पर पीड़ा सम नहिं अधमाई

July 19, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– मनुष्य का जीवन केवल अपने अस्तित्व को बनाए रखने का नाम नहीं है; उसका वास्तविक उद्देश्य अपने अस्तित्व को दूसरों के लिए सार्थक बनाना है। इसीलिए कहा गया है कि इस […]

सगुण और निर्गुण मे कोई भेद नहीं

July 17, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– भारतीय दर्शन का मूल आधार यह है कि परम सत्य सीमित नहीं है। उसे न केवल किसी एक नाम, रूप, स्थान या उपासना-पद्धति में बाँधा जा सकता है और न ही […]

सनातन धर्म, भारतीय दर्शन और आत्मबोध की परंपरा के आलोक में दिव्य जीवन का प्रथम चरण

July 14, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– भारतीय दर्शन का मूल प्रयोजन केवल तात्त्विक विमर्श या बौद्धिक जिज्ञासा की तुष्टि नहीं है, अपितु मानव जीवन को उसके परम पुरुषार्थ—आत्मसाक्षात्कार एवं ब्रह्मानुभूति—की ओर उन्मुख करना है। भारतीय मनीषा के […]

सीता का धर्म, प्रकृतिज्ञान, लोककल्याण और नारीशक्ति

July 13, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– दण्डकारण्य में प्रवेश करते-करते अनेक सप्ताह बीत चुके थे। अब वन ने इन तीनों यात्रियों को स्वीकार कर लिया था। जहाँ पहले पक्षी उड़ जाते थे, अब वे समीप बैठ जाते। […]

भूमि का भार उतारने को भूमिजा का प्रण

July 11, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– चित्रकूट पीछे छूट चुका था। अब वन का स्वरूप बदल रहा था। यहाँ वृक्ष अधिक विशाल थे। उनकी जटाएँ मानो धरती को आलिंगन करती थीं। लताएँ शताब्दियों पुराने वृक्षों से इस […]

अनसूया और सीता : धर्म की अधिष्ठात्री का ज्ञानाभिषेक

July 10, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– चित्रकूट की वंदनीय भूमि से आगे बढ़ते हुए जब श्रीराम, लक्ष्मण और सीता महर्षि अत्रि के आश्रम पहुँचे, तब संध्या अपने सुनहरे चरण धीरे-धीरे वनभूमि पर रख रही थी। पश्चिम दिशा […]

पुत्रि! पवित्र किए कुल दोऊ

July 9, 2026 0

चित्रकूट का वन उस दिन असाधारण रूप से शांत था। वायु जैसे अपने वेग को रोककर किसी महान संवाद की प्रतीक्षा कर रही थी। मंदाकिनी का जल सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक निर्मल प्रतीत होता […]

ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या जीवो ब्रह्मैव नापरः

July 6, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– सूर्य की प्रथम किरण हिमालय की पर्वत-श्रृंखलाओं को स्वर्णिम आभा से आलोकित कर रही थी। पहाड़ों के बीच स्थित एक छोटा-सा गाँव शिवपुर अपनी सहज सरलता और प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए […]

प्रकृति, करुणा और कर्तव्य की दृष्टि मे धर्म का वास्तविक स्वरूप

July 4, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– मानव सभ्यता के विकास के साथ धर्म ने अनेक रूप धारण किए हैं। समय, समाज, परंपराओं और विभिन्न मान्यताओं ने धर्म की व्याख्याओं को विस्तृत भी किया और कई बार जटिल […]

सीता : ऋषियों के मध्य धर्म की अधिष्ठात्री

July 3, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– चित्रकूट में समय धीरे-धीरे बीत रहा था। अब वन के ऋषियों ने यह अनुभव करना प्रारम्भ कर दिया था कि श्रीराम के साथ केवल एक राजकुमार और एक राजकुलवधू नहीं आई […]

धर्म की रक्षा के लिए दण्ड भी आवश्यक : सीता

July 2, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वन का विस्तार जितना सुंदर था, उतना ही भयावह भी। एक दिन प्रातःकाल सीता आश्रम से कुछ दूर वनौषधियाँ एकत्र करने निकलीं। उनके साथ कुछ ऋषि-पत्नियाँ भी थीं। मार्ग में उन्हें […]

