‘हिन्दी मे’ संस्था के कार्यक्रम ‘कविताई’ का आयोजन २३ सितम्बर को

September 20, 2023 0

साहित्यिक संस्था ‘हिन्दी में’ द्वारा काव्य प्रेमियों के लिए समर्पित कार्यक्रम ‘कविताई’ ( चैप्टर – तीसरा) का आयोजन 23 सितंबर 2023 को दोपहर 12 बजे से श्री रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी में आयोजित किया जा रहा […]

अमूक कविता

September 15, 2023 0

कविता……कितने क्यों मौन होक्या आती नही अभिव्यक्ति ?या फिर जाती नहीअब भी अहम भक्ति ? छोड़ दो न छंदों अलंकारों कोकम से कम करो नआत्म अभिव्यक्ति।या फिर जाती नहींअब भी शकी अभिव्यक्ति ? हिंदू हिंदुस्तान […]

बेचारा आवारा

September 8, 2023 0

थक कर बैठ गया हूँथोड़े विराम के लिएमगर सोच मत लेनाकि मैं जीवन से हार गया हूँ। बदलते रहते हैंजीवन के पड़ावमगर सोच मत लेनामैं दूसरों के सहारे हो गया हूँ। बदलते हुए जमाने के […]

रूप और कला का संघर्षण

September 5, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• रूप ने कला से कहा :–तेरा दृष्टि-अनुलेपन है अनुपम,तू रूप को सुरूप करती है।विरूप को कुरूप रचती हैतू सुरूप को विद्रूप बनाती है।तू रंग-रोगन करती हैऔर उकेरी गयी व्यथा-कथा को,एक […]

लक्ष्य को प्राप्त करने मैं चली

September 4, 2023 0

लक्ष्य को प्राप्त करने मैं चली सूरज को पकड़ने चलीहर मुश्किलों को पार करके ,आज उन्मुक्त गगन में उड़ने मैं चली | सबकी मुझसे अनंत इच्छाएंँ हैं ,एकाग्र चित्त होकर ,सबके सपनों को साकार करने […]

अंतिम राह

September 3, 2023 0

जीवन की अंतिम राह मेंन कोई अपना चलेगा न पराया। जीवन की अंतिम राह मेंन सिद्धियां काम आएगी न ऋद्धियां। जीवन की अंतिम राह मेंन कोई तंत्र चलेगा न मंत्र फिरेगा। जीवन की अंतिम राह […]

लफ्ज़ खामोश हो गए

September 3, 2023 0

हाशिया बनाकर खुद खैर बनकर पूछनाखुश्क सा होकर खस्ता करनादेह स्वतंत्र सी लगेऔर मन को कहीं कफस ने जकड़ा।लफ्ज़ खामोश हो गएमानो गहरी निद्रा में सो गएगुमनाम सा कुछ हो रहा थाबवंडरों में अब खो […]

अथाह अनुभूति

September 2, 2023 0

हजारों तंत्र हो मुझ मेंहजारों मंत्र हो मुझ मेंमैं फिर भी लीन रहू तुझ में।न ज्ञान का अहंकार हो मुझ मेंन आज्ञान का भंडार हो मुझ मेंमैं फिर भी लीन रहू तुझ में।योग का भंडार […]

मैं अकेला हूंँ

September 2, 2023 0

दिल मानने को तैयार नहीं , मैं अकेला हूंँ |चलते चले जाना है , किसी का अब इंतजार नहीं ,दिल को समझाऊंँ कैसे ?दिल मानने को तैयार नहीं , मैं अकेला हूंँ | जीना तो […]

मनमयूर

August 25, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–ऐ मेरे गीत!तुझे जन्म तो दे देता हूँ;पर गा नहीं पाता।मेरा पौरुष,रोने के आवेदनपत्र पर–हस्ताक्षर नहीं करता। दो–कभी इधर देखूँ,कभी उधर।पसीने से हो जाता हूँ–तर-ब-तर। तीन–अनुभूति की गहराई मेडूब जाता […]

एक अभिव्यक्ति

August 25, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–कई अनकहे पल, फुसफुसाते हैं कानो मे;बिनब्याही बातों का, हिसाब हम नहीं करते।दो–तू उसे भूलने की बात, हर बार क्यों करता है;वह तो कभी याद आने की बात करता ही […]

वीतराग मन कह रहा, जीवन है निस्सार

August 25, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–गगरी अधजल दिख रही, छलक रहा है बोध।चिन्तन चला वितान ले, मानसपथ अवरोध।।दो–मरा-मरा ही तत्त्व है, तत्त्व राम से हीन।तत्त्वज्ञान राहित्य है, पापपंक मे लीन।।तीन–वीतराग मन कह रहा, जीवन है […]

सत्य समझ लो सार को, मिथ्या है संसार

August 23, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••एक–पाप पुण्य से कह रहा, मेरा देख प्रताप।लोक मुझे ही पालता, पर तू पाता ताप।।दो–जीवन-जंगल जल रहा, जलता नहीं प्रमाद।सत्य वचन है जान लो, यहाँ-वहाँ उन्माद।।तीन–एक घड़ी-आधी घड़ी, चिन्तन हो […]

