आंतरिक गुलाम

August 16, 2024 0

आजाद हुए हम गैरों सेमगर अभी नही हुए औरों से।जीत चुके हैं हम औरों सेमगर हारे हुए हैंअभी अपने विचारों से।छोटे को बड़ा, बड़े को छोटासमझना अभी छोड़ा नहीं।जाति-पांति के कठोर नियमों सेमुख भी अभी […]

चीरहरण कर घूमते, बदल-बदलकर वेश!

August 15, 2024 0

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–देश ग़ुलामी जी रहा, हम पर है परहेज़।निजता सबकी है कहाँ, ख़बर सनसनीख़ेज़।।दो–लाखोँ जनता बूड़ती, नहीं किसी को होश।“त्राहिमाम्” हर ओर है, जन-जन मेँ आक्रोश।।तीन–प्रश्न ठिठक कर है खड़ा, उत्तर भी […]

कविता : जलप्रलय

August 10, 2024 0

मृत्यु तुम क्योंआ रही हो?यू क्यों बार-बारमुस्कुरा रही हो?क्या प्रलय करता हुआजल तुमको भाता है?क्या सड़ती हुईलाशें तुम्हें सुकून देती हैं?क्या तुमको कभीकिसी ने पुकारा है?क्या तुमको कभीकिसी ने ठुकराया है?किस क्रोध मेंतुम बरस रही […]

Friendship is more precious than every need

August 4, 2024 0

Dr. Raghavendra Kumar Raghav– On our motherland, friendship is a sacred creed.Friendship is more precious than every need.It is the greatest relationship that is pure and true.A treasure cherished, forever shining through.With devotion complete, every […]

कविता– तलाश

August 3, 2024 0

ढूंढने पर भी नहीं मिलतेवह लोग जो सत्य की बातसब से किया करते हैं। ढूंढने पर भी नहीं मिलतेवह लोग जो अपने होकरअपनापन दिखाया करते हैं। ढूंढने पर भी नहीं मिलतेवह लोग जो सच्ची मोहब्बत […]

Poem : Do good and think broad

July 31, 2024 0

Raghavendra Kumar ‘Raghav’– Be truthful always, human life we rare find.This is a glorious creation of God, one of a kind.Our purpose in life is to seek and to know.The truth that sets us free, […]

अभिव्यक्ति-दंश

July 20, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मेरी चित्रलेखा की खिलखिलाहटमुझे निमन्त्रण दे रही है–अज्ञात प्यास-कुण्ड मेनिमग्न हो जाने के लिए।सम्मोहक शक्ति के–संस्पर्श और संघर्षणमेरी देह के आचरण कीपट-कथा लिख रहे हैँऔर मै सूत्रधार-समअपनी ही पराजय कीपृष्ठभूमि […]

ताल ठोँकती हर नदी, डूब रहा हर गेह

July 19, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–टूट रहे तटबन्ध हैँ, जल का हाहाकार।प्रलय आँख मे नाचता, लिये मृत्यु आकार।।दो–चाहत पूरी कर रहा, ले निर्मम-सा रूप।जनता मरती देश मे, निर्दय कितना भूप।।तीन–हा धिक्-हा धिक्! कर रही, क्रन्दन […]

लुटती-पिटती-घिसटती मुसकान के मायने

July 19, 2024 0

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय– उसकी भूख से बिलबिलाती आँतेँ–अन्तहीन सिलसिला से संवाद करना चाहती हैँ।उसकी चाहत–चीथड़ोँ मे लिपटीँ-चिपटीँ-सिमटीँ;अपनी पथराई आँखेँ पालतीँ;टुकुर-टुकुर ताकतीँ;आँखोँ से झपट लेने की तैयारी करतीँ,मेले-झमेले की गवाह बनकर रह जाती हैँ।उसके अन्तस् […]

विलक्षण शब्दशक्ति

July 17, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••• शब्द की उष्मा;शब्द की कान्ति;शब्द की संगति;शब्द की ऊर्जा;सार्थक तभी होती हैजब शब्दकार–साधनापथ से आ जुड़ता है।शब्द सात्त्विक होता है,तुम ही अपने आचरण की सभ्यता मे रँगकर,उसे राजसी बनाते हो […]

Poem : Caravan

July 15, 2024 0

Dr. Raghavendra Kumar Tripathi Raghav– One walked, two walked and gathering grew,The caravan assembled, and onward it flew.This is the way to journey, on common ground,With every hand united, strength will be found. But when […]

याद रखना

July 14, 2024 0

मैं अभी औरऊंचा उठूंगायाद रखना। ये तख़्त-ओ-ताजअपने नाम करुँगायाद रखना। जो मोहब्बत हारी थीवो भी अपनेनाम करुँगायाद रखना। जो चेहरे आते हैं नदूर-दूर नज़रउनको भी अपनेकरीब करुँगायाद रखना। बहते थे नजो अश्कआंखों मेंउनको कोहिनूर करूंगायाद […]

आम

July 13, 2024 0

सीजन है आम का,डगरू के काम का ।पहली बार लेना स्वाद,इसको बहुत भाता है । आम लोगों के पास,आम लोगों में खास ।फलों का राजा,अपनी रानी को बुलाता है ।। देश में होने वाला,देशी ही […]