भूमिसुता का मौन और प्रकृति का शोर

July 1, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वन की वह संध्या अत्यन्त विलक्षण थी। आकाश पर धूसर मेघों की पतली परतें तैर रही थीं। सूर्य अस्ताचल की ओर झुक रहा था, पर उसकी लालिमा मानो धरती के हृदय […]

अयोध्या की पुत्रवधू “धर्म की जननी”

June 29, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव-– संध्या उतर रही थी। सूर्य धीरे-धीरे पश्चिम के पर्वतों के पीछे विलीन हो रहा था। आकाश में लालिमा थी, पर वह लालिमा भी जैसे विरह का रंग धारण कर चुकी थी। […]

आत्मबोध : समस्त खोजों का अंतिम सत्य

June 27, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– मनुष्य के जीवन की सबसे सूक्ष्म और गहन भूल यह नहीं है कि वह संसार को पर्याप्त रूप से नहीं जानता, बल्कि यह है कि वह स्वयं को जाने बिना ही […]

मानव जीवन की सार्थकता : सम्मान, सद्भाव और करुणा पर आधारित एक आध्यात्मिक दृष्टि

June 24, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– मानव जीवन केवल जन्म, भरण-पोषण, उपलब्धियों और भौतिक सफलताओं की यात्रा नहीं है। इसकी वास्तविक सार्थकता उस चेतना में निहित है, जो हमें स्वयं से आगे बढ़कर दूसरों के सुख-दुःख, अधिकारों, […]

और मेरा सत्य राम हैं

June 21, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– सुमन्त्र मौन थे। वन की निस्तब्धता और भी गहन होती जा रही थी। वृक्षों की छाया मानो स्वयं इस संवाद को सुनने के लिए ठहर गई थी। मंद पवन बह रही […]

वन की प्रथम रात्रि : सीता के अन्तर्मन का द्वंद्व

June 20, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रात्रि अपने पूर्ण विस्तार पर थी। आकाश तारों से भरा हुआ था। ऐसा प्रतीत होता था मानो अनन्त ब्रह्माण्ड अपनी असंख्य आँखों से पृथ्वी की ओर देख रहा हो। राम निद्रा […]

सीता : प्रेम, धर्म और वियोग की अग्नि में तपता हुआ स्वर्ण

June 17, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– सुमन्त्र का रथ दृष्टि से ओझल हो चुका था। वन की निस्तब्धता में अब केवल पत्तों की हल्की सरसराहट थी। किन्तु उस निस्तब्धता के भीतर भी सीता के हृदय में असंख्य […]

रामायण : स्थान सुख नहीं देता अपितु साथ सुख देता है

June 15, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– आर्य सुमन्त्र मौन थे। उनके पास शब्द थे, पर वे शब्द जैसे अपने अर्थ खो चुके थे। वे सीता के मुखमण्डल को देख रहे थे—वह मुख, जो राजमहलों की सुख-संपन्नता में […]

प्रेम, वियोग और मौन

June 14, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– अयोध्या से दूर वन के उस निर्जन प्रदेश में जीवन धीरे-धीरे अपनी नई गति ग्रहण कर रहा था, किन्तु स्मृतियाँ अभी भी पीछे नहीं छूटी थीं। वे कभी शीतल पवन की […]

जहाँ राम हैं, वहीं अयोध्या है

June 12, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वन की ओर बढ़ते रथ के पहिए केवल धूल नहीं उड़ा रहे थे, वे इतिहास की दिशा बदल रहे थे। अयोध्या पीछे छूट रही थी और सामने था अनिश्चितताओं से भरा […]

सीता और सुमन्त्र संवाद

June 11, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वन की ओर जाने वाले उस मार्ग पर सूर्य अस्ताचल की ओर झुक रहा था। रथ के पहियों से उठती धूल मानो अयोध्या की स्मृतियों को अपने साथ लिए चली जा […]

प्रेम मे अधिकार नहीँ तो वियोग मे कष्ट क्योँ

June 10, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रात्रि उतर आई थी। आकाश में असंख्य तारिकाएँ जगमगा रही थीं। मंदाकिनी का जल अब चाँदी-सा चमक रहा था। दूर कहीं किसी पक्षी की करुण पुकार सुनाई दी और फिर समूचा […]