युगबोध से शून्य है, मत कर तू! अभिमान

August 22, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय •••••••••••••••••••••••••••••••••••••••एक–मद मे अन्धा दिख रहा, बोली बोल कुबोल।काल विहँसता कह रहा, विष को मत तू घोल।।दो–युगबोध से शून्य है, मत कर तू! अभिमान।आयेगी कब गति-कुगति, नहीं किसी को भान।।तीन–दम्भ पालता […]

यह दीपक है, इसे जलाना चाहिए

August 22, 2023 0

देख बुराई अपने अंदरइसे मरना ही चाहिए,जीवन में फैला अंधेरामिटना ही चाहिए।यह दीपक है,इसे जलना ही चाहिए।लगी विचारों मे वर्षो की दीमकइसे हटना ही चाहिए,विरासत में पाया रूढ़िवादिता और अंधविश्वास।इसे जलना ही चाहिए।यह दीपक है,इसे […]

हिन्दी कविता : खुदगर्जी

August 18, 2023 0

गिर रही है नये जो आसमा से तड़पती बूंदेकभी तुम इनसेमज़ा लेते होतो कभी ये डूबकरतुम्हारे अस्तित्व का मज़ा लेती है। बह रही हैं न ये नदियाँकभी खुद बहती हैअपनी ही मस्ती मेंतो कभी तूफ़ान […]

मन का अन्धा सुन!

August 16, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ऐ कलियुगी धृतराष्ट्र!तुमने अपनी प्रजा को छला;मात्र सत्तासुख की ख़ातिरतुमने लक्ष्मणरेखा पार की।तुझे अपनो से मोह ने,‘अपनो’ से दूर कर दिया।जिन पर तुझे गुमान है,वे भी एक-एक करचीलर लगी बण्डी […]

मत भूल!

August 16, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ऐ नादिरशाह!तेरी ताक़त तू नहीं।तेरे चारों ओर मँडरातेवे गिद्ध हैं,जो तुझे अपने पंखों की आड़ दे,तुझे दसों दिशाओं सेतुझ पर रक्षाकवच छाये हुए हैं,तभी तू सीना तानकर,अपने सिद्ध वाचाल होने […]

कविता: मोल

August 13, 2023 0

किस्मत का नाम देना क्या सही है?मर्जियां सब अपनीऔर नाम किस्मत कावक्त तो देखते ही नहींकि ज़माना कहां हैकिताबें वो लेख कुछ अधूरे से हैंजहां समानता की बात है।खुद के फैंसलेखुद के सवालखुद ही गवाहऔर […]

वह प्यार था हमारा, जो हमें छोड़ गया

August 12, 2023 0

वादे किए थे हजारों,एक पल में तोड़ गया।वह प्यार था हमाराजो हमें छोड़ गया।भूले नहीं जाते वह लम्हेजो उसके साथ बिताए थे।याद आती है उसकी वह बातें कसमें खाकर जो उसने मुझे कही थी।जिसने पसंद […]

आम सी लड़की

August 12, 2023 0

सुन कर मोहब्बत केअधूरे किस्से सहम जाती हैआम सी लड़की। अजनबी लोगों को देखघबराकर छुप जाती हैआम सी लड़की। माँ के आंचल को,पापा के कंदे कोअपनी ढाल समझती हैंआम सी लड़की। इश्क़ तो दूरउसके नाम […]

पेड़ लगाओ, पेड़ लगाओ

August 12, 2023 0

पेड़ लगाओ, पेड़ लगाओ।इस जीवन को,नष्ट होने से बचाओ ।पेड़़ है हमारीसांसो का उपहारइन्हें बचाना हैहमारा आधार ।पेड़़- पेड़ से बना,हैं जंगलइस जंगल में होता है,जानवरों में दंगल ।पेड़ लगाओ पेड़़ लगाओ।इस जीवन कोनष्ट होने […]

मानवीय मूल्यों की तलाश

August 8, 2023 0

मानव व सभी जीवों के हित में सोचो !मानव सर्वोपरि है। नियमों का उल्लंघन करना,अपने नियम बनाकरदूसरों के ऊपर जबरदस्ती थोंपना,कहांँ का न्याय है ? ए ! चेतना ! की अदालत है ,न तो अंँधी […]

सत्ता की फ़सल

August 8, 2023 0

आरती जायसवाल (कथाकार, समीक्षक) सांप्रदायिकता की आग तेज हुईफिर लपटें उठीं,धू -धू कर जली मानवता,फिर हो गया सामान्य जन-जीवन अस्त -व्यस्त और त्रासदी पूर्णकुछ स्थानों परचीत्कार कर उठा ‘अधर्म’चिंघाड़ता हुआ लेने को ‘नरबलि’मृत देहों के […]

बीते हुए वक्त कभी लौट आना

August 5, 2023 0

बीते हुए वक्त कभी लौट आनामुझे फिर सेहंसना खिलखिलाना है। बीते हुए वक्त कभी लौट आनामुझे फिर सेमस्ती भरे लम्हों को जीना है। बीते हुए वक्त कभी लौट आनामुझे फिरथक हारकर मां की गोद में […]

रंगीनिए हयात की पहचान है कोठा

July 31, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय बज़्मे नशात१ की यह शान है कोठा,दौलत औ’ हुस्न का ईमान है कोठा।यों ही नहीं बनती रक़्क़ास२ जान लीजिए,लाचारी औ’ मज़्बूरी का नाम है कोठा।तवाइफ़ का जिस्म है रंगीनिये-शबाब,रंगीनिए हयात३ […]

