आइए! ‘कविता और कवि’ का परीक्षण करें और समीक्षण भी

August 23, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय सम्भवत: कोई पारंगत कवि हो, जो समग्र मे अपने गीतात्मक रचना और अन्य छन्दबद्ध सर्जन करते समय भाषा और छन्द के साथ न्याय कर पाता हो। वैसे सर्जक की पीठ […]

बच्चे चले स्कूल की ओर

August 21, 2022 0

सुबह-सवेरेउठो-उठो अब आंखे खोलोसबसे प्यारी बातें बोलो।सूरज जगा हुआ प्रभातढल गई है सारी रात।चिड़िया ने फिर गाना गायासबके मन को खूब हर्षाया।बच्चे चले स्कूल की ओरजिनके हाथों भविष्य की डोर।चलो चलो अब जागो प्यारेउज्ज्वल होंगे […]

अलख निरंजन

August 19, 2022 0

जाग मछंदर गोरख आयाअलख निरंजन नाद सुनाया।महाकाल का भगत बनायाचौसठ योगिनी90 भैरव का गान सुनाया।52 वीर भी संग लाया,जाहरवीर को शिष्य बनायामहावीर संगभगवती काली का गुण गाया।जाग मछंदर गोरख आयाआदेश आदेश आदेश करसब में अलख […]

स्वतंत्रता

August 13, 2022 0

स्वतंत्र देश के परतंत्र नागरिकों जागोअपने अधिकारों के प्रति ही नहींअपने कर्तव्यों के प्रति भी। स्वतंत्र देश के परतंत्र नागरिकों जागोअपने धर्म की रक्षा के लिए ही नहींदूसरे धर्मों के मान-सम्मान के लिए भी। स्वतंत्र […]

बहना छोड़ो न अपना भाई

August 11, 2022 0

बहना छोड़ो न अपना भाई।माना हम कमजोर बहुत, स्तर जीवन छोटा।।आने जाने में होती फजीहत, बिन पेंदी का लोटा।।एक ही मां के गर्भ रहे हैं, एक ही पितु और माई।बहना छोड़ो न अपना भाई।। बढ़ा […]

Friendship Day Special: दोस्ती

August 7, 2022 0

दोस्ती में,भेदभाव नहीं होता ,दोस्ती में ,अटूट प्रेम होता है। दोस्ती में ,ना कहने की गुंजाइश नहीं होती,दोस्ती में ,समर्पण की भावना होती है। दोस्ती में ,धन दौलत का कोई मोल नहीं ,दोस्ती मे ,सहयोग […]

मन की गाँठ

August 7, 2022 0

अन्तर्द्वन्द्व से परे ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय [अभी-अभी मेरे विचारलोक मे एक साथ इतने शब्दचित्र उतरने लगे कि तज्जनित/तज्जन्य (‘तद्जनित’ अशुद्ध है।) विविध भाव/रस का प्लावन होने लगा और उसकी राशि की निष्पत्ति अधोटंकित […]

व्यक्तित्व

August 2, 2022 0

व्यक्तित्व ही व्यक्ति की अस्मिता, जिनका कोई व्यक्तित्व नहीं! वह भी! क्या कोई व्यक्ति? बिन व्यक्तित्व के व्यक्ति धरती का बोझ, व्यक्ति ही व्यक्तित्व खोजें, ना पहचान सकें अपना रूप, कहते लोगों से फिरते, ना […]

शहर के बाजार मे

July 30, 2022 0

तुम जो आये हो शहर से जैसे आये हो बाजार से। न चेहरे पर ख़ुशी, सिलवटों ने बढ़ा दिया कुछ परेशानियों को। यहाँ जो दौलत थी छिन सी गई शहर के बाजार में तुम ले […]

सम्मान कर

July 29, 2022 0

हृदय को न पाषाण करइसमें मानवता का भीकुछ सम्मान कर।जो मिट चुका हैउसको मिटने दे,नवीन आतेज्ञानधारा के स्रोत काकुछ सम्मान कर।भूमंडल के भूतल परन किसी का अपमान कर,अपनो के साथ-साथपरायों का भीहृदय से सम्मान कर।अगाध […]

क़रीब का एहसास

July 28, 2022 0

तुम मेरे दिल के इतने क़रीब हो, चाह कर भी मैं तुम्हें भूल नहीं सकती। तुम मीठा–सा मेरे हृदय का वह एहसास हो, जिसे याद करके मेरा रोम–रोम पुलकित हो उठता है। चेतनाप्रकाश चितेरी, प्रयागराज

स्रष्टा! अब तो करो संहार

July 23, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–भ्रष्ट यहाँ का तन्त्र है, भ्रष्ट नियामक लोग।धर्म खा रहा देश को, राजा करता भोग।।दो–अधम-नराधम दिख रहा, ले चण्डाली रूप।गिरता-गिरता आ रहा, कुत्सित-कलुषित भूप।।तीन–दुखड़ा दुर्बल हो रहा, पककर पकता कान।ख़ून […]