धर्म, सत्य और तर्क की महागाथा

June 9, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– अयोध्या नगरी उत्सवों से सजी रहती थी। महाराज दशरथ के राज्य में प्रजा सुखी थी। चारों राजकुमार राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न राज्य का प्राण थे। उनमें भी श्रीराम सबसे प्रिय […]

आसक्ति, प्रेम और त्याग : आध्यात्मिक जीवन का सत्य

June 8, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– मानव जीवन भावनाओं, इच्छाओं, संबंधों और अनुभवों का अद्भुत संगम है। मनुष्य जन्म लेते ही किसी न किसी प्रकार के लगाव से जुड़ना प्रारम्भ कर देता है। पहले माता-पिता से, फिर […]

तेरे नाम के सहारे, तरते हैं लोग सारे

May 1, 2026 0

रचनाकार– डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव तेरे नाम के सहारे, तरते हैं लोग सारे।ओ! भोले हमारे, ओ! शिव जी हमारे।तेरे नाम के सहारे, तरते हैं लोग सारे।।सब तेरे सहारे हैं, तेरी दया पे निर्भर,सब भक्त तुम्हारे […]

विद्या परमं धनम् — जीवन को आलोकित करने वाली शक्ति

April 23, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– विद्या परमं धनम् ! यह केवल एक सूक्ति नहीं, बल्कि जीवन का शाश्वत सत्य है। धन, पद, यश और वैभव समय के साथ बदलते रहते हैं, परंतु ज्ञान वह संपदा है […]

शिवत्व की यात्रा : न मे मृत्युशंका न मे जातिभेदः

April 22, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– आश्रम में संध्या उतर चुकी थी। वटवृक्ष के नीचे बैठे सुधांशु की आँखें बंद थीं। आचार्य के शब्द उसके भीतर मर्मस्थान को वेध रहे थे। वास्तव मे ये विचार अब परिपक्व […]

शिवत्व की यात्रा : गुरु की माया

April 19, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रातःकाल मे सूर्य की बाल किरणें जब धरती को स्पर्श कर रही थीं, उसी समय सुधांशु आश्रम के प्रांगण में खड़ा था। वह स्थान जहाँ से उसकी यात्रा आरम्भ हुई थी— […]

शिवत्व की यात्रा : दिव्य यात्रा के साक्षी अनिरुद्ध की वापसी

April 18, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रात्रि का दूसरा प्रहर था। आकाश में चंद्रमा शांत था, और उसकी चाँदनी धरती पर एक कोमल श्वेत आभा बिखेर रही थी। हवेली के पीछे वही उपवन—जहाँ कुछ समय पूर्व प्रेम […]

शिवत्व की यात्रा : प्रेम की अग्निपरीक्षा

April 17, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– संध्या का समय था। आकाश में सूर्य धीरे-धीरे अस्त हो रहा था, और उसकी किरणें आकाश को लालिमा से भर रही थीं—मानो प्रकृति स्वयं किसी गहन भाव से रंग गई हो। […]

शिवत्व की यात्रा : यदि सब कुछ शिव हैं… तो प्रेम का स्थान कहाँ

April 13, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– भोर की शीतलता अभी पूर्णतः विलीन नहीं हुई थी। मंदिर से लौटते समय सुधांशु के भीतर एक अद्भुत शांति थी, पर उसी के साथ एक नया प्रश्न भी जन्म ले चुका […]

शिवत्व की यात्रा : रहस्यमयी संन्यासी और परदे के पीछे का सत्य

April 12, 2026 0

अब कथा उस रहस्य के द्वार पर पहुँचती है जहाँ पाठक और साधक—दोनों के भीतर एक ही प्रश्न उठता है— “यह रहस्यमयी संन्यासी वास्तव में कौन है?” इसी रहस्य को धीरे-धीरे उद्घाटित करते हुए, गहन […]

शिवत्व की यात्रा : चेतना का जागरण

April 11, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रात्रि का अंतिम प्रहर… आकाश गहन अंधकार में डूबा था, पर उस अंधकार के भीतर एक अदृश्य प्रकाश छिपा हुआ था—जैसे सृष्टि स्वयं किसी महान परिवर्तन की प्रतीक्षा कर रही हो। […]