मौसम ने प्रकृति पर प्यार बरसाया, सावन आया

July 29, 2023 0

है सावन आया, नई उमंगे लायाभूल कर सारे गिले सिकवेमौसम ने प्रकृति पर प्यार बरसाया हैमुरझा गए थे कभी चेहरेउलझ गए थे कभी वास्तेखिला कर चेहरे, सुलझा कर वास्तेसावन कुछ ऐसा झूम कर आया है,मौसम […]

ख़्वाहिश

July 29, 2023 0

मैं करूं ख़्वाहिश आज कीमिल जाए मुहब्बत ,मुझे आपकी। मैं करूं ख़्वाहिश आराम कीमिल जाए जिंदगी,मुझे किसी काम की। मैं करूं ख़्वाहिश राम कीमिल जाए मुहब्बत,मुझे राधे-श्याम की। मैं करूं ख़्वाहिश रात कीमिल जाए तन्हाई,मुझे […]

थू-थू होखे अब लागल, तहार सगरी

July 27, 2023 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय धीके लागल ए बबुआ! तहार नगरी,देख छलकत बा कइसे, तहार गगरी।बिधाता क बनवला, जियान कइल तू,हेने अइह मत, जइह होने क डगरी।एही करनी से करिखा पोताइ लेहल तू,सोचबो करिह ना […]

भाव अनाथ हुए, पीड़ा है असहाय

July 22, 2023 0

◆ आत्मानुरोध― इस सर्जन मे कहीं भी किसी प्रकार की अशुद्धि-अनुपयुक्ति लक्षित हो तो सकारण संशोधित करें। ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–डाली कहती डाल से, कस लो मुझको आज।पेड़ सिसकता सोचता, गिरे न उनपर […]

भीतर

July 21, 2023 0

मुझे कविता मेंनया दौर सीखना है।मुझे मोहब्बत मेंअभी ओर सीखना है।चिलमलाहट सी होती हैभीतर ही भीतरनए शब्दों को सीख करमुझे नए भावों का आयामअभी ओर सीखना है।दबी हुई बातें हैं कुछ भीतरजो दबा देती हैसदैव […]

इंसान और मोबाइल

July 21, 2023 0

आज ज़माना भी गज़ब ढा रहा हैमोबाइल तक ख़ुद को सीमित कर रहा हैघर में चार लोग, बैठे चार किनारेएक दूसरे को देखे भी ना..और चैट पर पूछ रहे इक दूजे का हाल,वक्त नहीं है […]

टूटी हूँ मगर बिखरी नहीं

July 18, 2023 0

कहते हैं जोतुम न कर पाओगेवही तो अबकरने की ठानी है।गिरी हूंमगर हारी नहीं,टूटी हूंमगर बिखरी नहीं,थकी हूंमगर हिम्मत हारी नहीं,राह में मुश्किलेंहजारों हैंमगर जो कि नहींथकी हूंमगर जीवन से हारी नहीं। तृषा चौधरीकांगड़ा, हिमाचल […]

टूट रहे तटबन्ध हैं, जल का हाहाकार!

July 18, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–टूट रहे तटबन्ध हैं, जल का हाहाकार।प्रलय आँख मे नाचता, लिये मृत्यु आकार।।दो–चाहत पूरी कर रहा, ले निर्मम-सा रूप।जनता मरती देश मे, कितना निर्मम भूप।।तीन–हा धिक्-हा धिक्! कर रहा, क्रन्दन […]

मर्म बिलखता है यहाँ, तन सहलाये घाव

July 16, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–लाश तैरती हर तरफ़, शोक कर रहा ‘शोक’।जीवन बहता जा रहा, कोई रोक-न-टोक।।दो–परे शोक-संवेदना, मृत्यु करे आखेट।शासन निर्दय दिख रहा, आते लोग चपेट।।तीन–नेता कैसे देश मे, करते केवल भोग।मतलब केवल […]

आतिश

July 15, 2023 0

जरूरी था रास्ते बदलनामगर चाहता कौन थागुजारिश थी समय कीजो कहीं लूट गईबार हृदय पर करख्वाब को कांच का बना करचकनाचूर कर गई।लाचार सा मानो वक्त हो गयामुंह को सिले कहीं सो गयादर्द था नदिया […]

गुनाह

July 15, 2023 0

कभी हमने भीमोहब्बत का गुनाह किया था।तुमसे मिलकर हमनेखुद को खुद सेजुदा किया था।हर पल देखते थे तुमकोसोचते थे तुमकोइश्क में तुम्हारे हमनेअपने मस्तिष्क को भीफ़िदा किया था।कभी हमें भीकिसी की दिलकशअदाओं ने घायल किया […]

गोरक्षक भूमिगत हुए, संकट मे गोवंश!

July 15, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–जीवन जलमय हो रहा, शासन है बेहोश।गरदन दाबे मौत है, जन-जन मे है रोष।।दो–सेना पथ पर दिख रही, नेता सब हैं मौन।फफक रहे हैं लोग सब, आँसू पोंछे कौन?तीन–गोरक्षक भूमिगत […]

शुष्क पड़ी संवेदना, बेहया है सरकार!