मारी गयी है मति

July 23, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–गति सबही की एक है, दुर्गति अलग विधान।पापी समझ न पा रहे, पाते नहीं निदान।।दो–पापी इस संसार मे, भाँति-भाँति के लोग।लटके उलटा हैं दिखें, तन के-मन के रोग।।तीन–घटिया शासन-नीति है, […]

कविता: आज़माइश

July 22, 2022 0

नफरत की नहींमोहब्बत कीआजमाइश करो।पराएयो की नहींअपनों कीआजमाइश करो।बुराई की नहींअच्छाई का ढोंगकरने वालों कीआजमाइश करो।दिल दुखाने वालों की नहींदिल लगाने वालों कीआजमाइश करो।मरने वालों की नहींजीने वालों कीआजमाइश करो।कड़वी जुबान की नहींशहद से मीठे […]

हमसफर ऐसा होना चाहिए

July 19, 2022 0

हमसफर ऐसा होना चाहिए, जो समझाए नहीं समझे। हमसफर ऐसा होना चाहिए, जो जिस्म से नहीं रूह से प्यार करे। हमसफर ऐसा होना चाहिए, जो रुलाए नहीं हर समय हँसाए। हमसफर ऐसा होना चाहिए, जो […]

जीना सीखो

July 16, 2022 0

अपने लिए न सहीदूसरों के लिए जीना सीखो।गम से भरे चेहरों कोज़रा खिलखिलाना सीखो।मोहब्बत में तोहर कोई मुस्कुराता हैदिल टूट जाने पर भीज़रा जीना सीखो।अपनो ने दगा दे दिया तोक्या हुआ ?गैरों को अपना बनाकरगले […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का ‘उनकी कविता-कामिनी’ को एक मधुरिम सम्बोधन

July 10, 2022 0

मेरे हृदयप्रान्त की सम्राज्ञी कामिनी कविते! तुम्हारे सर्वांग पर जब मैने पहली बार दृष्टि-अनुलेपन किया था तब मुझे ऐसा प्रतीत हुआ था, मानो प्रकृति-सुरभि तुम्हारे अंग-प्रत्यंग और स्निग्ध प्राणों पर ओस भीगे हुए पुष्प की […]

क्यों कर नहीं पाते हो, ‘जन’ की बातें?

July 9, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आकाश में उछालते हो, ‘मन’ की बातें?धरती पर उगा दो, कुछ ‘तन’ की बातें।हवा उड़ान भरती है, सोच-समझकर,मन से बात से उतरी है, मन की घातें।फुटपाथ पर जाओ और देखा […]

तेरी तलाश में

July 8, 2022 0

मैं आज भी तुमको ढूंढता हूंतेरी अनकही बातों में,मैं आज भी तुमको ढूंढता हूंतेरी खामोश हुई चुपी में,मैं आज भी तुमको ढूंढता हूंइन बरसती हुई बरसातों में,मैं आज भी तुमको ढूंढता हूंइन मखमली सी शामों […]

बस माँ-बाप ही अपने होते हैं

July 6, 2022 0

ना कोई मोहब्बत होती है ,ना कोई इश्क होता है ,यह सब जिस्म के खेल होते हैं ।कोई अपना नहीं होता,सोच समझ कर जीना जिंदगी,यहां सब मतलब के लिए होते हैं ।इस दुनिया में जीना […]

आ रहे हो

July 4, 2022 0

तुम आ रहे होइस ख़ुशी में कई काम अधूरे हैंजिसे समेटना हैंअपने आँगन को बुहारना हैगोबर से लीपकर तुलसी की चौरा परदीपक जलाना हैंसूखे पत्तों को हटाकर ,घर आँगन सजाना हैंये सब तुम्हारे आने की […]

मेरे महाकाल

July 2, 2022 0

मैं न जानू काल को,मैं जानू बस महाकाल।रिद्धि सिद्धिमुझे न भाएप्रेम, स्नेह और भक्तिमुझे में वो सदा जगाये।हंसते खेलतेमुझे अपने गले लगाएं।जान शिशु अपनामुझे रिझाए।अलख निरंजन बनमुझे नाद सुनाएं।चार वेदों का भीमुझे ज्ञान करवाएं।योग विद्या […]

कविता : छोटी-छोटी बातों पे

June 26, 2022 0

सुन मेरी लाडली बहना ,ओ मेरी प्यारी बहना ,छोटी – छोटी बातों पे ,धन्यवाद कह ,अपने भाई को शर्मिंदा न कर। सुन मेरी बहना, ओ मेरी लाडली बहनातेरा हक है मुझ पर ,तनिक तू संकोच […]

हिन्दी-कविता : बंधुत्व

June 26, 2022 0

यह देश है हमारा ,हम सब वतन के रखवाले हैं। हम भारत के शूरवीर हैं ,जनचेतना कर्मवीर हैं । हम सब में अपनत्व नहीं ,हममें बंधुत्व की भावना है। हममें भेद नहीं ,बैरी की खैर […]

कविता : उड़ने दो

June 24, 2022 0

मत बांधोइन नन्हीं चिड़ियो कोखुले नील गगन मेंउड़ने दो।नन्हे-नन्हे पंखों सेसहसा इनको भी तोउड़ान भरने दो।लड़की हुई तो क्या हुआइनको भी तोअपना नामरोशन करने दो।खुद योनि का भेद करपहला योन शोषणतुम ही करते हो।लड़की-लड़की बोल […]

अभिव्यक्ति का कृष्णपक्ष

June 20, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय प्रणयपंछी विकल उड़ने के लिए,ताकता हर क्षण गगन की ओर है।किन्तु ममता की करुण विरह-व्यथा,ज्ञानपथ को आज देती मोड़ है।धैर्य की सीमा सबल को तोड़कर,दर्द की लतिका हरी बढ़ने लगी,अर्चना […]

न्याय कहाँ मिलता यहाँ?

