर-मस्जिद कुछ नहीं, साथ रहेगा कर्म।भले रगड़ […]

विविचार विविर के विरुद्ध

April 19, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय बूढ़ी जड़―जोड़ती आ रही है,एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को।यत्न करो,तुम्हारी जड़ का क्रमग्रन्थिल न हो।अनुभव का विस्तारमात्र प्रसार न बना रहे।उसका गाम्भीर्य ओढ़ो;परन्तु मन-भाव मेसंकुचन की पैठ न रहे।ढूँढ़ने […]

मतलबी

April 7, 2023 0

मैंने जहां देखा,मैंने तहा देखा।लोग मुझसे जुड़ेबस मतलब के लिए,न मेरे विचारों के लिएन मेरे लिए।जो भी मुझसे मुस्कायाकिसी न किसी,मतलब के लिएफरेब के लिए।न की अपनेपन के लिएहसीन आंखों ने मुझे भी तकापर न […]

अथाह अनुभूति

April 7, 2023 0

हजारों तंत्र हो मुझ मेंहजारों मंत्र हो मुझ मेंमैं फिर भी लीन रहू तुझ में।न ज्ञान का अहंकार हो मुझ मेंन आज्ञान का भंडार हो मुझ मेंमैं फिर भी लीन रहू तुझ में।योग का भंडार […]

दृढ़ता से बढ़ते चलो, पुरुष-अर्थ के साथ

March 24, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक―दिखें दोगले हर जगह, हरदम करते घात।दूरी कर लो दूर से, बने न कोई बात।।दो―दृढ़ता से बढ़ते चलो, पुरुष-अर्थ के साथ।ख़ुद मे तुम भरपूर हो, नहीं बढ़ाओ हाथ।।तीन―हर जगह चेहरे […]

कविता– रहने दो

March 24, 2023 0

कुछ ख्वाहिशें अधूरी हैतो रहने दो।मोहब्बत की तरफ पाव नहीं जातेतो रहने दो।अपनापन दिखा कर भीकोई अपना नहीं बनतातो रहने दो।मंदिरों मस्जिदों में घूम कर भीहृदय नेक पाक नहीं होतातो रहने दो।दिलों जान से मोहब्बत […]

आज का हाल

March 23, 2023 0

दिल में प्यार है,आंखों में नमी है,मन में उदासी,यही आज का हाल है।चेहरे पर मुस्कान है,दिल में दर्द है,दिमाग में सोच है,यही आज का हाल है।कहीं खामोशी है ,कहीं खुशहाली है ,कहीं निराशा है ,यही […]

विश्व जल दिवस पर अवधेश शुक्ल के दोहे

March 22, 2023 0

पानी मीठा चाहिए, जीव-जगत सब कोय ।अति आनन्द प्रीति तिया, काया जबहिं भिगोय ।। पानी पी-पी जग जिये, जुग-जुग अकट प्रमान ।पानी मत बिथराइयो, रखियो याको मान ।। पानी बहता निर्झरा, ऋतम्भरा हरसाय ।सीतल पानी […]

प्यार भरी लोरी

March 17, 2023 0

माँ! ममतामयी आंचल मेंफिर से मुझे छुपा लोबहुत डर लगता है मुझेदुनिया के घने अंधकार में।माँ! फिर से अपने प्यार भरेअहसासों के दीपमुझ में आकर जला दो।माँ! खो न जाऊं कहींदुनिया की इस भीड़ मेंमाँ! […]

पकड़ गिराओ धर्मान्धों को!

March 17, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय केवल धन्धा-केवल चन्दा,भक्ति-भाव है मन्दा।भक्त और भगवान् है कैसा,खेल खेलते गन्दा।सनातनी का खेल निराला,गले पड़ा ज्यों फन्दा।पकड़ गिराओ धर्मान्धों को!रगड़ो जैसा रन्दा।एक कबीर की और ज़रूरत,लाओ कहीं से बन्दा।(सर्वाधिकार सुरक्षित― […]

मैं चेतना हूंँ

March 15, 2023 0

मैं सोचती हूंँ ,जन्मतिथि पर तुम्हें क्या उपहार दूंँ ,तुम स्वयं में चेतना हो। जीवन जीने की कला है तुममें,तुम्हें क्या सीख दूँ ,तुम स्वयं में प्रज्ञा हो। नित नवीन सद्विचार लाती हो ,तुम्हें क्या […]

जीवन मेरा वसन्त

March 10, 2023 0

जीवन मेरा वसन्तमस्त रहती हूंँ अपनी दुनिया में,हंसती हूंँ हसाती हूंँ औरों को गले लगाती हूंँजीवन मेरा वसन्त। कोयल की कूक, पपीहे की पीहू ,गीत गाती गुनगुनाती हूँ,जीवन मेरा वसन्त। भेदभाव दूर करती हूंँ,प्रेम की […]

कविता– वजह

March 10, 2023 0

मेरे चेहरे कीरौनक की वजह तुम हो।मेरे लबों परआई मुस्कुराहट की वजह तुम हो।मेरे दिल कीहसरत की वजह तुम हो।मेरे मन में आएएहसासों की वजह तुम हो।मेरे गालों में आईरंगत की वजह तुम हो।मेरे ह्रदय […]