July 14, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–त्राहि-त्राहि जन कर रहे, मुखिया उड़ा विदेश।संकट मे जन-धन यहाँ, मुखिया बदला वेश।।दो–जल बढ़ता हर पल यहाँ, कोई नहीं हवाल।आशा पल-पल पल रही, कोई नहीं वबाल१।।तीन–इंच-इंच पानी बढ़े, आँखभरा है […]

बचपन-आँसू सूखते, बिलख रहा है छोह!

July 14, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–हर-हर, हर-हर हो रहा, ठहर गया है देश।जलधारा उछाल लिये, प्रश्न कर रही पेश।।दो–ताला जड़ा ज़बान पे, निर्दयता हर ओर।जनता करती त्राहि है, भय का ओर न छोर।।तीन–क्रन्दन-सिसकी हर तरफ़़, […]

सत्य की ताकत

July 13, 2023 0

हृदय को देती शक्ति, भक्ति और विश्वास,मन को देती स्थिरता, निडरता और उल्लास,भटकन दूर करे दिल की, दिलाए असीम का एहसास।देह को बनाए चुस्त, दुरुस्त और तंदुरुस्त,मन को बनाए शांत, सौम्य और संयमी,चलना जिस पर […]

मेरे मां-बाप

July 12, 2023 0

मैंने हार मान ली, पर मेरे मां-बाप ने नहीं मानी लोग जो मर्जी कहें पर, मेरे मां-बाप मेरी हर मुश्किल में साथ हैं। पापा ने चलना सिखाया, मां ने हंसना सिखाया, मेरे मां-बाप ने मुझे […]

जिंदगी

July 12, 2023 0

जिंदगी में भरोसा करना हैतो अपने पर करनान कि अपनो पर।दुनिया है ये मतलब कीन की अपनेपन की।जो करते है अपनेपन का दावावो ही करते है दिखावा।इसलिए जिंदगी मेंभरोसा करना है तोअपने पर न की […]

रंग दिखाती है कुर्सी

July 8, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मस्त तराने गा-गा झूमे, कहनी कहती कुर्सी है, नाच-नचाती दुनिया को है, धुन मे रहती कुर्सी है। भाव उसका हरदम ऊपर, क्रय-विक्रय का खेल यहाँ, जेब दिखा हो जिसका भारी, […]

कविता– क्या ?

July 7, 2023 0

पूरे है वो लोग क्या ?जो अधूरी सी बातें करते हैंसमझदार है वो लोग क्या ?जो समझदार होने केबावजूद भी नासमझी सी करते हैं।शिक्षित है वो लोग क्या?जो अशिक्षितओं की तरहव्यवहार करते हैं।कामयाब है वो […]

जाग्रत्१ आत्मबोध

July 4, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मेरे शहर मे,दूधमुँहे साँपों की नस्लेंफ़न काढ़ना सीख गयी हैं।चुगुलख़ोर हवा२ के साथगलबँहिया करते हुए,नायाब प्रजाति के प्रतिकूल औलाद३सुर-मे-सुर मिलाना सीख गये हैं।यों तो साँपों की कई नस्लें हैंपर दुधमुहेँ४,ज़रूरत […]

सरकारी चरणामृत चाटता बुद्धिजीवी!

July 3, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय बेशक,तुम्हारे चिन्तन चुराये हुए हैं।तुम्हारे विचार दिल्ली के आज़ाद मार्केट सेकिलो के भाव लाये हुए कपड़ों-जैसे हैं।किसी कोठे के किराये की कोख से जन्मेवा फिर परखनली में उपजे,तुम्हारे वे शब्द […]

जन्म-जयन्ती व्यर्थ है, उत्सव भी निस्सार

July 1, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–जीवन-मरण समान है, दोनो की गति एक।क्षमता जितनी हो सके, कर्म करो सब नेक।।दो–जन्म लिये किस-हेतु हो, ध्येय नहीं है भान?जीवन अति अनमोल है, करना इसका मान।।तीन–आह-जुड़ी संवेदना, कातर दृष्टि-प्रधान।जन्म-मृत्यु […]

पिया-गाँव से प्रकृति चली

June 30, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–मेघदूत की नायिका, चितवन चारों ओर।उमड़-घुमड़ संदेश कह, गरज पड़े घनघोर।।दो–करवट बादल ले रहे, बिजली तड़के घोर।कनखी बरखा मारती, वन-वन नाचे मोर।।तीन–दादुर तत्पर मे दिखें, अवसर करते बात।ताल-तलैया जब भरें, […]

शाबाशी बनाम विश्वासघात!