June 20, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–न्याय कहाँ मिलता यहाँ, बड़े-बड़ों का खेल।एड़ी फटती हर जगह, पापी-पापी-मेल।।दो–लज्जा उससे दूर है, लज्जा को भी लाज।सीरत-सूरत इस तरह, कोढ़ी को हो खाज।।तीन–अपना किसको हम कहें, किस पर हो […]

कल तक था जो जगद्गुरु?

June 20, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–कहते ख़ुद को जगद्गुरु, पतित बन गये लोग।कथनी-करनी छेद है, पापकर्म है भोग।।दो–सम्मोहित हैं सब यहाँ, नहीं किसी को होश।दिखते मनबढ़ एक-से, ख़ाली करते कोष।।तीन–क़लम बिकाऊ दिख रहे, बिकते हैं […]

मै और मेरा मौन

June 20, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मै मौन हूँ।तेरा मौन और मेरे भीतर केउमड़ते-घुमड़ते मौन मेएक बहुत अधिक फ़र्क़ है :–तू चुप्पी को पीता रहता हैऔर मै,तुझे पीता रहता हूँ।दोनो के पीने मे फ़र्क़ है :–तू […]

हस्रतभरी निगाहें

June 19, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ★ मिर्ज़ा ग़ालिब ने क्या ख़ूब कहा है :— “दिल को नियाज़े हस्रते दीदार कर चुके, देखा तो हममे ताक़ते दीदार भी नही।’ यक़ीन नहीं आता,ख़ुद को देख रहा हूँ।अतीत, […]

कविता : पिता

June 18, 2022 0

पिता का आशीर्वादहरे दुर्वादल के जैसा ;जिंदगी में कभी अपने को कमजोर न समझना ,थोड़े से में भी खुश रहना। पिता का दुलारशहद के जैसा ;मातृभूमि रक्षा हेतु, धूलि तिलक कर ,वीरपुत्र को रणक्षेत्र में […]

रोज परेशान करता है इश्क

June 18, 2022 0

दुखी हूं बहुत मैंमेरे दिल में दुख है बहुतरोज परेशान करता है इश्कआकर रास्ते में मुझे।चेहरे पर मुस्कान लिएदिल में दर्द लिएघूमती हूँफिर भीसमझ नहीं आतायह इश्क़ रहता है कहां?मैं पसंद नहीं करतीइश्क को फिर […]

उस क़ुद्रत को सलाम, जो जिलाती है ज़िन्दगी

June 18, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय बेजान सड़क पे गुमनाम, दिखती है ज़िन्दगी,अनजान-सी हक़ीक़त, दिखती है ज़िन्दगी।उस हवा को दुलार, जो मन को सुकून दे,उस धूप को सलाम, जो खिलाती है ज़िन्दगी।सूखे हैं आँसू, तकिये का […]

कवि! हरे-भरे खेतों मे चल

June 18, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कवि! हरे-भरे खेतों मे चल।तू देख चुका शहरी जीवन,वैभव के सब नन्दन-कानन।क्या देखा-क्या पाया तूने,धनिकों के उर का सूनापन?अब उठा क़दम, दोपहर हुआ,उन दु:खियों के आँगन मे चल।कवि! हरे-भरे खेतों […]

कविता : झूठी यारी

June 17, 2022 0

मोहब्बत न सहीनफरत ही किया करो,खुशी न सहीगम ही दिया करो,दिल से न सहीदिमाग से हीसोच लिया करो,अपनापन न सहीपरायपन हीदिखा दिया करो,मुस्कान न सहीगम के आंसू हीदे दिया करो,बातचीत न सहीखामोशी का आलम हीमेरे […]

एक अभिव्यक्ति

June 16, 2022 0

● आचार्य ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–वह वादाशिकन है, पलकों पे बिठाना मत,गर नज़रों में समायी तो पछतायेगी ज़िन्दगी।दो–ज़िन्दगी भीख में मिला नहीं करती प्यारे!मौत के जबड़े से छुड़ा लेने की क़ुव्वत रख!तीन–ठिठक जाओगे तो दूर […]

सोचा था तुमने, बहल जाऊँगा?