शिवत्व की यात्रा : रहस्य के परे जाती साधना

April 8, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव— रात का तीसरा प्रहर था। चारों ओर गहरा सन्नाटा छाया हुआ था। हवेली के भीतर सब सो चुके थे, किन्तु सुधांशु की आँखों में नींद का नामोनिशान नहीं था। उसके भीतर […]

शिवत्व की यात्रा मे पढ़ें भीतर का शत्रु

April 5, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रात गहरी हो चुकी थी। हवेली के चारों ओर फैली शांति में केवल कभी-कभी पत्तों की सरसराहट सुनाई देती थी। दूर खेतों में जलती हुई मशालों की लौ हवा के साथ […]

प्रेरक कहानियाँ : शिवत्व की यात्रा मे पढ़ें मानसिक शत्रुओं का विरेचन और शान्ति की अनुभूति

April 4, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– संध्या का समय था। सूर्य धीरे-धीरे पश्चिम के क्षितिज में विलीन हो रहा था और आकाश में हल्की सुनहरी आभा फैल रही थी। हवेली के प्रांगण में एक विचित्र शान्ति थी, […]

शिवत्व की यात्रा : त्याग का अग्निपथ

April 2, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– जमींदार के कक्ष में कुछ क्षण के लिए ऐसा मौन छा गया मानो समय स्वयं रुक गया हो। सुधांशु के शब्द हवा में स्थिर हो गए थे— “यदि आवश्यक हुआ तो […]

शिवत्व की यात्रा : शक्ति और धर्म का संवाद

March 31, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– भोर का पहला प्रकाश अभी क्षितिज पर उभर ही रहा था। हल्की धुंध खेतों के ऊपर तैर रही थी और दूर कहीं बैलों की घंटियों की धीमी आवाज सुनाई दे रही […]

शिवत्व की यात्रा : रहस्यमयी संन्यासी और पहली कसौटी

March 30, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रात का सन्नाटा गहरा था। आकाश में बादल छाये हुए थे और चन्द्रमा कभी-कभी उनके बीच से झाँक जाता था। सुधांशु के घर के आँगन में दीपक की लौ हल्की-हल्की काँप […]

शिवत्व की यात्रा : धर्म और प्रेम का द्वंद्व

March 29, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रात धीरे-धीरे गहरी हो चुकी थी। आकाश में चन्द्रमा बादलों के पीछे छिपता-उभरता जा रहा था। सुधांशु के घर के आँगन में एक दीपक जल रहा था जिसकी लौ हवा के […]

शिवत्व की यात्रा : तप की अग्नि है गृहस्थाश्रम

March 28, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– संध्या का समय था। सूर्य पश्चिम दिशा में ढल रहा था और आकाश में लालिमा फैलती जा रही थी। सुधांशु आश्रम की पगडंडी से आगे बढ़ रहा था। उसके कदम धीमे […]

“भए प्रगट कृपाला, दीनदयाला” का भाषिक अर्थ, अवधारणा एवं संदर्भ

March 27, 2026 0

शब्दसंधान ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय तो आइए! हम अब प्रत्येक शब्द के अर्थगौरव से परिचित हो लेँ। शब्द हैँ :– श्री रामनवमी, भए, प्रगट, कृपाला तथा दीनदयाला। ‘श्री रामनवमी’ के संदर्भ मे “भये प्रगट […]

शिवत्व की यात्रा : परीक्षा का आरम्भ

March 26, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– भोर का समय था। पूर्व दिशा में सूर्य की हल्की आभा प्रकट होने लगी थी। आश्रम के चारों ओर फैली निस्तब्धता धीरे-धीरे पक्षियों के कलरव से टूट रही थी। वृक्षों की […]

शिवत्व की यात्रा : सम्बन्धों का प्राण है धर्म

March 25, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव-– रात का अंतिम प्रहर था। आकाश में चन्द्रमा अपनी शीतलता बिखेर रहा था। आश्रम के पीछे बहने वाली छोटी-सी धारा से जल की मधुर ध्वनि सुनाई दे रही थी। वृक्षों के […]

शिवत्व की यात्रा : रहस्य का पुनः उदय और गुरु की दृष्टि

March 22, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वसंत का प्रारम्भ हो चुका था। आम के वृक्षों पर कोमल बौर आ गया था और हवा में एक मदमस्त सुगन्ध फैलने लगी थी। जीवन में जैसे एक हल्का-सा उल्लास लौट […]