Time is passing

July 11, 2024 0

Raghavendra Kumar ‘Raghav’– The clock hand marches, minutes turn to hours.Seasons dance and twirl, adorned with floral powers.The world’s a shifting canvas, ever new and bold.Embrace each fleeting moment, stories yet untold. With open arms […]

अंतिम छाया

July 5, 2024 0

बीते हुए वक्त मेंबीता हुआहर लम्हा याद आएगा। बन गई है जो जगहआपके हृदय मेंवो बीता हुआहर कल औरआज याद आएगा। मुक्त हो जाएगेइस जहाँ से एक दिनऔर छुप जाएगेआपके हृदय की ओट में। फिर […]

काव्य-प्रेम

June 28, 2024 0

कब किताबों के पन्नो सेप्यार हो गयापता ही न चला। कब अल्फाज़ों कालफ्ज़ों से इकरार हो गयापता ही न चला। कब शब्दों कोमात्राओंं से इश्क़ हो गयापता ही न चला। कब प्रकृति कामानव से आलिंगन […]

Poem : Our mood

June 15, 2024 0

Dr. Raghavendra Kumar Tripathi ‘Raghav’— Colourful life because of mental bloom,Mood determine happiness or gloom.If mind accepts we troubles find,If rejects all leaves worries behind. So keep your mind calm and free,Smile like blossoms on […]

गर्माहट

June 14, 2024 0

बहुत अच्छा लगता है नतुमको जीवों कोपका करस्वाद से खाना। प्रकृति भी तोपका रही हैंअब तुमकोसूर्य की तप्त किरणों में। उसको भी तोथोड़ा स्वाद आना चाहिएतुम क़ो रुलाने में। बहुत अच्छा लगता है नतुमको चुपचापअग्नि […]

मुस्लिम मेरा यार

May 27, 2024 0

नेता बनना है तो काम करो, करने को काम हजार है,हिंदू मुस्लिम को ना बाँटो, मुस्लिम मेरा जिगरी यार है।साथ में रहते हैं हम कुछ ऐसे जैसे रहता परिवार है,मुझे पसंद है सेंवई ईद की, […]

घनघोर बादल कहाँ हो?

May 25, 2024 0

घनघोर बादलकहां हो?मानव दानव के लिए न सहीपर इस धरा के लिए सहीसब की प्यासबुझा दो। तप्त ऊष्मा सेमुरझा रही जोप्रकृति रूपसीउसको जराअपने शीतल स्पर्श सेसहला दो। जीव-जंतुओं केसूख रहे जो कंठसूर्य की तप्त किरणों […]

गुरु प्यारा

May 24, 2024 0

न देखा मैं सृजनहारान देखा मैं पालनहारामैं देखा अपना गुरु बलिहाराजिन भव पारमुझे उतारा। न देखा मैं राम प्यारान देखा मैं कृष्ण न्यारामैं देखा अपना गुरु प्याराजिन दरश दिखायाप्रभु तेरा हर रूप न्यारा। न देखी […]

O Lord! Give us strength

May 22, 2024 0

Raghavendra Kumar Tripathi ‘Raghav’ O beloved Motherland, I always bow to you,You have nurtured me with joy, so pure and true.O sacred land of great blessings, in your cause, my body I offer,To you, I […]

What is Dharma?

May 18, 2024 0

Raghavendra Kumar Tripathi ‘Raghav’– When someone asks what is Dharma and what it signifies?Say, it’s what we uphold, where true meaning lies.Following it brings us prosperity, freeing us from sorrow.Attaining supreme joy and bliss, into […]

आस्तीन के सांप

May 14, 2024 0

आस्तीन के सांप बन न डसा करोअपने हो तो अपने बन ही रहा करो। किसी वन के विषधर की तरहदांतों में विष छुपा न रखा करोजैसे हो वैसे ही बन रहा करो। सभ्यता का मोल […]

चला परिंदा घर की ओर

May 9, 2024 0

चला परिंदा घर की ओर,हरा भरा है मेरे घर का आंँगन,सुदूर भ्रमण कर आया ,नहीं दिखा मातृछाया जैसा कोई,जहांँ खुशियों का अंबार है,रिश्तो का लिहाज़ है ,संस्कार दिया है हम सबको,भूल कोई ना हमसे हो,कोई […]

life is like mirage

May 8, 2024 0

Composed By– Raghavendra Kumar Tripathi ‘Raghav’, Balamau In shimmering heat, a vision gleams.A lake of comfort, a land of dreams. Religion beckons, a promise untold.But closer you get, the water, it fold. A mirage, it […]

Me and My Sin

May 5, 2024 0

Raghavendra Kumar Tripathi Raghav– Within this body, sin takes hold,No carnal cravings leave me bold.These worldly ties, they bind and chain,From their embrace, I seek escape, oh pain! With faith and love, my spirit yearns,Redemption’s […]

उन्हेँ औक़ात पर अब लाइए साहिब!