June 16, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय सोचा था तुमने, पिघल जाऊँगा,सोचा था तुमने, बदल जाऊँगा।शर्तों पर तुमने, थमाया झुनझुना,सोचा था तुमने, बहल जाऊँगा?गिरायी जो बिजली, रही बेअसर,सोचा था तुमने, दहल जाऊँगा?फ़ौलादी सीने मे, राज़ हैं बहुत,सोचा […]

मा! मौन को चीरो

June 15, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कौन-सा अपराध!कैसी गुस्ताख़ी!मै तो था,मात्र मास का एक लोथड़ा।शक़्ल इख़्तियार करने से पहले हीमेरे वुजूद को मिटा डाला?तुम ‘ममत्व’ और ‘अपनत्व’ केअन्तर्द्वन्द्व में उलझी रही;पिता लोक-लज्जा का स्मरण कराते हुए,तुम्हें […]

अब क्या कहूँ तुम्हें?

June 15, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इक हूक-सी उठी है, अब क्या कहूँ तुम्हें?तन-बदन है ज़ख़्मी, अब क्या कहूँ तुम्हें?हर रात मुझसे रूठी, दिन भी उदास रहता,बहके क़दम भी रहते, अब क्या कहूँ तुम्हें?इक छिप-छिपायी बदली, […]

यह बाज़ार नहीं, महब्बत का पाक मन्दिर है

June 14, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय उनकी निगाहों के सुरूर१ अब बोलने लगे,वे कितने पानी में हैं, लोग अब तोलने लगे।वे आर्ज़ूमन्द२ हैं, मताए दिल३ ख़ुशगवार रहे,बेशक, डर है, ईमान कहीं अब डोलने लगे।चलो! एक बार […]

उल्लू बैठा सोचता, कैसी आदम जात!

June 13, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–जनता के दरबार मे, तरह-तरह के चोर।ख़ूबी से चोरी करें, मौन बना है शोर।।दो–भिक्षाथाली हाथ लिये, घूम रहे चहुँ ओर।अच्छे दिन की आस मे, भटक रही है भोर।।तीन–बहुरुपिये सब दिख […]

चाहत दीदार का, शह-मात हो जाने दो

June 12, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आँखों-ही-आँखों में, बात हो जाने दो, बातों-ही-बातों में, अब रात हो जाने दो। बनने-सँवरने लग गये, ख़यालात पुराने, रातों-ही-रातों में, मुलाक़ात हो जाने दो। ज़मानाए दराज़१ जुस्तजू, परायी ही रही, […]

कविता : भेड़िये

June 11, 2022 0

हवसी भेड़ियेकहीं बाहर नहींहमारे अंदरहमारे आस पास ही रहते है।कभी हमारेगंदे विचारों में,कभी हमारीगंदी निगाहों में।कभी हमारीगंदी सोच मेंताकते रहता है वोओरों की बहू बेटियों को।कभी-कभीअपनी सोच सेलाचार होकर ये भेड़ियेनोचते है अपनी हीबहू बेटियों […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की काव्यदृष्टि

June 11, 2022 0

एक–जीवन-जरा ज़रा जरा, पात घास औ’ फूस।उष्मा-ऊर्जा क्षरित-सी, रक्तराशि ले चूस।।दो–निर्गम निष्कासन निकष, उत्पाती बन राग।जरे देह-कंचन-सदृश, फफक उठी हो आग।।तीन–भेदी भाड़ा-भीरु भर, मतिरतिगति का खेल।कंस-वंश अवतंस रिपु, मानो हों विष-बेल।।चार–पाप पंक प्रसून पुन:, काम-क्रोध-मद-लोभ।धैर्य […]

आओ! घमण्ड के भाव का परित्याग करें

June 3, 2022 0

आओ हम एक दूसरे के घर को खुशियों से भर दें। एक-दूसरे का साथ देकर, एक-दूसरे के जीवन को आसान बना दें। आओ! हम एक-दूसरे के सुख–दु:ख के साथी बने। हम सब जन्म से पूर्व […]

तुमने कोशिश की

June 3, 2022 0

तुमने तो पूरी कोशिश कीहमारी खिल्ली उड़ाने कीहर जगह हरा तरफ ,हम फिर भीखिलखिलाते रहेइस मतबली जमाने में।तुमने तो पूरी कोशिश कीकि हम जीते जी मर जाए।हम फिर भीहंसते रहे मुस्कुराते रहे,और जीवन की डगर […]

आओ! गुस्सा त्यागें

June 2, 2022 0

कुछ खट्टी, कुछ मीठी,यादों के साथ ,मैं तेरे दिल में बस जाऊंगी,जब मुझे तू याद करेगा ,तोमैं चाहकर भी !तेरे पास वापस न आ पाऊंगी, सब छोड़ चली जाऊंगी,कल किसने देखा है? आओ! गुस्सा त्यागें, […]

उसे कभी मत भूलना

June 1, 2022 0

उसे कभी गम मत देना,जो आपको खुशी देता है।उससे कभी कुछ मत छुपाना,जो आप पर भरोसा करता है।उसे कभी मत रुलाना ,जो आपको हंसाता है।उसे कभी मत समझाना ,जो आप को समझता है ।उसे कभी […]

मै मज़दूर हूँ

May 31, 2022 0

मैं मजदूर हूं,गर्व से कहता हूं,मैं मजदूर हूं , मैं मजदूर हूं । मेरे चेहरे पर ना कोई शिकन,मैं बोझ उठाता हूं,जूझता, बुझता हूं,फक्र से कहता हूं,मैं मजदूर हूं ,मैं मजदूर हूं। मैं भाग्य पर […]