June 29, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कल मुझसे,मेरी पीठ मिली थी।खोयी-खोयी-सी;रोयी-रोयी-सी;बेचैन निगाहों से,सन्नाटे को बुनती हुई।पूछना धर्म था; पूछ ही डाला :–कहो! कैसी हो?उसका दृष्टि-अनुलेपनमेरे वुजूद को घायल करता रहा।वह ताड़ती रह गयी,मेरे दु:ख-सुख की प्रतीति […]

ख्वाबों वाली लड़की

June 22, 2023 0

जी, हाँ, आप, करती है पर नाम नहीं लेती वो पुराने ख्यालों वाली लड़की हैं। तहजीब, सादगी , देख कर तुम्हें भी यही लगेगा कि वो किताबो वाली लड़की है, उसकी आंखें, उसका चेहरा, कान […]

बीती रजनी, रीती सजनी

June 21, 2023 0

बीती रजनी, रीती सजनी,अब क्या सोचे, अब क्या भाये ?अविचल-अवनी, सस्चल घटनी,मन की चीती, कब हो पाये ?? आनन्दयुक्त, संवेद मुक्त,निःशब्द सुधा, पर नहीं व्यक्त ।लवलेश संलयन की क्षणदा,मनजा विलीन कब हो पाये? शतपथ में […]

भ्रष्टतन्त्र का मूक गवाह

June 21, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••• मै भारत का लोकतन्त्र हूँ,जिह्वा बनकर रह गया हूँ।मुझे,उबड़-खाबड़, बदबूदार दाँतों नेअपने पहरे मे बैठा रखा है।बायें सरकता हूँ तो संकट;दायें मचलता हूँ तो ख़तरा;ऊपर लपकता हूँ तो आफ़त;नीचे लर्ज़ता […]

चुप! उन्हें सोने दो

June 18, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय अब मरघट से धुँआ नहीं निकलताचिट्-चिट् कर चिनगारी फेंकती आवाज़अब बेज़बाँ हो चुकी है।धरती अपने सीने मेराज़ दफ़्न करते-करते अशक्त हो चली है।उसे मालूम है,निस्सहाय हताहतों की संख्या।अपने और नितान्त […]

सवेरा

June 9, 2023 0

हुआ सवेरा एक हैमिटा अंधेरा अनेक है,जीवन की लालिमा छाईबुराई की कालिमा भगाई,नन्हें मुन्ने फूलों नेसुबह ही रौनक लगाई,पंछियों के चहचहाहट नेहर बुरी नजर भगाई,नील गगन में उड़तीरंग बिरंगी चिड़ियों नेसबके चेहरे परसुबह ही मुस्कुराहट […]

कविता– अतिरिक्त

June 2, 2023 0

तुम चेहरे कीमुस्कुराहट पर मत जाओबहुत गम होते हैंसीने में दफन।तुम झूठीवफाओं में मत आओबहुत ख़्वाब होते हैंआधे अधूरे से।तुम इन सिमटी हुईनिगाहों पर मत जाओबहुत कुछ बिखरा हुआ होता हैछुपी हुई निगाहें में।तुम टूटे […]

घर है तुम्हारा

May 30, 2023 0

संँभाल लो ! घर संँवार लो !घर है तुम्हारा | बड़े नाजुक होते हैं दिल के रिश्ते,तुम इन्हें निभा लो!धीरे – धीरे बंद मुट्ठी में रेत की तरह फिसल जाएगा,मन में प्रायश्चित के सिवा कुछ […]

Poem: Journalism and challenges

May 30, 2023 0

In the news kingdom, where stories unfold.There is always truth buried and untold.A demanding work that means no rest.A relentless journey and a tireless quest. From dawn till dusk, it stretches wide.Like others nine-to-five it […]

माँ काली

May 27, 2023 0

कभी हंसा देती हैकभी रुला देती हैमाँ है मेरी कालीजो खुद से हीमोहब्बत करवा देती है। कभी जीवन जीना सिखा देती हैकभी मेरे गुनाहों को दफना देती हैमाँ है मेरी कालीजो काबिल-ऐ-तारीफशख्स मुझे बना देती […]

अमराई

May 22, 2023 0

चलो रे! ले चल भाई,मास जेठ की तपिश झुलसाई,बागों में ले चल चारपाई,बैठ गीत गुनगाई, बहे न पुरवाई,ललचे जिया मोरा देख अमराई,चलो री चल सखी, चलो रे माई। आज गुल्ली-डंडा खेल खूब होई रे, सिलो-पाती […]

अट्हास

May 12, 2023 0

मृत्यु फिर अट्हास करेगीबनकर कालतुझ पर वार करेगी,मत सोच तूबच जाएगा इस बार ,बचेगा वहीजिसके कर्म होंगे सही।मृत्यु का दूतजब अट्हास करेगाचुन-चुन करतेरे अपनों का नाश करेगा।न तुझे सोचने का वक्त देगान विचारने का समय।बस […]

विष बोते हैं देश मे, बोल घृणा के बोल

May 11, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–यहाँ दिख रहे साधु-सा, वहाँ दिखें शैतान।देखो! नज़र बदल रहे, रह-रहकर हैवान।।दो–सब अपने को ही मिले, अजब-ग़ज़ब यह चाह।देखो! लोग बिलख रहे, अन्धी दिखती राह।।तीन–विष बोते हैं देश मे, बोल […]

जीवंत पथ

May 5, 2023 0

आते रहेंगेजाते रहेंगेजीवन का गीतगाते रहेंगे।जीतेंगे कभीहारेंगे कभीमगर जीवन के पथपर चलते रहेंगे।आशा भी आएगीनिराशा भी आएगीमगर जीवन के पथपर जीवंत रहेंगे।अच्छे भी मिलेगेबुरे भी मिलेगेमगर फिर भी सबका सहयोगकरते-करते चलेंगे। राजीव डोगरा (भाषा अध्यापक)राजकीय […]