May 3, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• उनकी बातोँ मे, मत आइए साहिब!उनके घातोँ मे, मत आइए साहिब!हर गोट के मिज़ाज से, वाक़िफ़ हैँ वे;भूलकर भी धोखा, मत खाइए साहिब!ख़ैरात भी माँगेँ, तो मुँह मोड़ लीजिए;उन्हेँ औक़ात […]

अजीब दास्तान

May 3, 2024 0

अंदर ही अंदर लोगकफ़न ओढ़ रहे हैमोहब्बत के नाम परदफन हो रहे है। देखते नहीं सुनते नहींसमझते भी नहींबस मोहब्बत के नाम परगम ढो रहे है। अपनों का परायों कायहां कोई भेद नहींअपने मतलब के […]

मतदाता सुनो!

May 1, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय अंकुश नहीँ जब़ान पे, बोलेँ ऊल-जुलूल।हवा घृणा की चल रही, पकड़ लिया है तूल।।मतदाता भी सोच मे, कौन हमारे साथ।दिखते सब बहुरूपिये, कहाँ दबायेँ हाथ?थू-थू सबकी हो रही, जीभ अभागी […]

मेरी कहानी के सभी किरदार स्वावलंबी हैं

April 23, 2024 0

मेरी कहानी के सभी किरदार विविध रंगों की भांँति हैं ,विसंगतियाँ होते हुए भी आपसी तारतम्यता की उनमें पराकाष्ठालक्षित है । मेरी कहानी की सभी किरदार मूक नहीं ,सीधा सपाट बयानी में प्रत्युत्तर देते हैं,सामाजिक […]

माँ

April 20, 2024 0

जो तुम जन्नत ढूंढ रहेवो सिर्फ मां के आंचल में। जो तुम मोहब्बत ढूंढ रहेवो सिर्फ मां की गोद में। जो तुम लगाव ढूंढ रहेवो बस माँ की आंखों में। जो तुम स्वर्ग ढूंढ रहेवो […]

मन्दिर-मस्जिद लड़ रहे, हर पल हर दिन रोज़

April 19, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–ध्यान बँटाने के लिए, तरह-तरह की खोज।मन्दिर-मस्जिद लड़ रहे, हर पल हर दिन रोज़।।दो–सत्ता चेरी दिख रही, चिपकी कुर्सी देह।रड़ुवा-रड़ुवी संग हैँ, माँग भरी है रेह।।तीन–ग़ज़नी-गोरी संग मिल, लूट रहे […]

कुछ सिसकियाँ हम तक रहें तो बेहतर है

March 31, 2024 0

●आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••• हमारी बात, हम तक रहे तो बेहतर है,हमारा साथ, हम तक रहे तो बेहतर है।चादर देखकर ही, पाँव हम पसारा करते,हमारा ख़्वाब, हम तक रहे तो बेहतर है।जनाब! आप तो हमारे […]

आओ हम स्कूल चलें, नवभारत का निर्माण करें

March 29, 2024 0

आओ हम स्कूल चलेनव भारत का निर्माण करें। छूट गया है जोबंधन भव काआओ मिलकर उसकोपार करें,आओ हम स्कूल चले॥ जाकर स्कूल हमगुरुओं का मान करेंबड़े बूढ़ों का कभी नहम अपमान करें,आओ हम स्कूल चले॥ […]

पकड़ गिराओ धर्मान्धों को!

March 25, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय केवल चन्दा, दिखता धन्धा;भक्ति-भाव है, मन्दा-मन्दा।भक्त और भगवान् का नाता;खेल खेलते गन्दा-गन्दा।अन्धभक्ति का खेल निराला;गले पड़ा ज्यों निर्मम फन्दा।पकड़ गिराओ बहुरुपियों को;रगड़ो जैसे रगड़े रन्दा।क्रान्ति-पलीता आग छुआ दे;लाओ कहीं से […]

सामना

March 22, 2024 0

रुख पहाड़ों की तरफ कियातो समझ आयाजन्नत इस धरा पर भी है। रुख बादलों की तरफ कियातो समझ आयाबदमाशी इनमें भी है। रुख बहती नदी की तरफ कियातो समझ आयाजीवन का बहाव इनमें भी है। […]

चिलमन उठा, ‘सच’ बयानात हो जाने दो

March 18, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• आँखों-ही-आँखों मे, रात हो जाने दो,या ख़ुदा! तसल्ली से, बात हो जाने दो।जिस मकाम पे, छोड़ आया था ज़िन्दगी,साहिब! इकबार मुलाक़ात हो जाने दो।भ्रम भी नसीहत दे रहा, उम्रे दराज़ […]

अटकाव

March 15, 2024 0

ताबीज तब ही काम आते हैंजब बोलने की तमीज हो।वक्त तब ही काम आता हैजब वक्त की कदर की हो।अजीज तब ही काम आते हैंजब उनमे तहजीब हो।भक्ति तब ही काम आती हैजब उसमें शक्ति […]

वसंत बेचारा संत!