मताधिकार है तुम्हारा

May 30, 2022 0

मताधिकार है तुम्हाराउसका सदुपयोग करो! मतदान कर योग्य प्रतिनिधि का चुनाव करो! हमारा मत अमूल्य है,किसी के झांसे व प्रलोभन में ना आओ! अयोग्य की पहचान करमतदान करो ! संपूर्ण शक्ति तुम्हारे हाथों मेंबहुमत दिला […]

एक किसान के हृदय की व्यथा

May 29, 2022 0

दिन-रात वे खेतों पर ,कितना काम करते,उनकी मेहनत को हम क्यों नहीं देखते? खुद भूखा रहकर दूसरों के लिए अन्न उगाते,क्या! हम उनको सही मूल्य दे पाते । उनसे सस्ते भाव में सौदा करते,बाजारों में […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज के दोहे

May 29, 2022 0

मन की मरती छाँव है, तन घायल हर रोज़।व्यथा-कथा भी मौन है, कोई ख़बर, न खोज।। (१) अन्धे के दरबार में, चीरहरण का खेल।गूँगे-बहरे हैं जुटे, लँगड़ों का भी मेल।। (२) ‘सधवा’ महँगाई दिखे, ‘विधवा’ […]

नयी कविता : जान लिया

May 27, 2022 0

क्या फर्क पड़ता हैअब तेरे आने सेक्या फर्क पड़ता है,अब तेरे जाने सेहम तो चर्चित रहेंगेफिर भीइस जमाने में।क्या फर्क पड़ता हैअब तेरे रोने सेक्या फर्क पड़ता हैअब तेरे मुस्कुराने से।हमने जान लिए हैंअब हर […]

कविता : तेरे बिन

May 26, 2022 0

फिर एक पल जिया जाए तेरे बिन।फिर घूमा-टहला जाए तेरे बिन।फिर हंसकर बोला जाए तेरे बिन।फिर दिल को खोला जाए तेरे बिन॥ फिर से यारी की जाए तेरे बिन।फिर से दिलदारी की जाए तेरे बिन।फिर […]

एक ‘अपाहिज़’ दर्द के साथ संवाद

May 26, 2022 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय उस खूँटी को देख!जो शिथिल-सहमी-सकुची-संत्रस्त;क्रन्दन करती भार ढोती;फफकती-सिसकती;अपनी हथेलियों पर खिंची लकीरों को बाँचती;आशंका-सिन्धु में डूब और उतरा रही है।विषाक्त होती उसकी काया-छाया सेउसका मौन करता प्रश्नकेवल ‘प्रश्न’ बनकर रह […]

एक दिन

May 21, 2022 0

एक दिन मोहब्बततुम को भी होगी।एक दिन चाहततुम को भी होगी। एक दिन एहसासतुम को भी होगा।एक दिन वफ़ातुम को भी रास आएगी। एक दिन दर्दतुम को भी होगा।एक दिन बेवफाईतुमको भी खाएगी। एक दिन […]

नाराज़ हैं मेहरबान मेरे

May 18, 2022 0

 डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ नाराज़ हैं मेहरबाँ मेरे अब आ भी जाओ कि अंजुमन को तेरी दरक़ार है ढूँढता रहा न मिला कोई तेरे जैसा कि महफ़िल तेरे बिना बेक़ार है तेरा लिहाज़ तेरी जुस्तजू […]

परिणाम व्यस्तता  के अच्छे हैं

May 18, 2022 0

बृजेश पाण्डेय बृजकिशोर ‘विभात’ आज की आपाधापी में  व्यक्ति,  व्यक्ति  से छूट गया। निज कर्मों में तल्लीन हो अधिक व्यस्त लयलीन भया। समय नहीं दे सकता है, दो-चार प्रेम के शब्दों का। आधुनिकता के घनचक्कर में जीवन कुण्ठाग्रस्त […]

हिन्दी हम सबकी पहचान है

May 18, 2022 0

कवि राजेश पुरोहित, भवानीमंडी हिन्दी आन है हमारी शान है। हिन्दी हम सबकी पहचान है।। हिन्दी में गीता और कुरान है। हिन्दी ही हम सबकी जान है।। हिन्दी का रखना हमें ध्यान है। हिन्दी में […]

कविता : विछोह की पीड़ा

May 18, 2022 0

सौरभ कुमार ठाकुर (बालकवि एवं लेखक) मुजफ्फरपुर, बिहार मो0- 8800416537 पता नही किस शहर में, किस गली तुम चली गई। मैंं ढूँढ़ता रह गया, तुम छोड़ गई । पता नही हम किस मोड़ पर फिर […]

कविता : पिता

May 17, 2022 0

कवि राजेश पुरोहित, भवानीमंडी घर का रखवाला होता है पिता चिन्ता रख घर परिवार चलाता मजदूरी कर लाता पेट भरने को भूखे रहकर निवाला खिलाता है सर्दी गर्मी बारिश सहता है पिता फिर भी कितना […]

कविता : अपनी बोली अपने आप

May 16, 2022 0

रचयिता- सुधीर अवस्थी ‘परदेशी’ (लखनऊ हरदोई रोड टावर प्लाट सुन्नी, निकट बघौली चौराहा) एक पढ़ा लिखा नामी-गिरामी परिवार से जुड़ा युवक जब घर परिवार की जरूरतों को पूरा नहीं कर पाता तो उसको घर के […]

कब तक मरेगी?