चुनावी राग-रंग

May 4, 2023 0

चुनावी राग-रंग― एक शातिर देखो हर जगह, रहे लगाते दावँ ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–सारे बिल हैं खुल गये, उछल-कूद है रोज़।ज़ोर मारते हर जगह, घर-घर करते खोज।।दो―कल तक अता-पता नहीं, अब हैं चारों […]

मतलबी

April 7, 2023 0

मैंने जहां देखा,मैंने तहा देखा।लोग मुझसे जुड़ेबस मतलब के लिए,न मेरे विचारों के लिएन मेरे लिए।जो भी मुझसे मुस्कायाकिसी न किसी,मतलब के लिएफरेब के लिए।न की अपनेपन के लिएहसीन आंखों ने मुझे भी तकापर न […]

अथाह अनुभूति

April 7, 2023 0

हजारों तंत्र हो मुझ मेंहजारों मंत्र हो मुझ मेंमैं फिर भी लीन रहू तुझ में।न ज्ञान का अहंकार हो मुझ मेंन आज्ञान का भंडार हो मुझ मेंमैं फिर भी लीन रहू तुझ में।योग का भंडार […]

दृढ़ता से बढ़ते चलो, पुरुष-अर्थ के साथ

March 24, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक―दिखें दोगले हर जगह, हरदम करते घात।दूरी कर लो दूर से, बने न कोई बात।।दो―दृढ़ता से बढ़ते चलो, पुरुष-अर्थ के साथ।ख़ुद मे तुम भरपूर हो, नहीं बढ़ाओ हाथ।।तीन―हर जगह चेहरे […]

कविता– रहने दो

March 24, 2023 0

कुछ ख्वाहिशें अधूरी हैतो रहने दो।मोहब्बत की तरफ पाव नहीं जातेतो रहने दो।अपनापन दिखा कर भीकोई अपना नहीं बनतातो रहने दो।मंदिरों मस्जिदों में घूम कर भीहृदय नेक पाक नहीं होतातो रहने दो।दिलों जान से मोहब्बत […]

आज का हाल

March 23, 2023 0

दिल में प्यार है,आंखों में नमी है,मन में उदासी,यही आज का हाल है।चेहरे पर मुस्कान है,दिल में दर्द है,दिमाग में सोच है,यही आज का हाल है।कहीं खामोशी है ,कहीं खुशहाली है ,कहीं निराशा है ,यही […]

विश्व जल दिवस पर अवधेश शुक्ल के दोहे

March 22, 2023 0

पानी मीठा चाहिए, जीव-जगत सब कोय ।अति आनन्द प्रीति तिया, काया जबहिं भिगोय ।। पानी पी-पी जग जिये, जुग-जुग अकट प्रमान ।पानी मत बिथराइयो, रखियो याको मान ।। पानी बहता निर्झरा, ऋतम्भरा हरसाय ।सीतल पानी […]

प्यार भरी लोरी

March 17, 2023 0

माँ! ममतामयी आंचल मेंफिर से मुझे छुपा लोबहुत डर लगता है मुझेदुनिया के घने अंधकार में।माँ! फिर से अपने प्यार भरेअहसासों के दीपमुझ में आकर जला दो।माँ! खो न जाऊं कहींदुनिया की इस भीड़ मेंमाँ! […]

पकड़ गिराओ धर्मान्धों को!

March 17, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय केवल धन्धा-केवल चन्दा,भक्ति-भाव है मन्दा।भक्त और भगवान् है कैसा,खेल खेलते गन्दा।सनातनी का खेल निराला,गले पड़ा ज्यों फन्दा।पकड़ गिराओ धर्मान्धों को!रगड़ो जैसा रन्दा।एक कबीर की और ज़रूरत,लाओ कहीं से बन्दा।(सर्वाधिकार सुरक्षित― […]

मैं चेतना हूंँ

March 15, 2023 0

मैं सोचती हूंँ ,जन्मतिथि पर तुम्हें क्या उपहार दूंँ ,तुम स्वयं में चेतना हो। जीवन जीने की कला है तुममें,तुम्हें क्या सीख दूँ ,तुम स्वयं में प्रज्ञा हो। नित नवीन सद्विचार लाती हो ,तुम्हें क्या […]

जीवन मेरा वसन्त

March 10, 2023 0

जीवन मेरा वसन्तमस्त रहती हूंँ अपनी दुनिया में,हंसती हूंँ हसाती हूंँ औरों को गले लगाती हूंँजीवन मेरा वसन्त। कोयल की कूक, पपीहे की पीहू ,गीत गाती गुनगुनाती हूँ,जीवन मेरा वसन्त। भेदभाव दूर करती हूंँ,प्रेम की […]

कविता– वजह

March 10, 2023 0

मेरे चेहरे कीरौनक की वजह तुम हो।मेरे लबों परआई मुस्कुराहट की वजह तुम हो।मेरे दिल कीहसरत की वजह तुम हो।मेरे मन में आएएहसासों की वजह तुम हो।मेरे गालों में आईरंगत की वजह तुम हो।मेरे ह्रदय […]

नेताओं की बात सुनो मत, सबकी गिरगिट से यारी

March 8, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कहीं उमंग-उत्साह नहीं है, सब दिखते हैं खोली मे,परिपाटी से अधिक नहीं कुछ, देख असर इस होली मे।महँगाई का असर है इतना, मीठा ‘मीठ’ नहीं लगता,महिमा है बाज़ार की प्यारे! […]