शिवत्व की यात्रा : सम्बन्धों की कसौटी मे धर्म की पहली परीक्षा

March 20, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शीत ऋतु का प्रारम्भ था। प्रातःकाल की धूप अभी कोमल थी और हवा में हल्की ठंडक थी। निरंजन अपने घर के बाहर बैठा था। सामने आँगन में तुलसी के चौरे पर […]

शिवत्व की यात्रा : धर्म और सम्बन्ध मे प्रेम की मर्यादा

March 19, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वर्षा का समय समाप्त हो चुका था। आकाश स्वच्छ था और हवा में हल्की शीतलता घुलने लगी थी। संध्या का समय था। निरंजन घर के आँगन में बैठा था। सामने तुलसी […]

शिवत्व की यात्रा : साधना की गुप्त परम्परा

March 16, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– उस रहस्यमयी अतिथि के जाने के बाद कई दिनों तक निरंजन के भीतर एक अजीब जिज्ञासा बनी रही। वह व्यक्ति कौन था? उसका उद्देश्य क्या था? और उसे कैसे पता था […]

शिवत्व की यात्रा : साधना का दर्पण

March 14, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शरद की एक गहरी रात्रि थी। आकाश में बादल छाए हुए थे और हवा में एक विचित्र नमी थी। घर के बाहर पीपल के पत्तों की हल्की सरसराहट सुनाई दे रही […]

शिवत्व की यात्रा : भक्ति की वास्तविक परीक्षा

March 13, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– समय अपने शांत प्रवाह में आगे बढ़ता रहा। निरंजन का जीवन अब एक संतुलित लय में चल रहा था। सुबह का ध्यान, दिन भर का श्रम, परिवार की जिम्मेदारियाँ और रात्रि […]

शिवत्व की यात्रा : गृहस्थाश्रम का यज्ञ

March 10, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव— समय धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था। निरंजन का जीवन अब आश्रम की एकांत साधना से निकलकर गृहस्थ जीवन की जटिलताओं में प्रवाहित हो चुका था। उसका घर छोटा था, जीवन साधारण […]

शिवत्व की यात्रा : भीतर के अंधकार से युद्ध है गृहस्थ का तप

March 9, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रभात का समय था। पूर्व दिशा में सूर्य की पहली किरणें आकाश को हल्की स्वर्णिम आभा से भर रही थीं। आश्रम के प्रांगण में शांति थी, पर उस शांति के भीतर […]

शिवत्व की यात्रा का विस्तार : व्यक्ति से युगचेतना तक

March 6, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शरद पूर्णिमा की रात्रि थी। चन्द्रमा का प्रकाश आश्रम की शिला-दीवारों पर शान्त चाँदी-सा बिछा हुआ था। हवा में न शीत का तीखापन था, न वर्षा की नमी—केवल एक निर्मल संतुलन। […]

शिवत्व की यात्रा का दार्शनिक स्वरूप : समाधि से समाज तक

March 4, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रभात का समय था। आश्रम में सामान्य दिनचर्या प्रारम्भ हो चुकी थी—गौशाला में सेवा, रसोई में धूप की सुगन्ध, प्रार्थना का मधुर गान। परन्तु निरंजन के भीतर कुछ असामान्य था। समाधि […]

शिवत्व की यात्रा : समाधि की देहरी

March 3, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शरद की स्वच्छ रात्रि थी। आकाश निर्मल, तारकाओं से भरा हुआ, मानो अनन्त का प्रत्यक्ष साक्षात्कार हो रहा हो। आश्रम के उत्तर दिशा में स्थित उस प्राचीन पीपल वृक्ष के नीचे […]

शिवत्व की यात्रा : नाद, नृत्य और ओंकार का मिलन

March 1, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वर्षा ऋतु का अन्तिम चरण था। आकाश स्वच्छ था, परन्तु वायु में अभी भी जल की शीतलता थी। आश्रम के उत्तर दिशा में एक प्राचीन कक्ष था, जिसे नाद-मण्डप कहा जाता […]

शिवत्व की यात्रा मे मर्यादा, प्रेम और त्याग का अग्निसंस्कार

February 26, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– आश्रम में उस दिन एक गंभीरता थी। प्रभात की वायु में भी जैसे कोई गूढ़ संकेत था। निरंजन शिवालय के सामने बैठा था, पर आज उसका ध्यान स्थिर नहीं था। उसके […]