March 14, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••• वसंतबेचारा संत हो गया।पंचमी का–वह कन्त हो गया।पतझर बौराया–वह अन्त हो गया।हा धिक्-हा धिक्!वह हन्त हो गया। (सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १३ मार्च, २०२४ ईसवी।)

शिव तो शिव हैं

March 8, 2024 0

शिव समान यह शिशु सुशोभित, वरदानी सा पुलकित है। शिव विग्रह के साथ स्वयं भी, दिखता अति आलोकित है। नमः शिवाय, ओम जागृत, महारात्रि पर अभिजित है। डमरू के डिमडिम स्वर सुनकर, विश्वधरा भी गुंजित […]

सदाशिव, सबका शिव

March 8, 2024 0

मैं कालों का काल हूँमैं ही तो महाकाल हूँ।सत्य का पालनहार हूँअसत्य का करतासदा विनाश हूँ।मैं देवों का देव हूँमैं ही तो महादेव हूँ।अंधकार में करता प्रकाश हूँअंत का भी करता आरंभ हूँतभी तो मैं […]

बंटवारा

March 3, 2024 0

आओ भईया खेत खाली, व्यापार सीजन ऑफ है।अपना तुम हिस्सा बंटा लो, जो हमारे पास है। माता पिता ने जो संजोया, आपका अधिकार है।जो भी हिस्से में मिले, सबको वही स्वीकार है।। घर – खेत […]

सामंजस्य

March 1, 2024 0

जब आहत हृदयश्मशान बन जाए तोउसमें लाशे नहींभावनाएं राख हुआ करती है। जब विश्वासी हृदय मेंबिखराव आ जाए तोअपने और पराए नहींबस मौन रहा करता है। जब वेदिती हृदयराख बन जाए हैसुख और दुख नहींबस […]

चिलमन को सो लेने दो

February 24, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••• आँसू की तबीअत नासाज़ है पलकों को न छेड़ो। उसके गेसू मे इक अजीब-सी लर्जिश† की बुनावट है। ज़ख़्मी बूढ़े दरख़्त को, सिसकियाँ भर लेने दो। शम्अ न बुझाओ, तक्रीज़‡ […]

गणितसूत्र समझाता वय-वार्द्धक्य

February 24, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• मन को तराशता हूँकसैला बिम्ब दिखता है।बूढ़े पलंग पर लेटा वय-वार्द्धक्यचुपके से जीने का गणितसूत्र समझाता है।मनमोहिनी माया मस्तिष्कतन्तु को,रुई का फाहा बनाकरआहिस्ते-आहिस्ते सरकाती है।अराजक ऐन्द्रियिक तत्त्व,सक्रिय होने लगते हैं।जीवनीशक्ति […]

बदलते जज्बात

February 23, 2024 0

आजकल बदलने लगे हैंतेरे अल्फाजतेरे शहर के मौसम के तरह। आजकल बदलने लगा हैतेरा अंदाजगिरगिट के रंग की तरह। आजकल बदलने लगा हैतेरा इश्कतेरी बेवफाई की तरह। आजकल बदलने लगा हैतेरा व्यवहारतेरी निग़ाह की तरह। […]

बेचैन धार नदी-संग करवटें बदलती रही

February 21, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••• महब्बत को क़ब्रगाह मे दफ़्न कर लौटे हैं, ज़ख़्मी पाँव अभी, थोड़ी साँस उधार मे दे दो, सुबूत हैं आख़िरी दाँव अभी। परछाईं लगना चाहती है गले, शिद्दत से बूढ़े […]

मेरी जीत भी मेरी हार भी

February 19, 2024 0

कोई कह दे कि शाम हो गई हैअब यकीन नही होता।कदम-कदम पर अब तो बड़ा फरेब होता।चले कहाँ के लिए और आ गये कहाँखुशियों की चादर पर कोई सितारा दिखेये सितारे गगन को चूमते हैं।आँचल […]

Sanatan teachings are the ancient way of life

February 18, 2024 0

Raghavendra Kumar Tripathi ‘Raghav’ Sanatan teachings are the ancient way of life. Embracing both the form and formless divine. God’s essence, soul’s liberation, profound. Sanatan Dharma, the path profound. In saguna and nirguna, God resides. […]

दस्तूर

February 9, 2024 0

बहता है दर्द तोलफ़्ज़ों में पिरो दोझरता है इश्क़ तोअल्फाज़ो में बटोर लो। मिलता नहीं कोईशख्स इश्क करने कोतो ख्वाबों मेंकिसी से इजहार कर दो। मिलता नहीं कोई अपनाहाल-ए-दिल बतलाने कोतो परायों से थोड़ीगुफ्तगू कर […]

ज़िन्दगी का मक़्सद बन!