May 16, 2022 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव‘ कल भी मरी थी कल भी मरेगी! आख़िर वो कितनी बार जलेगी? पहले तो तन को भेड़िया बन नोच डाला। शरीर से आत्मा तक छेद डाला । लाश बच रही थी […]

कविता : आजादी की कीमत

May 15, 2022 0

शालू मिश्रा, नोहर (हनुमानगढ) राजस्थान कितना सुंदर कितना प्यारा देखो हिन्द देश हैं, तीन लोक से न्यारा ओर विशेष हैं। सिर पर पहने केसरिया बाना राष्ट्रपहरी यहाँ आए थे, सीने पर गोली खाके हँसते हंसते […]

जिंदादिल इंसान

May 14, 2022 0

खुशनसीब है वो लोगजो खुशियां बांटते हैं।मोहब्बत का राग औरमोहब्बत के गीतसब को सुनाते हैं।कोई फर्क नहीं पड़ता उनकोकि लोगउनको हँसाते हैंया फिर रुलाते हैं।वो बस चेहरे परहल्की-हल्की मुस्कान लिएजिंदगी बिताते हैं।वो नहीं देखतेकि राह […]

चमकता सूरज था अटल

May 14, 2022 0

कवि राजेश पुरोहित– आजीवन ब्रह्मचारी तपस्वी देश का था अटल। सियासत का एक  चमकता सूरज था अटल।। जिसने दुनिया को राजनीति का पाठ सिखाया। अपने ओजस्वी भाषण से दिल जीतता था अटल।। चौड़ी- चौड़ी सड़कों […]

निराश मन की आशा

May 14, 2022 0

रचयिता- सुधीर अवस्थी ‘परदेशी’ (लखनऊ हरदोई रोड टावर प्लाट सुन्नी, निकट बघौली चौराहा) एक पढ़ा लिखा नामी-गिरामी परिवार से जुड़ा युवक जब घर परिवार की जरूरतों को पूरा नहीं कर पाता तो उसको घर के […]

क्या भरोसा है कल मैं रहूं न रहूं

May 14, 2022 0

पवन कश्यप (युवा गीतकार, हरदोई)- आपके दिल में क्या है बता दीजिये, क्या भरोसा है कल मै रहूं न रहूं। जिन्दगी एक उड़ती पतंग बन गई, थाम लो डोर तुम फिर मिलूं न मिलूं ।। […]

चिंता के मूल में

May 12, 2022 0

बड़े अहंकारी या व्यस्तज़िन्दगी के ताने-बाने हैं।ये हकीकत हैंया एकांतवास जीने कीहठी आकांक्षादायरे के परिधी में कौन हैं ?सुलझा रहे ज़िन्दगी कीमौन चेष्टा!आदि से उपजी अंत चेतनाचिंता के मूल में। आकांक्षा मिश्रा

धरती की पीड़ा

May 11, 2022 0

जगन्नाथ शुक्ल, इलाहाबाद- हे कविते! सुन लो करुण पुकार, अचला धोती दृग निज अश्रुधार। माँ हूँ मैं यह कहते दानव मानव, नित करते फिर क्यों बंटाधार ? कविते! कविते! हे! कविते , मैं देती नित […]

ये कैसा रामराज्य है?

May 11, 2022 0

शालू मिश्रा, युवा कवयित्री, नोहर (हनुमानगढ़, राजस्थान) जो सारी धरती का स्वर्ग कहलाता है कश्मीर, दहशत की आग में आज जलता जा रहा है । उद्योगों से सज रहे है देखो अनेको नगर, गंगा का […]

जब मिलो तो मिलो दोस्तों की तरह

May 10, 2022 0

आदित्य त्रिपाठी- फूल बनकर खिलो एक कमल की तरह। कर दो शीतल सभी को विधु की तरह। आरजू है हमारी मेरे भाइयों। जब मिलो तो मिलो दोस्तों की तरह॥ था अभी पंक मे एक पंकज खिला। पंक बोला कि इससे हमे […]

कविता : मेरे कृष्ण कन्हाई

May 10, 2022 0

शालू मिश्रा नोहर, (हनुमानगढ़) राजस्थान काली अंधियारी रात को जन्म है जिसने पाया, भादो कृष्ण अष्टमी को उस दिन रोहिणी नक्षत्र आया। मोर मुकुट सिर धारण किया है कटि पे सुंदर लंगोट लिया है, कानों […]

ग़म में ग़ाफ़िल दीवाना

May 9, 2022 0

 डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ ग़म में ग़ाफ़िल दीवाना इतना, कि ग़म की अंधेरी रात में ग़म ही चिराग़ हो गया। जलती रही उसकी चिता रात भर बिना किसी के आग दिए ही अपने ग़म कि […]