अथाह अनुभूति

March 4, 2023 0

हजारों तंत्र हो मुझ मेंहजारों मंत्र हो मुझ मेंमैं फिर भी लीन रहू तुझ में।न ज्ञान का अहंकार हो मुझ मेंन आज्ञान का भंडार हो मुझ मेंमैं फिर भी लीन रहू तुझ में।योग का भंडार […]

हम अपनो से दूर हुए, कैसी है मेरी मज़बूरी

March 2, 2023 0

हम अपनों से दूर हुएकैसी है मेरी मज़बूरी ?जिस माँ ने जनम दियावह माँ आज है अकेली। उसके प्यार के लिएहम भाईआपस में लड़ जाते थे , हम दोनों को झगड़ते देखमांँ कहती –तुम दोनों […]

मुस्कराहट बाकी है अभी

February 24, 2023 0

बिखर चुका है बहुत कुछमगर कुछ यादेंसमेटना बाकी है अभी।बहुत गम है जिंदगी मेंमगर चेहरे परमुस्कुराहट बाकी है अभी।खत्म हो चला है भलेजीवन का सफरमगर फिर भीकुछ करने के इरादेबाकी है अभी।बहुत जान चुका हूंजीवन-मृत्यु […]

हमारे अध्यापक

February 19, 2023 0

धूल में मिट्टी के कण की तरह थे, आसमान का तारा बना दिया। कितने प्यारे थे हमारे अध्यापक, हर काम में काबिल बना दिया। बहुत याद आओगे हमेशा, कौन समझाएगा हमें आप जैसा। हर काम […]

सजनी! तुमको दया ना आयी

February 19, 2023 0

सजनी! तुमको दया ना आयी ।इतनी निष्ठुरता से देखा ।अविरल बही अश्रु सरि रेखा।अपनी त्रुटि खुद समझ न आयी ।दृशा – दशा पूरित हो आयीं ।।तब भी तुमको दया न आयी ।। पुनर्मिलन की आश […]

ख़ैरातख़ान: खोलता, कुछ लोग के लिए

February 18, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ख़ैरातभरी झोली, कुछ लोग के लिए, शातिर दिमाग़-खोली, कुछ लोग के लिए। बन्दिश मे दिख रही, हर साँस अब यहाँ, दी जाती ‘ऑक्सीजन’, कुछ लोग के लिए। कैसे कह दें […]

मेरी संजीदगी मत छेड़, उसे चुपचाप रहने दे

February 17, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय बदन के खटते१ रहने पे, हरारत आ ही जाती है, लबों के मुसकराने पे, नज़ारत२ आ ही जाती है। देता ही रहा हर पल गवाही, उनकी फ़ित्रत का, तभी तो […]

नज़रें ग़र इनायत हों तो एक बात मै कहूँ

February 17, 2023 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय रिश्तों की अहम्मीयत जान जाइए,बुराई मे अच्छाई पहचान जाइए।निगाहें ग़र तलाशी लेने पे उतर आयें,ज़बाँ को तसल्ली दे मुसकान लाइए।नज़रें इनायत हों तो एक बात मै कहूँ,अपनी कथनी-करनी मे ईमान […]

जब वैलेंटाइन-डे न था

February 13, 2023 0

जब वैलेंटाइन डे न था तब होता क्या प्यार न था।अरे प्यार तो था उस जमाने में भी पर आशिकों का ऐसा किरदार न था।जिया करते थे जन्मों जन्म दो प्यार करने वाले एक दूसरे […]

कविता : चहुँ ओर

February 10, 2023 0

तुम सृष्टि केकण-कण में हो।तुम मानव केमन-मन में हो।तुम बीतते वक्त केक्षण-क्षण में हो।तुम सोचते-विचारतेजन-जन में हो।तुम बनती बिगड़तीपरिकल्पना के पल-पल में।तुम अनंत व्योम के चमकतेसितारे-सितारे में हो। राजीव डोगरा(भाषा अध्यापक)राजकीय उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयगाहलियापता-गांव […]

सखी! हम काहू सो नाइ कही

February 7, 2023 0

सखी! हम काहू सो नाइ कही।जोई तुम कहेउ, वहै सब साँची,मनहद पार करी।प्रियतम पालि, दिया नहिं बारेन ,बरबसि रारि परी।।सखी! हम काहू सो नाइ कही।। जोई तुम कहेउ वहै, हम बाँची,बतरस-धार बही।सतरस पूरि कर्षिता-मुदिता,सरसति साज […]

ज़िन्दगी का मक़्सद बन!