February 6, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• घिसटते हुए टायर की तरह ज़िदगी जीनेवालो! अपने भीतरभरी हवा की इज़्ज़त करना सीखो। फटे बाँस की तरह चरचपर चरचरमरमर करती ज़िन्दगी, एहसासात को छूती तो है, बूझती नहीं; ताड़ती […]

सत्तालोभी दिख रहे, जनता-हित है गोल

February 6, 2024 0

——० यथार्थ-दर्शन– छ: ०—– ★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–आँखों-अन्धे नयनसुख, मनमिट्ठू के बोल।सत्तालोभी दिख रहे, जनता-हित है गोल।।दो–रागी-वैरागी यहाँ, रँड़ुओं का संसार।कामी-कंचन-कामिनी, माया अपरम्पार।।तीन–नेता आतंकी बने, बाँट रहे हैं देश।बोल विषैले बोलते, नक़्ली दिखते […]

मेरा जमाना

February 2, 2024 0

मुझे वो पगडंडियाँअब दिखती नहींजिन पर मैं चला करता था। मुझे वो आम के बागअब नहीं मिलतेजिन्हें देख नन्हे मन मचलता था। मुझे वो नदियांअब नहीं मिलतीजिनमें बाल-गोपाल नहाया करते थे। मुझे वो सुकून की […]

नज़रें जिधर घुमाइए, दिखते चोर-दलाल

February 2, 2024 0

——० यथार्थ-दर्शन– पाँच०—– ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–जनता हालत दिख रही, मानो हुई हलाल।नज़रें जिधर घुमाइए, दिखते चोर-दलाल।।दो–छीलो कटहल बैठकर, देखो नंगा नाच।चड्ढी टँगती खूँट पे, फोड़ो सिर पर काँच।।तीन–कोई हो राजा-प्रजा, नहीं दिखे […]

बदले अन्दाज़ हैं; भाँपिए ज़रूर

February 1, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• सीरत की बनावट पे मत जाइए,सूरत की सजावट पे मत जाइए।महब्बत की राह मे हैं धोखे बहुत,नज़रों की बुनावट पे मत जाइए।प्यासे हैं तो पीकर खिसक लीजिए,नदियों की गुनगुनाहट पे […]

देखो जनता बँट गयी, धर्म, वर्ग औ’ जाति

January 31, 2024 0

——-० यथार्थ-दर्शन ०——- ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–राजनीति की कोठरी, कितनी है बदरंग!चेतन-पक्ष अलक्ष है, कूप पड़ी है भंग।।दो–जनहित दिखता है कहाँ, प्रतिनिधि बिकते रोज़।गुण्डे-लम्पट हैं दिखे, कौन करेगा खोज?तीन–दिखे कुशासन देश मे, न्याय […]

जनता हालत यों दिखे, रहा गिद्ध ज्यों नोच

January 29, 2024 0

——–० यथार्थ-दर्शन ०——- ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–महँगाई है मारती, भूख करोड़ों लोग।कुछ मरते हैं भोग से, कुछ मरते हैं रोग।दो–सिर पर छत दिखती नहीं, आस एक विश्वास।अपने मन के सब यहाँ, नहीं दिखे […]

व्यक्तित्त्व का डर

January 26, 2024 0

धूप में तपा हुआ आदमीछाया में झुलस रहा है। हवा में बहता हुआ आदमीतूफानों से डर रहा है। आग से पका हुआ आदमीधूप में जल रहा है। अपनी बातों सेजख्मी करने वाला आदमीतलवार की नोक […]

जो बच गये हैं पल, उन्हें अब तो मोलिए

January 25, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••• होठों को दे ज़बाँ, अजी! कुछ तो बोलिए,बन्द कोठरी मे राज़, ज़रा उनको खोलिए।बेहोश थे तब आप, बड़े बोल बोले थे,बाहोश अब आप, उन शब्दों को तोलिए।ग़फ़्लत मे पड़कर वक़्त, […]

हमारा तिरंगा

January 24, 2024 0

आजादी की है शान तिरंगा।भारत देश की है शान तिरंगा।घर-घर में लहराये तिरंगा।हमको जान से प्यारा तिरंगा।दुनिया में सबसे है न्यारा तिरंगा।सबकी आँखों का है तारा तिरंगा।तिरंगा कितना प्यारा हमारा।तीन रंग का मेल है सारा।सदा […]

कच्ची कविता : गणतंत्र दिवस

January 24, 2024 0

गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को मनाया जाता है। भारत में बड़े उत्साह से झंडा फहराया जाता है। इस राष्ट्रीय त्योहार को बच्चे स्कूल झंडे लाते है। 26 जनवरी को देशभर में प्रोग्राम किए जाते हैं। […]

सुन राम!

January 22, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••• राम!तू राम नहीं, ‘मरा’ है।भूल जा!‘मरा-मरा’ कहनेवालेकभी ‘राममय’ हो जाया करते थे,तब ‘सच्चरित्र’ होता था;होती थी, ‘सदाचरण’ की सभ्यताऔर होती थी, धर्म के मर्म की समझ।तेरा नायकत्व,प्रतिनायकत्व का रूप ले […]

राम-राम

January 20, 2024 0

राम-राम करते होतुम रावण बनने केलायक भी नहीं।ज्ञान-ज्ञान करते होतुम अज्ञानी बनने केलायक भी नहीं।ध्यान-ध्यान तुम करते होतुम ज्ञान केलायक भी नहीं।स्वयं को न जानान ही पहचाना कभीफिर भी महाज्ञानीबने फिरते हो।राम तो कण-कण में […]

बिल्ली घण्टी बाँधने, पहल करेगा कौन?