शिवत्व की यात्रा का अगला चरण : मौन-तप और वाणी की शुद्धि

February 25, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– श्रावण का अन्तिम सप्ताह बीत चुका था। आश्रम का वातावरण अब अधिक शांत था। वर्षा की रिमझिम ध्वनि, वृक्षों से टपकती जल-बूँदें और दूर बहती नदी का मधुर स्वर—सब मिलकर एक […]

शिवत्व की यात्रा का अगला चरण : भक्ति, ध्यान और ज्ञान की त्रिवेणी

February 24, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– आश्रम में उस दिन एक विशेष वातावरण था। श्रावण मास का अंतिम सोमवार था। प्रातःकाल से ही शिव-मंदिर में अभिषेक चल रहा था। जल, दुग्ध, बिल्वपत्र और मंत्रोच्चार से पूरा परिसर […]

शिवत्व की यात्रा का एक और चरण : आसक्ति से मुक्ति

February 23, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रभात का समय था। आश्रम के पीछे बहने वाली छोटी नदी के तट पर निरंजन अकेला बैठा था। जल का प्रवाह शांत था, परन्तु उसके भीतर निरन्तर गति थी। वह उसी […]

शिवत्व की यात्रा : मौन का प्रकाश

February 22, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रातःकाल का समय था। आकाश में हल्की लालिमा फैल रही थी। पूर्व दिशा में सूर्य अभी उगा नहीं था, परन्तु उसका संकेत धरती को जागृत कर चुका था। आश्रम के प्रांगण […]

शिव की महिमा : जन-मन मे शिवत्व का प्रस्फुटन

February 21, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– महाशिवरात्रि की उस साधना-रात्रि के पश्चात् गाँव का वातावरण जैसे दीर्घकाल तक उसी भाव में डूबा रहा। यह परिवर्तन क्षणिक उत्साह का परिणाम नहीं था; यह धीरे-धीरे लोकजीवन में उतरने लगा। […]

मनुजत्व से शिवत्व तक की अगली कड़ी : मन्त्र, मूर्ति और महातत्त्व

February 20, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव — दार्शनिक चर्चा ने गाँव की चेतना को गहरा किया था, पर अब एक नया प्रश्न उठने लगा— क्या यह समस्त साधना केवल आन्तरिक है, या इसके लिए परम्परागत उपासना की […]

शिवत्व की अन्तर्यात्रा का ताण्डव

February 18, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव-– गाँव में बाहरी व्यवस्था के साथ समन्वय स्थापित हो जाने के बाद जीवन पुनः अपनी सहज गति में लौट आया, किन्तु भीतर कुछ ऐसा था जो अब पहले जैसा नहीं रहा। […]

शिवत्त्व : प्रकाश-तत्त्व और चेतना का सनातन सूत्र

February 10, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शिव न किसी एक रूप, मूर्ति या कल्पना तक सीमित हैं। शिव तत्त्व हैं—अविनाशी, अव्यक्त और सर्वव्यापक।वेद उद्घोष करते हैं— “एको देवः सर्वभूतेषु गूढःसर्वव्यापी सर्वभूतान्तरात्मा।”(श्वेताश्वतर उपनिषद् 6.11) शिव वही एक देव […]

विद्या परमं धनम् : भारतीय शास्त्रीय परम्परा में ज्ञान, साधना और लोकहित का दर्शन

February 8, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– “विद्या परमं धनम्।” — यह केवल एक सूक्ति नहीं, अपितु भारतीय सभ्यता की आत्मा है। मानव इतिहास में यदि किसी संस्कृति ने ज्ञान को सत्ता, संपत्ति और सामर्थ्य से ऊपर स्थान […]

मेघनाद वध : रावण की निश्चित हार का प्रमाण

February 7, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– लंका अब केवल नगर नहीं थी—वह एक भय-शाला बन चुकी थी। रावण ने सभा में कहा—“अब मेरा पुत्र जाएगा।” इंद्रजीत। जिसने कभी पराजय नहीं देखी थी।जिसके अस्त्र देवताओं को भी चकित […]