February 5, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय घिसटते हुए टायर की तरहज़िदगी जीनेवालो!अपने भीतरभरी हवा की इज़्ज़त करना सीखो।फटे बाँस की तरहचरचपर चरचरमरमर करती ज़िन्दगी,एहसासात को छूती तो है,बूझती नहीं; ताड़ती नहीं।कारणो के पिटारे मे से,झाँक रहे […]

जीवन मेरा सरगम जैसा

January 29, 2023 0

तेरे प्यार में सजना, तेरी सजनी संँवर रही। सात स्वरों से सजा है संगीत, सात फेरों से सजा है जीवन,सात जन्मों तक मिलें सजना तेरा प्यारतेरे प्यार में सजना, तेरी सजनी सज रही , तेरे […]

ग़ुलामो की बस्ती मे

January 29, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय चलो!यहाँ से चलते हैं,दुर्गन्ध भी भयानक और घृणित आ रही है।लगता है,मानो कोई आदमख़ोर जानवर,मल-मूत्र मे नहाया हुआ,इधर से अभी-अभी गुज़रा हो;वह अपने हिंस्र नाख़ूनो से,हर मासूम गर्भ मे हाथ […]

अपनी उड़ान यूँ ही तू भरता चल

January 27, 2023 0

सुन मेरे मन के परिंदेआगे ही तू बढ़ता चल।न सोच तू इन राहों काबस आगे ही निकलता चल।न सोच तू राहगीरों कावो भी खुद पंथ पे मिल जाएंगे।न सोच तू इन हवाओं काये भी एक […]

सुनहुँ सुजान सुसील सनेहू। मान न मर्दन होवै देहू।।

January 27, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय रूप-रंग सब बहुत सुहाया। मन से मन को भी अति भाया।।करम-राह भी अति कठिनाई। मंज़िल करमबीर ही पाई।सुनहुँ सुजान सुसील सनेहू। मान न मर्दन होवै देहू।।आधि-ब्याधि सब रूप समाना। विधि-विधान […]

न्यायशील राष्ट्र का नया दार्शनिक गीत

January 26, 2023 0

वंदे न्यायभारतम्…!वंदे भारतम्…!सत्यं न्यायविधिप्रदम्सत्पथदर्शितम्…!! वसुधाकुटुम्बकंप्रियम्निष्पक्षनायकम्..!विश्वबंधुत्वघोषकम्सर्वजनसुखकरम्..!!वंदे न्यायभारतम्…!वंदे भारतम्..!! विद्याजीविकाप्रदम्सुविधादायकम्…!सृष्टिसंरक्षकारकम्जनहितसाधकम्…!!वंदे न्यायभारतम्…!वंदे भारतम्..!! राष्ट्रं सार्वभौमिकम्सर्वहितकारकम्…!सत्यसिद्धांतधारकम्न्यायधर्मानुगम्…!!वंदे न्यायभारतम्…!वंदे भारतम्..!!✍️🇮🇳

संविधान है जेब मे, मनचाहा है खेल

January 26, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–‘तन्त्र’ बपौती बन गया, ‘गण’ घायल हर ओर।‘लोक’ इशारे नाचता, सेंध लगाते चोर।।दो–‘तन्त्र’ ग़ुलामी जी रहा, ‘गण’ फुटबॉल-समान।जाहिल अनपढ़ कर रहे, हम सबका अपमान।।तीन–लोक-लाज को त्याग कर, लोकरहित है ‘तन्त्र’।अन्धा-बहरा […]

मानवता सिसकी भरे, दुर्जन चुप्पी ओढ़

January 22, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक―दर्द दवा से दाबकर, कब तक लोगे काम।जीवन जंगल बन गया, दिखते नमकहराम।।दो―टन्-टन् टोना-टोटका, टप्-टप् टपके झूठ।सोचो! सच सोता नहीं, सोच-सोचकर रूठ।।तीन―माया-मोह विमुक्त हो, छल-छर१ से हो दूर।सत्य सदा संशयरहित, […]

आग लगा दो नीति मे, नंगा कर दो राज

January 21, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–कहें देश की बेटियाँ, शासक धोखेबाज़।हाथी-जैसे दाँत हैं, उगल रहे हैं राज़।।दो–चुप्पी साधे दिख रहा, घर का चौकीदार।चोरों से है जा मिला, ले रूप ख़रीदार।।तीन–होता शोषण यौन का, सबको इसका […]

शेष है

January 20, 2023 0

मृत्यु का पता नहींमगर श्रेष्ठ जीवनअभी शेष है।नफ़रत का पता नहींमगर मोहब्बत की अभिलाषाअभी शेष है।आत्मसमर्पण का पता नहींमगर आत्मबलिदान का बोधअभी शेष है।मन में पनपते क्रोध का पता नहींमगर हृदय के आँचल में शांतिअभी […]

जी हाँ, मै ‘प्यार’ बेचता हूँ।

January 16, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आइए! मेरी ‘वर्ल्ड-फ़ेमस’ दुकान मे तशरीफ़ लाइए।जनाब! मै प्यार बेचता हूँ।अनोखा प्यार और निराला प्यार :―किसिम-किसिम का प्यार;तरह-तरह का प्यार;भाँति-भाँति का प्यार;नाना प्रकार का प्यार;विविध प्रकार का प्यार;पृथक् प्रकार का […]

लोहड़ी है सबको भायी

January 13, 2023 0

आ गई खुशियों की बहार,लोहड़ी मनाने को हो सब तैयार ।लोहड़ी है सबको भायी,घर घर खुशियां लायी।खुशी-खुशी लोहड़ी मनाते हैं,एक दूसरे को मिठाई खिलाते हैं।हर प्रकार के पकवान बनाते हैं,इस त्यौहार की शोभा बढ़ाते हैं।मूंगफली […]

1 2 3 4 5 13