January 18, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–राम सिया-बिन किस लिए, प्रश्न उछलता रोज़।मुँह-दरवाज़े बन्द हैं, कौन करेगा खोज?दो–मन्दिर दिखे अपूर्ण है, प्राण-प्रतिष्ठा-प्रश्न।मूल समस्या गर्त मे, मना रहे सब जश्न।।तीन–राजनीति की गोद मे, खेल रहे हैं राम।उल्लू […]

अजीब मोड़ पे, दिखी ज़िन्दगी

January 16, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••• होठ बुदबुदाये, कह न सका,भाव उमड़ाये, बह न सका।विचार फैले, चादर हो गये,सिकोड़े थे, पर तह न सका।बूढ़े ज़ख़्म, नासूर बन गये,दबाया ज़रूर, सह न सका।संदेश बहुत, राम-रहीम के,ज़ेह्न बेचारा, […]

कविता– मकर-संक्रान्ति

January 14, 2024 0

मकरसंक्रांति का दिनहै आया ,पूरा भारत है हर्षाया।शीत ऋतु अब जाने को है,कुछ ऐसा सन्देशा लाया। गंगा का अवतरण दिवस है,सगरपुत्रों का तरण दिवस है।गंगा सागर अवगाहन का,एक मात्र यह पुण्य दिन आया। मकरसंक्रान्ति का […]

आन्तरिक गुनहगार

January 13, 2024 0

उन्होंने कहाहम बहुत अच्छे हैंहमने कहाहोंगे अपनी नजर में। उन्होंने कहाहम दिलकश इश्क करते हैंहमने कहाकरते होगे गैरों से। उन्होंने कहाहम सिकंदर हैं हर काम मेंहमने कहाहोगे बस इस दुनिया के। उन्होंने कहाहम जानते हैं […]

कविता : फ़र्क

January 5, 2024 0

जमीन और आसमान मेंफर्क होता है।झूठ और सच मेंफर्क होता है।मोहब्बत और नफरत मेंफर्क होता है।अपने और पराये मेंफर्क होता है।जीत और हार मेंफर्क होता है।दिमाग और दिल मेंफर्क होता है।जायज और नाजायज मेंफर्क होता […]

है निशि-दिवा-सी घूमती सर्वत्र विपदा-सम्पदा

January 1, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–साथ-साथ चलता रहा, वर्ष-हुआ अवसान।मन-मंथन मथता रहा, कहाँ मान-अपमान?दो–घूँघट काढ़े मौन है, अवगुण्ठन-सी देह।सहमे-सकुचे धर रहे, पाँव-पाँव अब गेह।।तीन–मलय मन्द मुसकान ले, बढ़े जोश के साथ।जन-जन अगवानी करे, झुका-झुका कर […]

अवसान को प्राप्त हुए मेरे सहयात्री!

January 1, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• विश्वसनीय एकवर्षीय सहयात्री!अपने बलिष्ठ कन्धों पर,तीन सौ पैंसठ दिवसीय अनियन्त्रित-नियन्त्रित भारप्रतिक्षण लादकर,अनवरत-अनथक यात्रा करते-करते,तुम अतीतोन्मुख हो चुके थे।त्वरित गति मे कृषकाय१ होते,तुम्हारे स्कन्धप्रान्त२,क्लान्त३ होते अनुभव करा चुके थे।तुम श्रान्त ४ […]

नया वर्ष

December 30, 2023 0

नया वर्ष नया पैगाम लाया है।नफरत नहीं मोहब्बत काएहसास लाया है।नया वर्ष नया जुनून लाया है।हार नहीं जीत काख्वाब लाया है।नया वर्ष नयी बहार लाया है।खिलती नहीं जो कलियांउनको फूल बनाने आया है।नया वर्ष नया […]

दौड़ गया जो कठिन डगर पर, यहाँ विजेता बना वही

December 27, 2023 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’– चलने वाले ही गिरते हैं, डरने वाला चला नहीं।हार गया जो देख मुसीबत, यहाँ अपाहिज बना वही। मेहनत का फल मीठा होता, राह किन्तु थोड़ी है मुश्किल।दौड़ गया जो कठिन डगर […]

अर्ज़ किया है

December 25, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–इधर चंचल हवा, उधर शोख़ अदा,हालात बन गये, जाएँ तो कहाँ जाएँ ?दो–शाम का घनेरा ग़ज़ब, हवा के तेवर कसे हुए,एक ग़रीब के कफ़न से, सूरज ने आँसू पोछे हैं।तीन–मैने […]

मुश्किल

December 23, 2023 0

मुश्किल से तुम आए होमुश्किल से हम आए हैंमोहब्बत नहीं है दो तरफाफिर भी हमइश्क अपना आजमाएंगे। मुश्किल से रास्ता मिला हैमुश्किल से सफर शुरू किया हैहमसफर नहीं है कोईफिर भी हमजुनून अपना आजमाएंगे। मुश्किल […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की दो कविताएँ