जो भूखा न रहा उसे भूख का अहसास कहाँ

May 9, 2022 0

जगन्नाथ शुक्ल, इलाहाबाद- भूख तन में लगी हो या मन में लगी, बिन मिटाये ये ख़ुद से मिटेगी नहीं! जिसने ग़ुरबत के दिन हैं बिताये नहीं, क्षुधा ग़ैर की उसको दिखेगी नहीं! जिसका तन है […]

गहरी नदी और नाव पुरानी

May 9, 2022 0

अवधेश कुमार शुक्ला गहरी नदिया, नाव पुरानी । नाव चलाउब, हम का जानी । सखी, साथु जौ हमरो देतिउ, दुनिया मोरि न होति बिरानी ।। धारमधार अsधार न सूझी । चली एकला, राह न बूझी […]

वफ़ा ने फज़ा से पूछा सनम की आँखों का नूर कैसा है

May 8, 2022 0

जगन्नाथ शुक्ल, इलाहाबाद- वफ़ा ने फज़ा से पूछा सनम की आँखों का नूर कैसा है। फज़ाने जवाब दिया कसम से जन्नत के हूर जैसा है।। महबूबा की आँखों में अश्कों का समन्दर छुपा है बैठा। […]

“माँ” मेरी दुनिया

May 8, 2022 0

प्रांशुल त्रिपाठी : मां से बढ़कर इस दुनिया में मेरा कोई नहीं ,जब भी मैं रोया तो चुप कराई वहीं ।अपने दिल में छुपा कर हमें रखती थी वो ,लोगों की नजरों से बचाने के […]

पराये शहर मे

May 7, 2022 0

उस रोज दीवाली होती है —-प्रांशुल त्रिपाठी, विधि छात्रअवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा l एक दीप मन में भी जलायें क्यों जलाते हो मुझे “माँ” मेरी दुनिया

एक समीचीन अभिव्यक्ति :—–

May 6, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय बीभत्स चरित्रधारी!तुम्हारा चेहराआज दल-परिवर्त्तन करता-सा दिख रहा है।तुम्हारी अतिरिक्त महत्त्वाकांक्षा के कुकृत्यपैवन्द लगीं चादरें सुना रही हैं।लोलुपता और लिप्सातुम्हारे चरित्र की पटकथा कोआमिषाशी बना रही हैंतुम निष्ठुर और नृशंस बन […]

मुझे इन्सान ही बना रहने दो तुम

May 6, 2022 0

जगन्नाथ शुक्ल, इलाहाबाद उत्कृष्टता की थाह न है,मुझे इन्सान ही बना रहने दो तुम। घने जंगल के दरख़्त की तरह,मुझे अहर्निश खड़ा रहने दो तुम। जहाँ मन मे न हो गुमान कोई,हर मुश्किल में अड़ा रहने दो तुम। अहम की है […]

कुछ भी नहीं

May 6, 2022 0

न कोई शिकवान कोई शिकायत।न कोई दर्दन कोई हमदर्द।न कोई अपनान कोई पराया।न कोई सुखन कोई दुख।न कोई चोरन कोई शोर।न कोई राहीन कोई हमराही।न कोई जीतन कोई हार।न कोई रक्षकन कोई भक्षक। राजीव डोगरा(भाषा […]

वह वाक़िफ़ है, बस्ती मे नामर्द ही रहते हैं

May 6, 2022 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय नुमाइश करता और कराता है चालाकी से,पर्दा गिराता और उठवाता है चालाकी से।लोग उसके मुरीद अब भी हैं बनते देखो!कटोरा हाथ में थमवाता है चालाकी से।दर-दर की ठोकरें खाओ तो […]

बन्द बक्से से कुछ खत जो पुराने निकले

May 4, 2022 0

अनीता सिंह- बीते लम्हों का हिसाब मिलाने निकले गाँठ खोली तो यादों के खजाने निकले। जिन रकीबों को हम दर्द सुनाने निकले मेरी उम्मीद के कातिल वो पुराने निकले। जिनसे मिलने को हम कर के […]

तस्वीर ही जागीर

May 4, 2022 0

इस तस्वीर के पीछे एक और तस्वीर छुपी है, वो तस्वीर नही मेरी जागीर छुपी है। अरसे गुज़र गए जागीर की नुमाइंदगी में, हर रोज़ लगता तस्वीर और निखर गई है। राज®✍🏻

ये नेह-नेह के धागे

May 4, 2022 0

राज चौहान (नव कवि)- ये नेह-नेह के धागे, यारा तुमसे न टूटेंगे। हम साथ रहें, ना रहें, न रूठे हैं न रूठेंगे।। हर वक्त रहा है साथ तेरा, हर वक्त पे तुझको पाया है। कैसे […]

ग़ज़ल : खुद का जो हो न सका कैसे हमारा होगा

May 4, 2022 0

अनीता सिंह- जब भी शीशे में उसने ख़ुद को निहारा होगा मेरी आँखों के बिना कैसे संवारा होगा। आज लगता है ये पानी क्यों चाँदी चाँदी रात ने चाँद को दरिया में उतारा होगा। किसकी […]