नेताओं की बात सुनो मत, सबकी गिरगिट से यारी

March 8, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कहीं उमंग-उत्साह नहीं है, सब दिखते हैं खोली मे,परिपाटी से अधिक नहीं कुछ, देख असर इस होली मे।महँगाई का असर है इतना, मीठा ‘मीठ’ नहीं लगता,महिमा है बाज़ार की प्यारे! […]

अथाह अनुभूति

March 4, 2023 0

हजारों तंत्र हो मुझ मेंहजारों मंत्र हो मुझ मेंमैं फिर भी लीन रहू तुझ में।न ज्ञान का अहंकार हो मुझ मेंन आज्ञान का भंडार हो मुझ मेंमैं फिर भी लीन रहू तुझ में।योग का भंडार […]

हम अपनो से दूर हुए, कैसी है मेरी मज़बूरी

March 2, 2023 0

हम अपनों से दूर हुएकैसी है मेरी मज़बूरी ?जिस माँ ने जनम दियावह माँ आज है अकेली। उसके प्यार के लिएहम भाईआपस में लड़ जाते थे , हम दोनों को झगड़ते देखमांँ कहती –तुम दोनों […]

मुस्कराहट बाकी है अभी

February 24, 2023 0

बिखर चुका है बहुत कुछमगर कुछ यादेंसमेटना बाकी है अभी।बहुत गम है जिंदगी मेंमगर चेहरे परमुस्कुराहट बाकी है अभी।खत्म हो चला है भलेजीवन का सफरमगर फिर भीकुछ करने के इरादेबाकी है अभी।बहुत जान चुका हूंजीवन-मृत्यु […]

हमारे अध्यापक

February 19, 2023 0

धूल में मिट्टी के कण की तरह थे, आसमान का तारा बना दिया। कितने प्यारे थे हमारे अध्यापक, हर काम में काबिल बना दिया। बहुत याद आओगे हमेशा, कौन समझाएगा हमें आप जैसा। हर काम […]

अथश्री रगड़ू-झगड़ू-संवाद शुरू― एक

February 19, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय रगड़ू― चाचा!झगड़ू― हाँ भतीजे रगड़ू।रगड़ू― चाचा! नौकरी तो मिलौ नाय। जब नौकरी नै मिलौ तव छोकरी कैसौ मिलौ।झगड़ू― एमा तोर मतलब का आय?रगड़ू― चाचा! अबै हम छत्तीस के होये जाय […]

सजनी! तुमको दया ना आयी

February 19, 2023 0

सजनी! तुमको दया ना आयी ।इतनी निष्ठुरता से देखा ।अविरल बही अश्रु सरि रेखा।अपनी त्रुटि खुद समझ न आयी ।दृशा – दशा पूरित हो आयीं ।।तब भी तुमको दया न आयी ।। पुनर्मिलन की आश […]

ख़ैरातख़ान: खोलता, कुछ लोग के लिए

February 18, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ख़ैरातभरी झोली, कुछ लोग के लिए, शातिर दिमाग़-खोली, कुछ लोग के लिए। बन्दिश मे दिख रही, हर साँस अब यहाँ, दी जाती ‘ऑक्सीजन’, कुछ लोग के लिए। कैसे कह दें […]

मेरी संजीदगी मत छेड़, उसे चुपचाप रहने दे

February 17, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय बदन के खटते१ रहने पे, हरारत आ ही जाती है, लबों के मुसकराने पे, नज़ारत२ आ ही जाती है। देता ही रहा हर पल गवाही, उनकी फ़ित्रत का, तभी तो […]

नज़रें ग़र इनायत हों तो एक बात मै कहूँ

February 17, 2023 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय रिश्तों की अहम्मीयत जान जाइए,बुराई मे अच्छाई पहचान जाइए।निगाहें ग़र तलाशी लेने पे उतर आयें,ज़बाँ को तसल्ली दे मुसकान लाइए।नज़रें इनायत हों तो एक बात मै कहूँ,अपनी कथनी-करनी मे ईमान […]

बदलते रिश्ते

February 15, 2023 0

शादी की बहुत दिनों बाद अनोखी अपने ननिहाल गई, वहाँ उसने देखा नानी का घर कच्चे मकान के स्थान पर, पक्की ईंटों का आलीशान बँगला बन गया था। गाड़ी दरवाज़े पर जाकर खड़ी हुई, अनोखी […]

लरपोछन महाराज के जय हो!

February 7, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय “का हो बहोरी चाचा! ए फजीरे-फजीरे केने चलि देहले? आ तनी हेने आव; पनपियाव कइ ल, ना त खरास मारि दीही।” “अरे का बताई मरदे, हो पकड़िया तरे एगो बाबा […]

सखी! हम काहू सो नाइ कही

February 7, 2023 0

सखी! हम काहू सो नाइ कही।जोई तुम कहेउ, वहै सब साँची,मनहद पार करी।प्रियतम पालि, दिया नहिं बारेन ,बरबसि रारि परी।।सखी! हम काहू सो नाइ कही।। जोई तुम कहेउ वहै, हम बाँची,बतरस-धार बही।सतरस पूरि कर्षिता-मुदिता,सरसति साज […]

ज़िन्दगी का मक़्सद बन!

February 5, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय घिसटते हुए टायर की तरहज़िदगी जीनेवालो!अपने भीतरभरी हवा की इज़्ज़त करना सीखो।फटे बाँस की तरहचरचपर चरचरमरमर करती ज़िन्दगी,एहसासात को छूती तो है,बूझती नहीं; ताड़ती नहीं।कारणो के पिटारे मे से,झाँक रहे […]

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