December 22, 2023 0

(एक)जंगल का क़ानून•••••••••••••••••••••••••••••••• जंगल का मिजाज़,बेख़ौफ़, आवारा-सी दिखती हवा के इर्द-गिर्दसिमटकर रह गया है।कल तक जो जंगली पेड़ों के पत्ते हिलते थे; सरसराते थे,अब चुप, मौन, डरे-डरे, सहमे दिख रहे हैं।ख़ून खौलाता दहाड़ सुनो!उस मक्कार-शातिर […]

Tellings of Guru Rabindra Nath Tagore

December 18, 2023 0

Raghavendra Kumar Tripathi ‘Raghav’– Beyond shiny toys and gold so bright, There’s a deeper joy, a special light. Not in grabbing stuff, but lending a hand, Doing good things across the land. It’s not about […]

स्वयं

December 15, 2023 0

हर जगहमैं ही सही हूँखुदा थोड़ी हूँ ।हर जगहमैं ही गलत हूँइतना बुरा थोड़ी हूँ।हर जगहझुक जाऊंइतना गिरा थोड़ी हूँ।हर जगहमैं जीत जाऊंइतना बड़ा सिकंदर थोड़ी हूँ।हर जगहमैं हार जाऊंइतना बुज़दिल थोड़ी हूँ।हर जगहमैं सहम […]

तान लो मुट्ठी और दिखा दो ताक़त!

December 14, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मुट्ठी तान लो!मरी हुईं अँगुलियों के इर्द-गिर्दमक्खियाँ भिनभिनाती हैं।पुरुषार्थ के अंगारे को चूम लो!राख मे दबी हुई चिनगारी कोअलसाने मत दो।हर खेत मे,चिनगारी की सुगबुगाहट बो दो।हवा अपना रास्ताख़ुद-ब-ख़ुद तलाश […]

हिन्दी कविता– अस्तित्व

December 8, 2023 0

किसी के पासजब कुछ बचता नहीं।बुलाए तब कोईमैं इतना सस्ता नहीं। माना कि प्रेम चाहिएजीवन में।मगर मांगना पड़ेभीख की तरह,वो भी जँचता नहीं। माना कि जीवन मेंकुछ चीजेंहासिल नहीं हुई।फिर भीदेखकर औरों की तरक्कीमैं कभी […]

हिमाचल गान

December 3, 2023 0

उच्च हिमालय, बहती नदियांकल-कल करतीझरनों की आवाजें।फैली हरियाली, सुगंधित सुमनमहके समीर, बहकी कलियाँऐसी गोद हिमाचल की।जय जय जय हिमाचल की। ऊंचे वृक्ष, नीची नदियांकर्कश ध्वनि करती चट्टानेचहकते पक्षी, महकती फसलेंसरसराहट करता पानी।गरजते बादल, बरसते घनऐसी […]

बिनब्याही अपूर्णता

November 28, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• सुनो न!तुम्हारी पूर्णताभाती नहीं मुझे;क्योंकि तुम मुझसेद्रुत गति मे चलायमान हो।हाँ, मै अपूर्ण हूँ।तुम मुग्ध हो, अपनी पूर्णता परऔर मुझे गर्व है, अपनी अपूर्णता पर;क्योंकि आज मुझेएहसास हो रहा है […]

मन से मन की

November 28, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• मेरी अनहद१ बाँसुरीप्रलय की धुन सुनाती है।कातर२ आँखें,जन-जीवन से पृथक्दृष्टि-अनुलेपन३ करती हैं,काल के कपोलों पर।मुझ पर दृष्टि चुभोती,विहँसती, अल्हड़ गौरैयापंख झाड़, फुर्र हो जाती है।मेरे मन को तलाश↑ है,एक निस्तब्ध४-निस्पन्द५नीरव६-निभृत […]

जनता निचुड़ी जा रही, सुधि लेगा अब कौन?

November 27, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–राजनीति को क्या कहें, शब्द सभी हैं मौन।जनता निचुड़ी जा रही, सुधि लेगा अब कौन?दो–मुख पर चुगली नाचती, लिये पनौती माथ।वाम विधाता दिख रहा, छोड़ेंगे सब साथ।।तीन–अस्ली-नक़्ली सब यहाँ, भेद […]

जीवंत जीवन

November 24, 2023 0

बढ़ गए जीवन में तोउड़ते रहोगेजीवंत पक्षी की तरह।नहीं तो टूट करबिखर जाओगेकिसी शाख केमुरझाये पत्ते की तरह। जीवंत हो तोजीना पड़ेगासूर्य चांद की तरह।नहीं तो पड़े रहोगेश्मशान कीजली-बुझी हुईराख की तरह। जीवंत हो तोमहकते […]

कविता : दौर

November 21, 2023 0

एक दौर आएगा मेराएक शोर आएगा मेरा। समझते थे जो मुझेऔरों से भी कमजोरइतिहास-ऐ-पन्नों परअब नाम आएगा मेरा। एक वक्त थाकि लोग ना जानते थेना ही पहचानाते थेपर वक़्त के हर पनें परअब नाम आएगा […]

हारे को हरिनाम

November 15, 2023 0

कहु सजनी , अब कहँ – कहँ खोजूँ,तन – मन को विश्राम ।जहँ – जहँ जाउं, तहाँ – तहँ भटकन,हारे को हरिनाम ।।राम, कहँ पावै मन विश्राम ।। भाषा मौन , मौन परिभाषा युक्त,हो चला […]