सेतुसमुद्रम : धर्म पहले संवाद करता है और युद्ध बाद में

February 5, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– समुद्र सामने था—अथाह, गंभीर और चुनौतीपूर्ण। यह वही समुद्र थाजो रावण के अहंकार की सीमा बन चुका था। वानर सेना ठिठकी नहीं,पर प्रश्न था—“कैसे?” राम मौन थे। विभीषण ने सागर से […]

लंका की गर्दन पर अंगद का पैर

February 4, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– हनुमान लौट आए थे। समुद्र के उस पार से नहीं,बल्कि एक नए युग की घोषणा लेकर। उन्होंने जो देखा था,जो किया था—वह केवल कथा नहीं थी,वह प्रमाण था। वानर सेना पहले […]

रावण के आतंक का अन्त

February 3, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– हनुमानजी ने लंका को पहली बार देखा तो ठिठक गए। यह वैसी नहीं थी जैसी कथाओं में कही गई थी।यह केवल भय की नगरी नहीं थी—यह वैभव की नगरी थी। स्वर्ण-प्रासाद, […]

रामायण : रावण-निर्मित भय का उन्मूलन

February 1, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रावण को किसी ने देखा नहीं था—फिर भी सबने उसे देखा हुआ मान लिया था। किष्किंधा से दक्षिण की ओर बढ़ते वानर-दल के पाँव दृढ़ थे,पर मन अनिश्चित। वन बदलते जा […]

रामायण : सीता-हरण के पश्चात की कहानी

January 31, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वह वन निःशब्द था। पत्तों पर गिरती धूप तक जैसे ठिठक गई हो।धरती पर पड़ा वह वृद्ध गिद्ध—जटायु—अब उड़ नहीं सकता था, पर उसकी आँखों में अब भी आकाश शेष था। […]

प्रेम की प्रकृति

January 14, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– मानव शरीर पंचतत्त्व से निर्मित है। ये पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश के रूप मे जाने जाते हैं। भारतीय दार्शनिक परम्परा में ये पाँचों तत्त्व केवल शरीर के घटक नहीं […]

ईश्वरीय सत्ता की अभिव्यक्ति

January 3, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– जैव जगत्, प्राणी समूह एवं सकल दृश्य अदृश्य सत्ता के रूप में वह सर्वोच्च सत्ता ही सर्वत्र अभिव्यक्त है। ईश सृजित इस सृष्टि में प्रत्येक प्राणी आदरणीय है और पारिस्थितिक तंत्र […]

Sacred song of Geeta

January 2, 2026 0

Dr. Raghavendra Kumar Raghav The Bhagavad Gita’s sacred song,Invites us to a devotion strong.In this world of boundaries, wide and deep,Bhakti’s power, our souls it seeks to sweep. Vedanta’s wisdom, ancient and grand,Transcends the limits […]

Kamakhya Temple

November 26, 2025 0

Dr. Raghavendra Kumar Raghav– The Kamakhya Temple is one of the 51 Shakti Peethas spread across the Indian subcontinent. According to Hindu mythology: Sati, the first consort of Lord Shiva, self-immolated during the great yajna […]

Shiva : Beyond the Senses and Elements

July 13, 2025 0

Dr. Raghavendra Kumar Raghav The opening declaration “I am beyond the senses. I am not the five elements. I am consciousness, bliss, I am Shiva.” — strikes at the root of human misidentification. From birth, […]

राम भारत की आत्मा हैं

April 10, 2025 0

राम भारत की आत्मा हैं, प्रभु श्रीराम पूर्ण परात्पर ब्रह्म हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का त्याग, शील-संयम और लोकोत्तर चरित्र सभी के लिए ग्राह्य है। जो मानो कल्पवृक्षों के बगीचे हैं तथा समस्त आपत्तियों […]

महाशिवरात्रि से ही ‘सृष्टि’ का आरम्भ हुआ था

February 25, 2025 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• ‘शिव’ का अर्थ कल्याण, शुभ, मंगल इत्यादिक है। शिव की दो काया मानी गयी है :– सूक्ष्म और स्थूल। जिसका प्रकटीकरण स्थूल रूप मे होता है, वह ‘स्थूल काया’ है […]

पापबुद्धि को ‘पुण्यबुद्धि’ की ओर ले जाता ‘तीर्थ’