कविता : नशा

May 3, 2022 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’  (यह रचना राघवेन्द्र की पुस्तक “विकृतियाँ समाज की” से ली गयी है)- सड़क के किनारे पड़ी थी एक लाश । उसके पास कुछ लोग बैठे थे बदहवाश । उनमे चार छोटे […]

ग़ज़ल : मैने देखा खून आज राह मे गिरा हुआ

May 3, 2022 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’–  मैने देखा ख़ून आज राह में गिरा हुआ, पूछा ख़ून किसका है कोई तो बताइए? क्या हुआ जो आप सब क्रोध में उबल रहे? व्यर्थ ही सामर्थ्य आप ऐसे ना जलाइये। […]

रतजगों की थकन

May 3, 2022 0

सत्याधार (युवा गीतकार)- बात बेबात पर दरकिनारी हुई । बेवजह बात उनसे हमारी हुई ॥ चन्द नगमें गढ़े, चन्द गजलें कही । इस तरह से खतम उम्र सारी हुई ॥ यूँ तो दफ्तर पहुँचता हूँ […]

गीत – आँसू और उदासी ने जब जीवन पथ पर साथ निभाया

May 2, 2022 0

सत्याधार- आँसू और उदासी ने जब जीवन पथ पर साथ निभाया, तो फिर इन्हें छोड़ खुशियों संग मैं विवाह कैसे कर लेता? आँसू बन जाते हैं स्याही , और रौशनाई होता दिल ! लेकर कलम […]

पहली पोस्टिंग

May 1, 2022 0

आकांक्षा मिश्रा गोंडा- तुम्हारी हर आकांक्षा पूरी अब हो सकेगी निःसन्देह , ये सच हैं , स्वीकार करना अभी मौन की स्थिति बड़ी दयनीय हैं जहाँ कोई उत्कंठा हैरत करती कितनी मन्नत पूरी करनी हैं […]

News Headlines : 30th April 2022

April 30, 2022 0

Remembering Khudiram Bose and Prafulla Chaki. On 30th of April, 1908 Khudiram Bose and Prafulla Chaki attacked carriage which they thought was carrying the infamous magistrate Kingsford. Prime Minister Narendra Modi says during Azadi Ka […]

मेरे पापा मेरी जान

April 30, 2022 0

मेरे पापा मेरी जान है,मेरे पापा मेरी शान है ,उन पर मेरा सब कुछ कुर्बान है।मेरे पापा मेरी दुनिया है,मेरे पापा मेरी धड़कन है,उनसे ही मेरी पहचान है।मेरे पापा मेरी हर खुशी है,मेरे पापा मेरे […]

संवाद के बहाने से

April 30, 2022 0

आकांक्षा मिश्रा – अल्का कोई दस्तक नहीं दी हैरानी की बात यह राज क्यों रखी ? खुली पलकों में अल्का देखों इस मनुष्य को कभी विफल नहीं हुए निराश क्यों ? कल्पना के अधीन होकर […]

कविता : आजकल का प्यार

April 30, 2022 0

राघवेन्द्र कुमार ‘राघव’- माँ के लिए नहीं कभी दो सौ रूपये की साड़ी, लेकिन वैलेंटाइनडे पर पाँच सौ रूपये का गुलाब । भौतिक तृष्णाओं का ये सजीला गुलदस्ता है, आजकल के प्रेम का है अपना ही […]

बहुत भड़का चराग़-ए-इश्क़ बुझाए जाने से पहले

April 29, 2022 0

मनीष कुमार शुक्ल ‘मन’ लखनऊ – बहुत भड़का चराग़-ए-इश्क़ बुझाए जाने से पहले | ग़ज़ब के हर्फ़ लिख डाले मिटाए जाने से पहले || सम्हाले दिल को रखना तुम कहीं ये टूट न जाए | […]

वो दिन भी थे ज़माना जब हमारी बात करता था

April 29, 2022 0

मनीष कुमार शुक्ल ‘मन’, लखनऊ- सुहाने पल न जाने क्यूँ ख़्यालों में नहीं आते | अन्धेरों में हैं खोए सब उजालों में नहीं आते || नहीं बुझती प्यास मेरी बहुत ज़्यादा मैं प्यासा हूँ | […]

मेरे शहर मे

April 29, 2022 0

आओ! कभी मेरे शहर मेंतुम को गैरों को अपना बनाकरदिल लगाना सिखाए। आओ!कभी मेरे शहर मेंतुमको हर एक शख्स़ सेमोहब्बत करना सिखाए। आओ!कभी मेरे शहर मेंतुम को नफरतों के बीच मेंपलता इश्क दिखाएं। आओ!कभी मेरे […]

खिल उठा देख कुमुद का यौवन

April 29, 2022 0

डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी- चाँदनी रात, महकता चंदन । खिल उठा देख कुमुद का यौवन। * हवा मे रात की रानी महकी दूर महका कोई सघन उपवन । * गर तेरे रूप की फुहार पड़े […]

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