कविता : दीप

November 12, 2023 0

सुनो!दीपों का त्यौहार आ रहा हैकुछ रोशनीअपने अंदर भी कर लेना। सुना है !अंधकार बहुत हैतुम्हारे अंदर भीतभी दिखता नहीं तुम्हेंऔरों का व्यक्तित्व । मगर दिख जाता हैसत्य की रोशनी मेंऔरों को तुम्हारा अहम। क्या […]

नासमझ इश्क

October 28, 2023 0

हम ढूढ़ते रह गएउनको हर निग़ाह में,पर वो तो खो ही गएओर किसी की बाहों में। हम ने तो हमेशा उनसेइक़रार ही किया थापर वो ही हर बारइन्कार ही करते रह गए। हमने तो खो […]

दिल की बातें ‘दिल’ से-दिल पे

October 22, 2023 0

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–कुछ कहने पे ज़बाँ, साथ देती ही नहीं,आँखें भी मुँह फेर लेती हैं, चुप रहने पे।दो–वे जब भी मिले, आँखें बदल-बदल कर,न कहीं इंकार मिला, न कहीं इक़्रार दिखा।तीन–उनके इस्रार का […]

ये सारा ब्रह्माण्ड ही माँ दुर्गा का विस्तार

October 21, 2023 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’– इस भौतिक संसार में सब कुछ है बेकार। जिसने जगदम्बा को याद किया उसका बेड़ा पार। ये सारा ब्रह्माण्ड ही माँ दुर्गा का विस्तार। माँ को जिसका साथ मिला उसका हुआ […]

रक्त रंजित यह धरा किसके कहे उसकी हुई?

October 11, 2023 0

रक्त रंजित यह धरा किसके कहे उसकी हुई? ख़ून की हर बूँद न इसकी हुई न उसकी हुई। मर गए जो, वो भी इंसान थे, मारने वाले जिन्हें ज़रा से, मुठ्टीभर शैतान थे। यह संघर्ष […]

I sing the songs of pain.

October 8, 2023 0

Poem—. I sing the songs of pain I tune my instrument with sorrow’s rain. The pain inflicted by our own. I bring pain in songs, well known. I sing the songs of pain. Composed by– […]

“कविता वही, जिसमे कवि बस जाता हो”― आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

October 7, 2023 0

पूर्व-प्राचार्य एवं कवि डॉ० वीरेन्द्र मिश्र ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य मे कहा, “प्रियंवदा पाण्डेय की कविताओं मे समय की अनुगूँज सुनायी पड़ती है।”

Poem : Essence of Love

October 5, 2023 0

In love’s embrace, we falter and sway, A puzzle of emotions, we struggle to convey. Love’s true essence, elusive and deep, A symphony of secrets, where our hearts keep. I cherish you more than words […]

Ode to Our Parents, Our Timeless Deities

October 4, 2023 0

Our parents, deities we cherish and adore, Their legacy unbroken, forevermore. With each passing day, our devotion grows deep, Their wisdom’s guidance, our hearts it keeps. Though humble their form, their vision so grand, They […]

वो लड़की हूँ

September 29, 2023 0

हाँ मैं एक लडक़ी हूँहाँ मैं वो ही लडक़ी हूँजो अपनी हो तोचार दीवारी में कैद रखतें हो।किसी ओर की हो तोचार दीवारी में भीनज़रे गड़ाए रखतें हों। हाँ मैं एक लडक़ी हूँहाँ मैं वो […]

वन्दन का क्रन्दन!

September 26, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• वन्दन! विरूप सर्जन? तेरा बार-बार अभिनन्दन। वन्दन! काया-स्यन्दन१? तेरा बार-बार अभिनन्दन। वन्दन! नेत्रहीन-अंजन? तेरा बार-बार अभिनन्दन। वन्दन! उधार का मंजन? तेरा बार-बार अभिनन्दन। वन्दन! विद्रूप रंजन? तेरा बार-बार अभिनन्दन। वन्दन! […]

खोटी नीयत

September 21, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• साहिब!देखते-ही-देखते,‘इण्डिया’ प्रौढ़ हो गया।उसकी जड़ें भी,कश्मीर से कन्याकुमारी तक फैल चुकी हैं;सागर की गहराई-सा गाम्भीर्य है;उसके तने,आकाश की ऊँचाई-से शिखरस्थ हैं।आस-पास का माहौल :–बिगड़ा-बिगड़ा,उद्दण्ड-उद्धत, जंगली-सा दिखता है।ज़ह्रीले साँप भी फन […]

शब्द बना लो तीर

September 20, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–जीवन जड़वत् दिख रहा, बहे नेत्रजल धीर।जोड़ो मन को क्रान्ति से, शब्द बना लो तीर।।दो–बलखाती इठला रही, सरिता संंचय नीर।आँगन बैठी धूप है, आकुल हुआ शरीर।।तीन–मृग-मरीचिका चाह है, मन-गति दिखता […]

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