January 15, 2025 0

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय(वैयाकरण एवं भाषाविज्ञानी), प्रयागराज। हम जैसाकि जानते हैँ– तीर्थोँ का राजा प्रयाग कहलाता है, जिसके सहयोगी तीर्थ हैँ :– उज्जैन, हरिद्वार तथा नासिक, जहाँ कुम्भपर्व का आयोजन होता है।अब प्रश्न है, वास्तव […]

तीर्थराजप्रयाग-महाकुम्भदर्शन– दो

January 13, 2025 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय(वैयाकरण एवं भाषाविज्ञानी), प्रयागराज।•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• इन दिनो प्रयागराज मे एक ऐसा उत्साह है; उमंग है तथा चहल-पहल है, जो अनिर्वचनीय है। जिज्ञासा, कुतूहल एवं उत्सुकता बाँधे नहीँ बँधती। एक प्रकार से आस्था […]

तीर्थराजप्रयाग-महाकुम्भदर्शन– एक

January 12, 2025 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय(वैयाकरण एवं भाषाविज्ञानी), प्रयागराज। तीर्थोँ का राजा प्रयागराज पलक-पाँवड़े बिछाये, देश-देशान्तर से आस्था, श्रद्धा, विश्वास एवं भक्ति का भाव लेकर आनेवाले समस्त तीर्थयात्रियोँ के स्वागत मे प्रतीक्षारत है। यह वही प्रयाग […]

शाश्वत सत्य और जीवन की अपरिहार्य व्यवस्था है परिवर्तन

December 29, 2024 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ परिवर्तन, प्रकृति का शाश्वत नियम और जीवन का अपरिहार्य सत्य है। यह केवल एक दार्शनिक विचार नहीं, बल्कि हर चर और अचर वस्तु पर लागू होने वाला प्राकृतिक नियम है। […]

वैदिक हिंदू सनातन संस्कृति: दिव्य मूल्यों की अग्रदूत

December 17, 2024 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’– वैदिक हिंदू सनातन संस्कृति एक गुण-आधारित संस्कृति है, जिसमें जीवन के हर पहलू में पवित्रता, समता, और सह-अस्तित्व जैसे दिव्य गुणों को सर्वोपरि माना गया है। इस संस्कृति ने न […]

पारमार्थिक भावना, समय का सदुपयोग और औदार्य: समाज के उत्थान की सच्ची संपदा

November 25, 2024 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’– मनुष्य के जीवन में अनेक गुण और मूल्य होते हैं, लेकिन उनमें से कुछ ऐसे हैं जो उसे सच्चे अर्थों में महान और समाज के लिए उपयोगी बनाते हैं। इनमें पारमार्थिक […]

जीवन की सार्थकता और विचारशीलता : एक विश्लेषण

November 24, 2024 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’— जीवन की सार्थकता का प्रश्न हर व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है। हम सभी अपने जीवन को उद्देश्यपूर्ण और उपयोगी बनाने की आकांक्षा रखते हैं। इस दिशा में विचारशीलता का महत्व सर्वोपरि […]

मन की दोहरी प्रकृति

November 23, 2024 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’– मन एक बेचैन बंदर की तरह है, जो लगातार एक विचार से दूसरे विचार के मध्य झूलता रहता है। मन ही हमारी भावनाओं, आकांक्षाओं, भय और आसक्तियों का जन्मस्थान है। यह […]

प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति एक वरदान मे बरगद के औषधीय गुण

November 17, 2024 0

राघवेन्द्र कुमार राघव (वैकल्पिक-प्राकृतिक चिकित्सक)— बरगद का पञ्चाङ्ग उपयोगी है। बरगद का प्रत्येक अंश अमृत के गुणो से भरा है। फल, पत्ते, दूध, छाल और जटा सबका आयुर्वेद मे रोगनाशक के रूप उपयोग होता है। […]

Mind Is A Double-Edged Sword

August 28, 2024 0

Raghavendra Kumar Raghav– The mind, often hailed as the fastest entity, can be both our greatest ally and our most formidable foe. Its swiftness can lead us to the divine nectar of the Supreme Being, […]

Soulful happiness is not depend on physical tools

July 3, 2024 0

Dr. Raghavendra Kumar Tripathi Raghav– In today’s whirlwind of activity, a relentless pursuit of material happiness has become the reigning champion. We race towards ever-growing bank accounts, coveting the newest gadgets and designer labels. This […]

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